राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फेडरल रिजर्व की गवर्नर लीज़ा कुक के खिलाफ तीन सदस्यीय जांच पैनल बनाया है। पैनल यह जांचेगा कि क्या कुक ने मॉर्गेज से जुड़े दस्तावेज़ों में गलत बयान दिए और क्या ये आरोप उन्हें फेड से हटाने का आधार बन सकते हैं। व्हाइट हाउस में 5 नवंबर को सुनवाई होगी। यह प्रक्रिया फेड गवर्नर को हटाने में उचित प्रक्रिया की शर्तों को लेकर प्रशासन के रुख को तय कर सकती है। साथ ही, इससे केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता को लेकर बाजार की चिंता फिर बढ़ सकती है।
ट्रंप ने पैनल में किन्हें नियुक्त किया
ट्रंप ने शुक्रवार को 7 अक्टूबर की तारीख वाले राष्ट्रपति ज्ञापन में पैनल की घोषणा की। इसमें राष्ट्रीय आर्थिक परिषद के अध्यक्ष और राष्ट्रपति के मुख्य आर्थिक सलाहकार केविन हैसेट, समान रोजगार अवसर आयोग की अध्यक्ष एंड्रिया लुकास और सरकारी नैतिकता कार्यालय के कार्यवाहक निदेशक कीथ सॉन्डरलिंग शामिल हैं। ज्ञापन के तहत पैनल कार्यकारी शाखा और संघीय एजेंसियों के संबंधित अधिकारियों से राय ले सकता है।
ट्रंप ने लिखा कि कानून का ईमानदारी से पालन सुनिश्चित करना राष्ट्रपति का दायित्व है। इसमें ऐसे अधीनस्थ अधिकारियों को हटाना भी शामिल है, जिनके बारे में उनका मानना हो कि वे सच नहीं बोल सकते या कानून का पालन नहीं करेंगे। पैनल जांच करेगा कि क्या कुक ने एक या अधिक मॉर्गेज दस्तावेज़ों के सिलसिले में गलत बयान दिए। इसके बाद वह राष्ट्रपति को बताएगा कि उन्हें पद से हटाने का आधार बनता है या नहीं।
5 नवंबर को व्हाइट हाउस में बंद कमरे में सुनवाई
सुनवाई व्हाइट हाउस में 5 नवंबर को होगी और अधिकतम चार घंटे चलेगी। यह आम लोगों के लिए बंद रहेगी, लेकिन इसकी प्रतिलिपि तैयार की जाएगी। ज्ञापन के अनुसार, कुक को सुनवाई में उपस्थित होकर पैनल, न्याय विभाग के अधिकारियों और अपने वकीलों के सवालों के जवाब देने होंगे। पैनल को उन सबूतों की जानकारी भी उन्हें देनी होगी जिन पर वह विचार कर रहा है।
कुक बयान, लिखित साक्ष्य और गवाहों के लिखित बयान पेश कर सकती हैं तथा संबंधित साक्ष्यों को चुनौती दे सकती हैं। वह अपना पक्ष लिखित रूप में भी रख सकती हैं, जिसे सुनवाई से तीन दिन पहले जमा करना होगा। ज्ञापन में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि व्हाइट हाउस जांच सामग्री या साक्ष्यों का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक करेगा या नहीं।
कुक के वकीलों, एबे लोवेल और नॉर्म आइज़न ने प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि ट्रंप पहले ही कई बार कह चुके हैं कि उन्होंने कुक को हटाने का फैसला कर लिया है, जिससे सुनवाई महज औपचारिकता बन सकती है। वकीलों ने कहा कि कुक तथ्य पेश करने को तैयार हैं, मॉर्गेज धोखाधड़ी के आरोपों से इनकार करती हैं और मानती हैं कि उन्हें फेड के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स से हटाने का कोई कानूनी आधार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्तावित प्रक्रिया वास्तव में निष्पक्ष समीक्षा होगी या नहीं, यह जानने के लिए उन्होंने व्हाइट हाउस से संपर्क किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने उचित प्रक्रिया पर उठाए थे सवाल
यह जांच सुप्रीम कोर्ट के जून में दिए गए फैसले के बाद हो रही है। अदालत ने पाया था कि कुक को हटाने की ट्रंप की पिछली कोशिश ने उनके उचित प्रक्रिया के अधिकारों का उल्लंघन किया था। अगस्त 2025 में ट्रंप ने सोशल मीडिया पर घोषणा की थी कि वह कुक को “कारण सहित” बर्खास्त कर रहे हैं। उस समय उन्हें आरोपों का जवाब देने का मौका नहीं दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने यह नहीं बताया था कि कुक को हटाने के लिए व्हाइट हाउस को कौन-कौन से कदम उठाने चाहिए। जांच और सुनवाई से अदालत की प्रक्रियागत सुरक्षा संबंधी चिंताओं को दूर करने की कोशिश होती दिखती है, लेकिन यह प्रक्रिया उन आवश्यकताओं को पूरा करेगी या नहीं, यह अभी साफ नहीं है।
फेड के नेतृत्व पर विवाद से ब्याज दरों की अनिश्चितता
यह जांच फेड के मौजूदा बोर्ड में बदलाव की ट्रंप की कोशिशों को लेकर चिंता फिर बढ़ा सकती है। ट्रंप लंबे समय से ब्याज दरों में तेज कटौती की मांग करते रहे हैं और फेड के तत्कालीन अध्यक्ष जेरोम पॉवेल की आलोचना करते रहे हैं कि उन्होंने दरें तेजी से नहीं घटाईं। न्याय विभाग ने फेड मुख्यालय के नवीनीकरण की निगरानी को लेकर भी जांच की है। पॉवेल ने जनवरी में इससे जुड़े समन का खुलासा किया था और कहा था कि यह जांच उन्हें हटाने की कोशिश का बहाना है।
पॉवेल का अध्यक्ष के रूप में कार्यकाल मई में समाप्त हुआ, लेकिन उन्होंने फेड के बोर्ड में बने रहने का फैसला किया। कुक को हटाने की कोशिश आगे बढ़ती है तो इससे यह भी प्रभावित हो सकता है कि पॉवेल बोर्ड में बने रहेंगे या नहीं।
मौद्रिक नीति की दिशा भी अनिश्चित बनी हुई है। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी ने पिछले महीने ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की थी। 2023 के बाद यह पहली बढ़ोतरी थी। फेड ने 2025 में तीन बार दरें घटाई थीं और इस साल की शुरुआत में आगे कटौती पर विचार किया था। गुरुवार को ट्रंप द्वारा नियुक्त फेड गवर्नर क्रिस्टोफर वालर ने कहा कि ईरान में युद्ध और उससे ऊर्जा बाजारों में आई बाधा के कारण महंगाई का दबाव बढ़ सकता है, जिससे दरों में और बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है।
कुक का मामला एक गवर्नर पर लगे आरोपों के साथ-साथ, ब्याज दरों पर मतभेद के बीच फेड के नेतृत्व में बदलाव की प्रक्रिया से भी जुड़ा है। पैनल ने अभी अपनी जांच का निष्कर्ष नहीं दिया है और यह स्पष्ट नहीं है कि उसकी रिपोर्ट के आधार पर व्हाइट हाउस आगे कोई कार्रवाई करेगा या नहीं।