कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने 16 अक्टूबर को एडमंटन में अंतिम चुनावी रैली के दौरान अल्बर्टा को स्वतंत्रता पर जनमत-संग्रह की कानूनी प्रक्रिया शुरू करने से रोकने की अपील की। उन्होंने कहा कि अलगाव की दिशा में बढ़ने से कारोबार, निवेशकों और प्रांत के निवासियों के लिए वर्षों तक अनिश्चितता बनी रह सकती है।
कनाडा की एकता के समर्थन में आयोजित कार्यक्रम में कार्नी ने कहा कि अल्बर्टा कनाडा का हिस्सा बना रहेगा या नहीं, यह अभी तय नहीं है और मतदान प्रतिशत नतीजे को प्रभावित करेगा। उन्होंने कहा कि यह मतदान “कोई खेल” या “पोकर का हाथ” नहीं है। उनके अनुसार, अलगाव के समर्थन को “खतरनाक दांव” माना जा सकता है, जिसकी कीमत अल्बर्टा के लोगों और दूसरे कनाडाई नागरिकों को आर्थिक अवसरों के रूप में चुकानी पड़ सकती है।
19 अक्टूबर का मतदान स्वतंत्रता पर अंतिम फैसला नहीं
अल्बर्टा के मतदाता 19 अक्टूबर को इस सवाल पर मतदान करेंगे कि प्रांत को कनाडा का हिस्सा बने रहना चाहिए या नहीं और क्या प्रांतीय सरकार को भविष्य में स्वतंत्रता पर जनमत-संग्रह के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया जाना चाहिए। इस मतदान से अल्बर्टा की संवैधानिक स्थिति तुरंत नहीं बदलेगी, लेकिन यह अलगाव की प्रक्रिया का पहला कदम हो सकता है। इसलिए ऊर्जा कंपनियां, सीमा-पार व्यापार करने वाले कारोबारी और वित्तीय बाजार के प्रतिभागी इसके नतीजे पर नजर रख रहे हैं।
अल्बर्टा में कनाडा के प्रमाणित तेल भंडार का अधिकांश हिस्सा है और उसके पास दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल भंडार आधार है। प्रांत के कच्चे तेल के निर्यात का करीब 90% अमेरिका जाता है। कनाडा की संघीय व्यवस्था, ऊर्जा नीति या सीमा-पार व्यापार समझौतों को लेकर लंबे विवाद से पाइपलाइन विकास, संसाधन कराधान, नियामकीय अधिकार और कंपनियों के भविष्य के निवेश माहौल के आकलन पर असर पड़ सकता है।
एक दिन पहले एडमंटन और कैलगरी में दिए भाषणों में कार्नी ने कनाडा की अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर निर्भरता घटाने की जरूरत पर भी जोर दिया था। उन्होंने चेतावनी दी कि कनाडा के बाहर की ताकतें अधिक नियंत्रण हासिल करने के लिए देश को बांटने की कोशिश कर रही हैं। मौजूदा परिस्थितियों में उन्होंने अल्बर्टा के लोगों से अतिरिक्त अनिश्चितता न लेने की अपील की।
कार्नी और स्मिथ की दुर्लभ साझा मौजूदगी
कार्नी ने अलगाव के विरोध में अल्बर्टा में लगातार दो दिन प्रचार किया। 16 अक्टूबर को इससे पहले रेड डीयर में वह अल्बर्टा की प्रीमियर डेनियल स्मिथ के साथ मंच पर दिखाई दिए। दोनों ने अल्बर्टा के कनाडा में बने रहने का समर्थन किया।
स्मिथ अल्बर्टा की स्वतंत्रता का विरोध करती हैं, लेकिन उन्होंने मतदान कराने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि कार्नी के 18 महीने के कार्यकाल में ओटावा और अल्बर्टा के संबंध सुधरे हैं। उनके मुताबिक, कार्नी सरकार ने उन नौ संघीय कानूनों में से सात पर कार्रवाई की है, जिनका प्रांत विरोध करता था। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों सरकारें प्रस्तावित तेल पाइपलाइन परियोजना पर मिलकर काम कर रही हैं।
स्मिथ ने यह भी उल्लेख किया कि कार्नी का बचपन अल्बर्टा में बीता है और वह अब भी एडमंटन ऑयलर्स टीम के समर्थक हैं। इससे पहले उन्होंने एक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए कहा था कि अल्बर्टा के 22% निवासी अब भी कनाडा से अलग होने का समर्थन करते हैं। उनके अनुसार, इस आंकड़े को नजरअंदाज करना संभव नहीं है।
स्वतंत्रता समर्थक तान्या क्लेमेंट्स ने कहा कि कार्नी और स्मिथ के बीच हुआ समझौता अलगाववादी खेमे की संघीय सरकार के खिलाफ शिकायतों का समाधान कम और अनेक शर्तों वाले मौखिक वादों का समूह अधिक दिखाई देता है।
अमेरिकी व्यापार दबाव से बढ़ा दांव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कनाडा पर लगातार व्यापारिक दबाव बना रहे हैं और उन्होंने कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की धमकी भी दी है। ऐसे माहौल में अल्बर्टा की स्वतंत्रता पर बहस केवल प्रांतीय अधिकारों तक सीमित नहीं रहती। इसका संबंध कनाडा-अमेरिका ऊर्जा प्रवाह, शुल्क और आपूर्ति-श्रृंखला संबंधों से भी है।
कार्नी ने माना कि अल्बर्टा लंबे समय से ओटावा की ऊर्जा नीतियों से नाराज रहा है। उन्होंने कहा कि प्रांत में बड़े होते समय उन्होंने देखा कि संघीय फैसलों से स्थानीय लोगों में यह भावना पैदा हुई कि अल्बर्टा के संसाधन वास्तव में उनके अपने नहीं हैं। साथ ही, उन्होंने जोर दिया कि अल्बर्टा उनका घर है और उनका परिवार, शिक्षा तथा मूल्य इस प्रांत से गहराई से जुड़े हैं।
कनाडा में बने रहने के समर्थक कुछ अल्बर्टावासियों ने स्मिथ द्वारा मतदान आगे बढ़ाने की आलोचना की। कैलगरी की सेवानिवृत्त निवासी डेब ली ने कहा कि पूरे प्रांत और देश को ऐसे विवाद के परिणाम क्यों भुगतने चाहिए, जिसे सक्रिय रूप से केवल कुछ लोग आगे बढ़ा रहे हैं, यह समझ से परे है।
संघीय दलों ने अलगाव का विरोध किया
संघीय कंजर्वेटिव पार्टी के नेता और कार्नी के प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी पियरे पोइलिवेयर ने भी 16 अक्टूबर को अल्बर्टावासियों से कनाडा में बने रहने की अपील की। उन्होंने लोगों से दूसरे कनाडाई नागरिकों से मुंह न मोड़ने और उनके साथ खड़े रहने को कहा।
कार्नी, स्मिथ और पोइलिवेयर कनाडा की एकता बनाए रखने के मुद्दे पर सहमत हैं, लेकिन 19 अक्टूबर के मतपत्र पर आव्रजन और प्रांतीय अधिकारों से जुड़े नौ अन्य सवालों पर उनके मत अलग हैं। स्मिथ चाहती हैं कि मतदाता इन उपायों का समर्थन करें, जबकि कार्नी उन्हें खारिज करने की अपील कर रहे हैं।
नतीजा सबसे पहले यह बताएगा कि अल्बर्टा के निवासी स्वतंत्रता की दिशा में कानूनी प्रक्रिया शुरू करने के बारे में क्या सोचते हैं। इससे यह तुरंत तय नहीं होगा कि प्रांत कनाडा से अलग होगा या नहीं। बाजार के लिए आगे ऊर्जा निर्यात की दिशा, ओटावा और अल्बर्टा के बीच अधिकारों का बंटवारा तथा अमेरिका के साथ कनाडा के व्यापारिक संबंध सबसे महत्वपूर्ण कारक बने रहेंगे।