पोप लियो XIV की रोम में फेफड़ों के कैंसर की सर्जरी हुई है, जबकि उनके बड़े भाई लुई प्रीवोस्ट फ्लोरिडा में मल्टिपल मायलोमा का इलाज करा रहे हैं। वेटिकन ने बताया कि 71 वर्षीय पोप की हालत स्थिर है और दाहिने फेफड़े का निचला हिस्सा निकालने की प्रक्रिया के दौरान कोई जटिलता नहीं आई। परिवार या वेटिकन ने अभी दीर्घकालिक स्वास्थ्य पूर्वानुमान की जानकारी नहीं दी है।
90 मिनट की सर्जरी के बाद पोप की हालत स्थिर
पोप का जन्म नाम रॉबर्ट फ्रांसिस प्रीवोस्ट है और वह कैथोलिक चर्च के पहले अमेरिकी मूल के प्रमुख हैं। मंगलवार को रोम के जेमेली अस्पताल में उनकी करीब 90 मिनट तक सर्जरी हुई। डॉक्टरों ने उनके दाहिने फेफड़े का निचला लोब निकाला और फेफड़े के एडेनोकार्सिनोमा की पहचान की। यह कैंसर आम तौर पर फेफड़े के बाहरी हिस्से में विकसित होता है।
वेटिकन के अनुसार, प्रक्रिया सफल रही और इसमें कोई जटिलता नहीं हुई। कुछ समय निगरानी में रखने के बाद पोप को होश आ गया और उन्हें अस्पताल के कमरे में वापस ले जाया गया। बुधवार सुबह वेटिकन ने कहा कि उन्होंने “शांतिपूर्ण रात” बिताई है और उनके करीब एक सप्ताह तक अस्पताल में रहने की उम्मीद है।
नियमित जांच के दौरान डॉक्टरों को पोप के फेफड़े में एक गांठ मिली थी। उन्होंने रविवार को बताया था कि आने वाले दिनों में उनकी सर्जरी होगी। इसके बाद की जांच में फेफड़े के एडेनोकार्सिनोमा की पुष्टि हुई। यह कैंसर बलगम बनाने वाली कोशिकाओं से शुरू होता है और फेफड़ों के कैंसर के अपेक्षाकृत आम प्रकारों में शामिल है।
लुई प्रीवोस्ट को CAR-T सेल थेरेपी
पोप के बड़े भाई भी कैंसर का इलाज करा रहे हैं। उनकी पत्नी डेबोरा प्रीवोस्ट ने बताया कि लुई को मल्टिपल मायलोमा है। यह रक्त का कैंसर है और वह फ्लोरिडा में अपने घर के पास एक अस्पताल में चल रहे क्लिनिकल ट्रायल में शामिल हैं। उन्होंने बीमारी की अवस्था के बारे में जानकारी नहीं दी।
लुई में मल्टिपल मायलोमा का पहली बार 2017 में पता चला था और 2019 में उनका इलाज हुआ था। डेबोरा के मुताबिक, करीब तीन महीने पहले बीमारी दोबारा लौट आई और उनका रिमिशन समाप्त हो गया। अब उन्हें CAR-T सेल थेरेपी दी जा रही है। इस उपचार में मरीज की प्रतिरक्षा कोशिकाओं को इस तरह तैयार किया जाता है कि वे कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर उन पर हमला कर सकें।
मल्टिपल मायलोमा रक्त और अस्थि-मज्जा को प्रभावित करता है तथा इससे किडनी को भी नुकसान हो सकता है। आम तौर पर इसे पूरी तरह ठीक होने वाली बीमारी नहीं माना जाता, हालांकि मल्टिपल मायलोमा रिसर्च फाउंडेशन के अनुसार पिछले दशक में मरीजों की जीवित रहने की दर में काफी सुधार हुआ है। ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा भी बताती है कि यह बीमारी किडनी को प्रभावित कर सकती है।
दोनों भाई संपर्क में बने हुए हैं
डेबोरा ने कहा कि परिवार “बहुत कुछ झेल रहा है”, लेकिन दोनों भाइयों के लिए सकारात्मक बने रहने की कोशिश कर रहा है। उनके अनुसार, लुई के अस्पताल में भर्ती होने से पहले पिछले सप्ताह दोनों भाइयों ने फोन पर बात की थी और पोप को पता था कि उनके भाई का इलाज शुरू होने वाला है।
लुई ने कहा कि अपने छोटे भाई को भी कैंसर होने की जानकारी पाकर वह स्तब्ध रह गए। पोप के आसपास मौजूद कर्मचारियों से उन्हें पता चला कि सर्जरी पूरी हो गई है, पोप को होश आ गया है और उन्हें दर्द नहीं हो रहा। उन्होंने कहा कि परिवार आगे की खबर का इंतजार “बहुत उम्मीद और सकारात्मकता” के साथ कर रहा है।
फेफड़े के एडेनोकार्सिनोमा का दीर्घकालिक अनुमान बीमारी की अवस्था, मरीज के समग्र स्वास्थ्य और उपचार के प्रति प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है। लक्षण सामने आने से पहले ट्यूमर का पता चलने पर उपचार के विकल्प अधिक हो सकते हैं। बीमारी बढ़ने पर लगातार खांसी, सांस लेने में कठिनाई, थकान और वजन कम होना जैसे लक्षण दिख सकते हैं। वेटिकन ने पोप के कैंसर की अवस्था या आगे के उपचार के बारे में अतिरिक्त जानकारी जारी नहीं की है। लुई की स्थिति से जुड़ी जानकारी भी फिलहाल उनके परिवार और चिकित्सकीय देखभाल कर रहे लोगों के अपडेट तक सीमित है।