अमेरिकी सरकार बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच घरेलू आपूर्ति बढ़ाने के लिए डीजल निर्यात पर पाबंदी या पूर्ण रोक लगाने पर विचार कर रही है। देश में डीजल की औसत कीमत करीब 6.45 डॉलर प्रति गैलन पहुंच गई है। निर्यात सीमित होने से अमेरिकी उपभोक्ताओं को कुछ समय के लिए राहत मिल सकती है, लेकिन लैटिन अमेरिका और यूरोप के खरीदारों के लिए आपूर्ति घटने और लागत बढ़ने का जोखिम है। इसका असर परिवहन, खाद्य पदार्थों और औद्योगिक कीमतों पर पड़ सकता है।
अमेरिका रोजाना 12 लाख से 15 लाख बैरल डीजल निर्यात करता है
अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के अनुसार, अमेरिका की रिफाइनरियां रोजाना करीब 40 लाख से 50 लाख बैरल डीजल का उत्पादन करती हैं, जबकि घरेलू खपत औसतन लगभग 36 लाख बैरल प्रतिदिन है। बची हुई बड़ी मात्रा का निर्यात किया जाता है, जिससे अमेरिका वैश्विक डीजल बाजार का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।
अमेरिकी डीजल निर्यात का लगभग 60% से 70% लैटिन अमेरिका जाता है। मेक्सिको, ब्राजील, चिली और इक्वाडोर परिवहन, कृषि और विनिर्माण गतिविधियों के लिए इन खेपों पर निर्भर हैं। फ्रांस, नीदरलैंड और ब्रिटेन समेत यूरोपीय बाजार भी अन्य स्रोतों से मिलने वाली आपूर्ति को पूरा करने के लिए अमेरिकी डीजल आयात करते हैं।
महंगे डीजल से परिवहन लागत पर दबाव
अमेरिका में डीजल की कीमत पिछले साल की तुलना में करीब 70% बढ़ चुकी है और एक समय यह 6.50 डॉलर प्रति गैलन से ऊपर चली गई थी। मध्य पूर्व में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर होने वाली शिपिंग में व्यवधान ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ाया है। इस जलडमरूमध्य से सामान्यतः दुनिया के करीब पांचवें हिस्से के तेल और गैस शिपमेंट गुजरते हैं।
डीजल अमेरिकी मालवाहक ट्रकों, कृषि उपकरणों और मालगाड़ियों के लिए अहम ईंधन है। ईंधन बिल बढ़ने से वस्तुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने की लागत बढ़ती है और अंततः खाद्य पदार्थों, निर्माण परियोजनाओं तथा अन्य उत्पादों की कीमतों पर असर पड़ सकता है।
ब्रिटेन में खुदरा डीजल कीमतें भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत और घरेलू बजट पर ध्यान बढ़ा है। ब्रिटेन के चांसलर जॉन हीली ने कहा कि संभावित अमेरिकी निर्यात पाबंदियों को लेकर देश अमेरिका के साथ विचार-विमर्श कर रहा है और इस संभावना के लिए तैयारी कर रहा है। फ्रांस और महाद्वीपीय यूरोप के अन्य हिस्से भी महंगे ईंधन से जीवन-यापन की बढ़ती लागत का सामना कर रहे हैं।
अमेरिका में राहत, विदेशों में महंगी आपूर्ति का जोखिम
निर्यात प्रतिबंधों का समर्थन कर रहे रिपब्लिकन सांसद एश्ली हिंसन और डैन सुलिवन का कहना है कि विदेशों से आने वाली आपूर्ति में व्यवधान के दौरान अमेरिकी ऊर्जा को घरेलू बाजार में रोककर उपभोक्ताओं और कारोबारों को सुरक्षा दी जा सकती है। प्रस्ताव का उद्देश्य अमेरिका में अधिक डीजल उपलब्ध कराना और वाहन चालकों, मालवाहक कंपनियों तथा ईंधन-निर्भर अन्य उद्योगों पर दबाव कम करना है।
Argus Media के मुख्य अर्थशास्त्री डेविड फाइफ ने चेतावनी दी कि अमेरिकी निर्यात में कमी से अंतरराष्ट्रीय कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। यदि रोजाना 10 लाख बैरल से अधिक डीजल निर्यात बाजार से हटता है, तो लैटिन अमेरिका और यूरोप के आयातकों को वैकल्पिक आपूर्ति के लिए प्रतिस्पर्धा करनी पड़ेगी। इससे वैश्विक माल ढुलाई, खाद्य और औद्योगिक लागत बढ़ सकती है तथा महंगाई का दबाव और तेज हो सकता है। फाइफ ने यह भी कहा कि इस कदम से भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्तिकर्ता के रूप में अमेरिका की छवि को नुकसान पहुंच सकता है।
Argus Media की एनालिटिक्स मैनेजर सारा लाफ्ल्योर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ने पर मांग में अंततः कमी आ सकती है, लेकिन निकट अवधि में आपूर्ति का अंतर व्यापारिक संबंधों पर दबाव डालेगा और लागत का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था में तेजी से पहुंचेगा। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि निर्यात सीमाएं लागू होंगी या नहीं, उनका दायरा कितना होगा और घरेलू आपूर्ति बढ़ने से अंतिम उपभोक्ताओं के लिए कीमतों में कितनी कमी आएगी।