कई कंपनियां अब वरिष्ठ प्रबंधन की जरूरत पूरी करने के लिए पार्ट-टाइम अधिकारियों की नियुक्ति कर रही हैं। फ्रैक्शनल एग्जीक्यूटिव का यह मॉडल कारोबारों को वित्त, मार्केटिंग या संचालन का अनुभवी नेतृत्व तय समय के लिए उपलब्ध कराता है—बिना पूर्णकालिक पद और उससे जुड़ी स्थायी लागत के। फ्रीलांसर आम तौर पर किसी तय परियोजना पर काम करते हैं, जबकि फ्रैक्शनल अधिकारी कंपनी में लगातार प्रबंधन की जिम्मेदारी निभाते हैं और अक्सर एक से अधिक कंपनियों के साथ काम करते हैं।
फ्रैक्शनल अधिकारी और फ्रीलांसर में क्या अंतर है?
फ्रैक्शनल एग्जीक्यूटिव केवल ऐसा पूर्णकालिक अधिकारी नहीं होता जो छोटे-छोटे कामों में बंटा हो। वह सहमत साप्ताहिक या मासिक समय के भीतर CFO, CMO या किसी अन्य वरिष्ठ पद की जिम्मेदारी संभाल सकता है। एक से अधिक कंपनियों के साथ काम करने के बावजूद, उसकी भूमिका किसी एक काम के नतीजे तक सीमित नहीं रहती; इसमें कंपनी के कामकाज से लगातार जुड़ाव शामिल होता है।
इसके उलट, फ्रीलांसर का काम अक्सर स्पष्ट दायरे वाली परियोजना तक सीमित होता है—जैसे परामर्श, मार्केटिंग अभियान या वित्तीय विश्लेषण। फ्रैक्शनल अधिकारी कंपनी के भीतर प्रबंधन भूमिका के अधिक करीब होता है। वह योजनाएं बनाने, उनके अमल की निगरानी करने और संस्थापकों व टीमों के साथ नियमित रूप से काम करने में मदद कर सकता है। दोनों व्यवस्थाएं पारंपरिक पूर्णकालिक रोजगार से अलग हैं, लेकिन उनके काम का दायरा और स्वरूप भी एक-दूसरे से अलग है।
कम स्थायी लागत में वरिष्ठ अनुभव
यह व्यवस्था खास तौर पर विस्तार कर रही कंपनियों के लिए उपयोगी हो सकती है। किसी कारोबार को वित्त, मार्केटिंग या संचालन में अनुभवी नेतृत्व की जरूरत हो सकती है, लेकिन पूर्णकालिक अधिकारी का बजट न हो। यह भी संभव है कि काम की मात्रा स्थायी पद को उचित न ठहराती हो। फ्रैक्शनल नियुक्ति से कंपनी अपनी वास्तविक जरूरत के मुताबिक वरिष्ठ प्रतिभा ले सकती है और स्थायी वेतन तथा लंबे रोजगार-समझौते की लागत सीमित रख सकती है।
इसका लाभ केवल खर्च पर नियंत्रण तक सीमित नहीं है। विस्तार, पूंजी जुटाने की तैयारी या प्रबंधन प्रणालियां विकसित करने जैसे दौर में कंपनियों को वरिष्ठ अधिकारियों के अनुभव और निर्णय क्षमता की जल्दी जरूरत पड़ सकती है। ऐसे समय में नेतृत्व-स्तर की मदद जरूरी हो सकती है, भले ही उसके लिए पूरे समय की नियुक्ति उचित न हो। इस तरह फ्रैक्शनल भूमिका स्थायी कार्यकारी नियुक्ति और अस्थायी परियोजना-आधारित आउटसोर्सिंग के बीच की व्यवस्था है।
कई कंपनियों के बीच समय बांटते हैं अधिकारी
इस मॉडल को अपनाने वाले प्रबंधक अपना कामकाजी समय और आय एक नियोक्ता से जोड़ने के बजाय कई ग्राहकों के बीच बांट सकते हैं। लेकिन इस लचीलेपन के साथ उन्हें अलग-अलग कंपनियों के रिश्ते संभालने और विभिन्न टीमों, काम की गति तथा अपेक्षाओं के बीच तालमेल बिठाने की जरूरत होती है। इसलिए हर नियुक्ति की शुरुआत में काम का तरीका, जवाब देने का समय और जिम्मेदारी की सीमाएं स्पष्ट करना जरूरी है।
व्यवस्था तभी कारगर होती है जब कंपनी और अधिकारी, दोनों भूमिका और समय-प्रतिबद्धता को एक ही तरह समझें। कंपनी को तय करना चाहिए कि किन फैसलों की जिम्मेदारी फ्रैक्शनल अधिकारी के पास होगी और वह आंतरिक कर्मचारियों के साथ कैसे काम करेगा। अधिकारी को भी देखना होगा कि कई कंपनियों का संयुक्त कार्यभार संभालने योग्य है या नहीं। जिम्मेदारियां अस्पष्ट रहने पर तय किए गए सीमित घंटों और वरिष्ठ नेतृत्व पद की मांग के बीच अंतर पैदा हो सकता है।
लचीली नियुक्ति में भी जिम्मेदारियां स्पष्ट हों
फ्रैक्शनल एग्जीक्यूटिव की बढ़ती मांग कंपनियों के उस प्रयास को दिखाती है जिसमें वे स्थायी लागत नियंत्रित रखते हुए वरिष्ठ प्रबंधन की क्षमता हासिल करना चाहती हैं। पूर्णकालिक नियुक्ति के लिए अभी तैयार न हुए कारोबारों को इससे नेतृत्व की कमी पूरी करने का एक और विकल्प मिलता है, जबकि अनुभवी अधिकारी अपने करियर को अलग ढंग से व्यवस्थित कर सकते हैं। हालांकि, हर वरिष्ठ भूमिका को पार्ट-टाइम काम में बांटना संभव नहीं है। जिन पदों में लगातार कार्यालय में समन्वय, व्यापक आंतरिक जिम्मेदारी या अचानक पैदा हुई स्थितियों पर तेज प्रतिक्रिया की जरूरत हो, उनमें अधिक समय देना पड़ सकता है।
इस मॉडल पर विचार कर रही कंपनियों को अपने विकास के चरण, संबंधित काम के महत्व और वास्तविक कार्यभार का आकलन करना चाहिए। कई ग्राहकों के साथ काम करने वाले अधिकारियों के लिए भी समय, जवाबदेही और हितों के संभावित टकराव की सीमाएं साफ होनी चाहिए। फ्रैक्शनल एग्जीक्यूटिव और फ्रीलांसर के बीच मुख्य फर्क यह है कि पहला कारोबार में निरंतर नेतृत्व की जिम्मेदारी लेता है, जबकि दूसरा आम तौर पर किसी एक परियोजना का तय नतीजा देने के लिए नियुक्त होता है।