37signals ने अपने नियमित सॉफ्टवेयर विकास में हाथ से कोड लिखने की जगह AI टूल को प्राथमिकता दी है। Ruby on Rails के निर्माता और कंपनी के सह-संस्थापक डेविड हाइनमेयर हैन्सन ने Rails World में बताया कि इंजीनियर अब खुद कोड तभी लिखते हैं, जब AI टूल अपेक्षित नतीजा देने में विफल हों। यह बदलाव विकास की रफ्तार और मानवीय निगरानी के बीच संतुलन को लेकर सवाल खड़े करता है।
37signals में हाथ से कोड लिखना अब आखिरी विकल्प
Rails World के मुख्य भाषण में हैन्सन ने कहा, “हम अब कोड नहीं लिखते।” उन्होंने इस तरीके को “पेंसिल नीचे रख देना” बताया।
अगर AI एजेंट जरूरी काम नहीं कर पाता, तो 37signals के इंजीनियर खुद कोड लिख सकते हैं। लेकिन हैन्सन के मुताबिक, अगला कदम हाथ से कोड लिखने को नियमित प्रक्रिया बनाना नहीं, बल्कि “मशीन को ठीक करना” होना चाहिए।
उन्होंने इसे कंपनी की कार्यशैली में अचानक आए बदलाव के बजाय पहले से चल रहे परिवर्तन को स्वीकार करना बताया। उनके विचार में, सॉफ्टवेयर विकास के सामने अब मुख्य सवाल यह है कि AI के फायदों का बेहतर इस्तेमाल कैसे किया जाए; बाकी चिंताएं फिलहाल इसके मुकाबले कम प्राथमिकता रखती हैं।
AI कोडिंग टूल को लेकर डेवलपरों की राय बंटी
OpenAI Codex, Anthropic Claude Code और Cursor जैसे टूल ने पिछले एक साल में कुछ डेवलपरों के काम करने के तरीके को तेजी से बदला है। कुछ डेवलपर AI एजेंट के साथ काम को इतना रोमांचक बताते हैं कि वे देर रात तक काम करते रहते हैं। वहीं, कुछ का कहना है कि AI की मदद से कोडिंग करना उन्हें अलग-थलग या थका हुआ महसूस करा सकता है।
जनवरी 2026 में 150 से अधिक सॉफ्टवेयर इंजीनियरों पर किए गए एक सर्वे में 45% से ज्यादा ने कहा कि वे AI टूल के साथ तालमेल बनाए हुए हैं। अन्य 17.5% ने बताया कि वे AI कोड एडिटर का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करते। नतीजे बताते हैं कि कई डेवलपरों के काम में AI टूल आ चुके हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल सभी जगह एक जैसा नहीं है।
हैन्सन ने Rails World में मौजूद लोगों से यह भी पूछा कि उनमें से कौन हर हफ्ते अब भी काफी कोड हाथ से लिखता है। हाथ उठाने वालों की संख्या देखकर उन्होंने अनुमान लगाया कि शायद पांच लोग ऐसा करते हैं। यह जवाब 37signals के तरीके से मेल खाता है, लेकिन इससे पूरे सॉफ्टवेयर उद्योग में AI के इस्तेमाल का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।
सॉफ्टवेयर कंपनियों के लिए AI कोडिंग टूल का असर सिर्फ इस बात तक सीमित नहीं है कि इंजीनियर खुद कितना कोड टाइप करते हैं। ये टूल काम के बंटवारे और कोड के रखरखाव के तरीके को भी बदल सकते हैं। हैन्सन के मॉडल में AI की नाकामी पर इंसान दखल देते हैं और साथ ही टूल को बेहतर बनाने पर जोर रहता है। हालांकि डेवलपरों के अलग-अलग अनुभव बताते हैं कि यह तरीका हर टीम के लिए कारगर है या नहीं, इस पर अभी सहमति नहीं बनी है।