कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ रही है, फिर भी कीमतों में राहत नहीं आई है। 9 अक्टूबर की अपनी रिपोर्ट में JPMorgan ने कहा कि तेल बाजार की मुख्य बाधा अब कच्चे तेल की कमी नहीं, बल्कि समुद्री परिवहन क्षमता की कमी है। मध्य पूर्व से निर्यात में सुधार के बावजूद टैंकरों की सीमित उपलब्धता ने मालभाड़ा बढ़ा दिया है। इसका मतलब है कि अतिरिक्त आपूर्ति खरीदारों तक तुरंत कम लागत में नहीं पहुंच सकती।
होर्मुज से निर्यात बढ़ा, टैंकर क्षमता पर दबाव
होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल का शिपमेंट सितंबर में बढ़कर 1.2 करोड़ बैरल प्रतिदिन हो गया, जबकि जुलाई और अगस्त—दोनों महीनों में यह 75 लाख बैरल प्रतिदिन था। निर्यात में इस वृद्धि के बावजूद कीमतों पर दबाव कम नहीं हुआ।
JPMorgan की विश्लेषक नताशा कानेवा, ल्यूबा साविनोवा और आर्टेम फाखरेतदीनोव ने कहा कि अब मुख्य सवाल यह नहीं है कि भूमिगत भंडार या उत्पादन केंद्रों पर पर्याप्त तेल उपलब्ध है या नहीं, बल्कि यह है कि क्षेत्र से उस तेल को बाहर कैसे पहुंचाया जाए।
रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर तक दुनिया के 923 बहुत बड़े कच्चा तेल वाहक जहाजों यानी VLCC में से 766 परिचालन में थे। इसके अलावा, 124 ईरानी जहाज अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण मुख्यधारा के शिपिंग बाजारों तक बड़े पैमाने पर पहुंच नहीं बना पा रहे हैं। इससे उपलब्ध जहाजों की संख्या सीमित हुई है और बेड़े का इस्तेमाल दोबारा करने की गति घटी है। कुछ यात्राएं मार्ग बदलने के कारण लंबी हो गई हैं, जबकि जहाज से जहाज में तेल स्थानांतरण में 10 दिन तक लग सकते हैं।
ईरानी कच्चे तेल के परिवहन में लगे जहाजों को अलग रखने पर मध्य पूर्वी तेल की ढुलाई के लिए जरूरी VLCC की संख्या 2025 के औसत से 35 अधिक है। विश्लेषकों ने बाजार में बदली बाधा को इस तरह बताया: अप्रैल में चिंता कच्चे तेल की कमी को लेकर थी, जबकि अक्टूबर तक परिवहन लागत मुख्य अड़चन बन गई।
VLCC की दैनिक दर 11.62 लाख डॉलर से ऊपर
टैंकर क्षमता पर दबाव चार्टर दरों में भी दिखाई दे रहा है। 7 अक्टूबर को दक्षिण कोरिया जाने वाले एक VLCC का चार्टर 11.62 लाख डॉलर प्रतिदिन की दर पर तय हुआ।
इतना ऊंचा मालभाड़ा उत्पादन क्षेत्रों से रिफाइनरियों तक कच्चा तेल पहुंचाने की लागत बढ़ाता है। निर्यात बढ़ने के बावजूद खरीदारों को तेल की वास्तविक डिलीवरी लागत अधिक चुकानी पड़ सकती है। 9 अक्टूबर तक ब्रेंट कच्चा तेल करीब 102.77 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी कच्चा तेल लगभग 93.13 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
JPMorgan ने यह भी चेतावनी दी कि परिवहन लागत बढ़ने से रिफाइनरियों के मार्जिन पर दबाव पड़ रहा है। यूरोप में रिफाइनिंग मार्जिन नकारात्मक हो गया था और कुछ संयंत्र उत्पादन घटाने पर विचार कर सकते हैं।
रणनीतिक भंडार से तेल निकालने में परिवहन बाधा
इस महीने की शुरुआत में सात देशों के समूह G7 ने आपातकालीन भंडार से 10 करोड़ बैरल तेल जारी करने पर सहमति जताई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य अब पेट्रोल की कीमतों को प्रभावित नहीं कर रहा है।
JPMorgan का विश्लेषण आपूर्ति बढ़ाने के उपायों की एक व्यावहारिक सीमा पर ध्यान दिलाता है: यदि उपयुक्त जहाज उपलब्ध नहीं हैं, तो अतिरिक्त कच्चे तेल के गंतव्य तक पहुंचने की गति शिपिंग क्षमता और मालभाड़े पर निर्भर रहेगी।
इस कारण कच्चे तेल के बाजार का आकलन करते समय उत्पादन, निर्यात और भंडार के साथ टैंकरों की उपलब्धता तथा चार्टर दरें भी महत्वपूर्ण हो गई हैं। जब तक मालभाड़ा ऊंचा रहता है, तब तक अधिक तेल जारी करने से खरीदारों की वास्तविक खरीद लागत में तुरंत कमी नहीं आ सकती। रिफाइनरियों के लिए परिवहन खर्च उत्पादन संबंधी फैसलों को प्रभावित करता रह सकता है।