न्यूयॉर्क फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष जॉन विलियम्स ने कहा है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक इस साल ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी कर सकता है। हालांकि, मौजूदा आर्थिक स्थितियां और महंगाई के रुझान 2027 में अतिरिक्त दर वृद्धि को उचित नहीं ठहराते। उनका अनुमान है कि अगले साल महंगाई में उल्लेखनीय कमी आएगी और साल के दौरान यह फेड के 2% लक्ष्य के करीब पहुंच जाएगी। इस बीच, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बुनियादी ढांचे में निवेश मांग को मजबूत बनाए रख सकता है।
ऊर्जा, टैरिफ और AI से निकट अवधि की महंगाई पर दबाव
विलियम्स ने कहा कि उन्होंने हाल में महंगाई का अपना अनुमान तीन प्रमुख कारणों से बढ़ाया है—टैरिफ का असर, मध्य-पूर्व का संघर्ष और ऊर्जा कीमतें, तथा AI बुनियादी ढांचे में निवेश से पैदा हुई अतिरिक्त मांग।
आयातित वस्तुओं पर टैरिफ का असर मोटे तौर पर उसी दिशा में रहा है, जिसका अनुमान पहले के मॉडल और विश्लेषणों में लगाया गया था। इसका प्रभाव मुख्य रूप से आयातित उत्पादों तक सीमित रहा है और अभी तक अर्थव्यवस्था की अन्य कीमतों में बड़े पैमाने पर नहीं फैला है। विलियम्स के मुताबिक, टैरिफ का अधिकांश असर संभवतः पहले ही सामने आ चुका है, हालांकि पिछले 12 से 18 महीनों में इससे मुख्य महंगाई दर को उल्लेखनीय बढ़ावा मिला है।
निकट अवधि के महंगाई अनुमान में ऊर्जा कीमतों की भूमिका भी बढ़ गई है। तेल की कीमतें उछाल के बाद ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं और इसका असर ईंधन, हवाई यात्रा तथा खाद्य कीमतों के जरिए उपभोक्ताओं तक पहुंच रहा है। हवाई किराये इसका स्पष्ट उदाहरण हैं, लेकिन ऊर्जा कई वस्तुओं और सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण इनपुट है। इसलिए इसका असर केवल परिवहन क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता।
AI निवेश महंगाई दबाव का अपेक्षाकृत नया स्रोत है। डेटा सेंटरों के निर्माण और चिप्स की मांग में तेज वृद्धि ने कुछ AI-संबंधित वस्तुओं और इनपुट की लागत बढ़ाई है। सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ता उत्पाद भी इससे प्रभावित हुए हैं। विलियम्स ने निर्माण क्षेत्र की श्रम लागत में भी कुछ असर देखा है। इससे संकेत मिलता है कि AI से जुड़ी मांग का प्रभाव केवल वस्तुओं की कीमतों तक सीमित न रहकर निर्माण श्रम लागत तक पहुंच सकता है।
अंतर्निहित महंगाई के संकेत अब भी नरम
इन कारकों के कारण इस साल महंगाई पहले के अनुमान से अधिक रही है। फिर भी, विलियम्स ने कहा कि महंगाई की उम्मीदें स्थिर हैं, वेतन वृद्धि अपेक्षाकृत मध्यम है और प्रति इकाई श्रम लागत में वृद्धि मोटे तौर पर 2% या उससे कम महंगाई के अनुरूप है।
उन्होंने बताया कि न्यूयॉर्क फेड का बहु-चर ट्रेंड महंगाई मापक फिलहाल करीब 2.3% पर है। डलास फेड का ट्रिम्ड-मीन महंगाई मापक भी पिछले छह महीनों में लगभग इसी स्तर पर रहा है। विलियम्स के अनुसार, दोनों मापक पूर्ण नहीं हैं, लेकिन वे यह संकेत देते हैं कि ऊर्जा और AI से जुड़े दबावों के कारण अंतर्निहित महंगाई लगातार तेज नहीं हुई है। कुछ मापक अब भी नीचे जा रहे हैं।
विलियम्स को उम्मीद है कि अगले साल साल-दर-साल तुलना में टैरिफ का प्रभाव काफी हद तक हट जाएगा। ऊर्जा कीमतें भी महंगाई को लगातार ऊपर धकेलने के बजाय उसे कम करने में मदद कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि यदि मांग और आपूर्ति का संतुलन मोटे तौर पर बना रहता है, तो कुल महंगाई में कमी जारी रहनी चाहिए।
सितंबर की दर वृद्धि जोखिमों के नए आकलन का नतीजा
विलियम्स ने कहा कि उन्होंने सितंबर में फेडरल रिजर्व की ब्याज दर बढ़ाने की कार्रवाई का दृढ़ समर्थन किया था। उनके विचार में, उस समय उपलब्ध नए आंकड़ों ने इस कदम को अधिक उपयुक्त बनाया था। खासकर, ऊर्जा कीमतों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की संभावना और AI-आधारित मांग के आकार तथा टिकाऊपन को लेकर तस्वीर अधिक स्पष्ट हो गई थी।
इससे पहले बाजारों को उम्मीद थी कि तेल की कीमतें अपेक्षाकृत तेजी से नीचे आ जाएंगी और मध्य-पूर्व में तनाव कम होने की संभावना को काफी महत्व दिया गया था। हालांकि, ऊर्जा कीमतें ऊंची बनी रहीं। कच्चे तेल की कीमतों का पेट्रोल और डीजल पर असर भी अधिक स्पष्ट रहा। मध्य-पूर्व से जुड़ी रिफाइनिंग क्षमता में व्यवधान तथा रूस-यूक्रेन संघर्ष ने ईंधन लागत पर अतिरिक्त दबाव डाला।
विलियम्स ने कहा कि AI निवेश कुछ समय तक मांग को सहारा दे सकता है, जबकि आपूर्ति को उसके अनुरूप बढ़ने में समय लगेगा। ऐसे माहौल में मौद्रिक नीति में मापा हुआ समायोजन महंगाई को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है, बिना ऐसी अर्थव्यवस्था पर अस्थिर बोझ डाले जो अब भी मजबूत बनी हुई है।
उन्होंने सितंबर की दर वृद्धि को आर्थिक परिदृश्य में बुनियादी बदलाव के बजाय जोखिम प्रबंधन से जुड़ा निर्णय बताया। अधिकतम रोजगार के लक्ष्य पर नकारात्मक जोखिम घटे थे, जबकि अर्थव्यवस्था लचीली बनी रही और कुछ हद तक मजबूत भी हुई। दूसरी ओर, ऊर्जा कीमतों और AI मांग ने महंगाई के ऊपर की ओर जाने के जोखिम को थोड़ा बढ़ाया। इसलिए दर वृद्धि जोखिमों के संतुलन के नए आकलन को दर्शाती थी, न कि अर्थव्यवस्था की दिशा में व्यापक बदलाव को।
CPI में अंतर्निहित रुझानों पर रहेगी नजर
अमेरिका की अगली उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) रिपोर्ट फेड की अगली मौद्रिक नीति बैठक से पहले जारी होगी। विलियम्स ने कहा कि अधिकारी मौसमी पैटर्न और असामान्य कारकों की बारीकी से जांच करेंगे, लेकिन केवल एक महीने के आंकड़े के आधार पर नीति तय नहीं करेंगे।
उनका ध्यान सेवाओं, आवास और ऊर्जा तथा कुछ AI-संबंधित वस्तुओं को छोड़कर अन्य उत्पादों की कीमतों पर अधिक है। मुख्य सवाल यह है कि क्या अंतर्निहित महंगाई 2% लक्ष्य की ओर बढ़ती रहेगी। विलियम्स ने ऐसा कोई विशिष्ट कोर CPI स्तर नहीं बताया, जो उन्हें चिंतित करे। उन्होंने कहा कि कम आंकड़ा बेहतर होगा, लेकिन इससे अधिक महत्वपूर्ण यह है कि समायोजित महंगाई का रुझान सही दिशा में बना रहे।
विलियम्स ने यह भी जोर दिया कि मौद्रिक नीति का असर आम तौर पर अर्थव्यवस्था में पूरी तरह दिखने में एक से दो साल लेता है। इसलिए किसी एक महीने की रिपोर्ट से नीति की दिशा तय नहीं हो सकती। अधिकारियों को यह आकलन करना होगा कि मौजूदा जानकारी अगले एक साल में आर्थिक गतिविधि और महंगाई के बारे में क्या संकेत देती है।
AI मांग मजबूत, लेकिन अमेरिकी अर्थव्यवस्था इससे कहीं बड़ी
विलियम्स ने कहा कि ब्याज दरों में अपेक्षाकृत छोटे बदलावों से AI क्षेत्र में लंबे समय से चल रहे निवेश के रुझान में बड़ा बदलाव आने की संभावना कम है। निवेशकों को व्यापक रूप से उम्मीद है कि AI उत्पादकता बढ़ाएगा और अर्थव्यवस्था को बदल देगा। इस वजह से यह क्षेत्र आवास, गैर-AI कारोबारी निवेश और उधारी पर निर्भर अन्य गतिविधियों की तुलना में ब्याज दरों के प्रति कम संवेदनशील हो सकता है।
हालांकि, अमेरिकी अर्थव्यवस्था का आकार 30 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है और AI इसका केवल एक हिस्सा है। ब्याज दरें और वित्तीय परिस्थितियां आवास, अन्य कारोबारी निवेश, लंबी अवधि की बॉन्ड यील्ड और डॉलर के जरिए व्यापक आर्थिक गतिविधि को प्रभावित करती रहती हैं। मौजूदा स्थिति इसलिए असामान्य है क्योंकि अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा तेजी से विस्तार कर रहा है, जबकि अन्य क्षेत्र सख्त वित्तीय परिस्थितियों के प्रति संवेदनशील बने हुए हैं।
निकट अवधि में चिप्स की कीमतें घटने के बजाय बढ़ती रह सकती हैं। इसलिए विलियम्स किसी एक उत्पाद की कीमत पर ध्यान केंद्रित नहीं कर रहे हैं। उनके लिए मुख्य सवाल यह है कि क्या AI से जुड़ी लागत श्रम, आयातित वस्तुओं और अन्य इनपुट की लागत में मौजूद दबावों के साथ मिलकर बढ़ने लगेगी।
अमेरिका की बेरोजगारी दर फिलहाल 4% से कुछ ऊपर है और अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई है। विलियम्स के अनुसार, श्रम बाजार में कुछ अतिरिक्त क्षमता है, लेकिन वह असंतुलित नहीं है। वेतन और प्रति घंटा आय जैसे संकेतक भी व्यापक लागत दबाव की ओर इशारा नहीं करते। उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर उन्होंने कहा कि ऊर्जा कीमतों और AI-प्रेरित मांग के अलावा कारोबारी लागत को व्यापक रूप से बढ़ाने वाला कोई दबाव अभी दिखाई नहीं दे रहा है।