टोकनाइज्ड परिसंपत्तियों का बाजार करीब 65 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने चेताया है कि ब्लॉकचेन प्लेटफॉर्म और पारंपरिक वित्तीय बाजारों के बीच बढ़ते जुड़ाव से जोखिम एक क्षेत्र से दूसरे तक फैल सकते हैं। टोकनाइजेशन से कारोबार और निपटान तेज हो सकता है, लेकिन बैंकों, कस्टोडियन और अन्य बाजार ढांचे पर बढ़ती निर्भरता तरलता, परिसंपत्तियों की सुरक्षित अभिरक्षा और परिचालन क्षमता को भी अहम बनाती है।
65 अरब डॉलर का बाजार, पारंपरिक वित्त से बढ़ता जुड़ाव
टोकनाइजेशन में वास्तविक परिसंपत्तियों या वित्तीय दावों को ब्लॉकचेन पर डिजिटल टोकन के रूप में दर्ज किया जाता है। इनमें बॉन्ड और फंड यूनिट जैसे पारंपरिक वित्तीय उत्पाद शामिल हो सकते हैं। बाजार का विस्तार दिखाता है कि वित्तीय संस्थानों और अन्य प्रतिभागियों की परिसंपत्तियां ब्लॉकचेन पर जारी करने, हस्तांतरित करने और निपटाने में रुचि बढ़ी है। हालांकि, बाजार का आकार अपने आप यह नहीं बताता कि तनाव के दौर में इन उत्पादों का कारोबार सुचारु रहेगा या निवेशक उन्हें भुना सकेंगे।
IMF की मुख्य चिंता यह है कि टोकनाइज्ड बाजार व्यापक वित्तीय प्रणाली पर किस हद तक निर्भर हैं। ब्लॉकचेन आधारित उत्पाद अगर बैंकों, कस्टोडियन, ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म या पारंपरिक बाजारों से जुड़े हों, तो किसी एक हिस्से में आई बाधा का असर एक प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रह सकता। जोखिम कितना फैलेगा, यह उत्पाद की संरचना, प्रतिभागियों के बीच हुए इंतजाम और उपलब्ध बाजार तरलता पर निर्भर करेगा।
तेज निपटान के लिए भी मजबूत ढांचे और तरलता की जरूरत
ब्लॉकचेन नेटवर्क चौबीसों घंटे कारोबार और तेज निपटान की सुविधा दे सकते हैं, लेकिन ये सेवाएं तकनीकी प्लेटफॉर्म, नेटवर्क की उपलब्धता और परिसंपत्तियों की अभिरक्षा पर टिकी हैं। सिस्टम बंद होने, नेटवर्क पर भीड़ बढ़ने या किसी अहम सेवा के विफल होने से सौदों का निष्पादन अथवा परिसंपत्तियों का हस्तांतरण बाधित हो सकता है। अलग-अलग प्लेटफॉर्म के नियमों और तकनीकी मानकों में अंतर भी परिचालन जटिलता बढ़ा सकता है।
तरलता भी चिंता का विषय है। सामान्य बाजार स्थितियों में किसी टोकनाइज्ड परिसंपत्ति का कारोबार होना इस बात की गारंटी नहीं कि दबाव के समय पर्याप्त खरीदार मिलेंगे या धारक अपनी अपेक्षित कीमत पर बाहर निकल पाएंगे। अंतर्निहित परिसंपत्ति और उसके टोकन के बाजारों के कारोबार के घंटे, निपटान प्रक्रिया या रिडेम्पशन व्यवस्था अलग-अलग होने पर तनाव के दौर में कीमतों और तरलता में अंतर पैदा हो सकता है।
जोखिम नियंत्रण और नियमन के सामने बढ़ती जिम्मेदारी
संस्थानों और कारोबारियों के लिए सवाल केवल जारी किए गए टोकन की संख्या तक सीमित नहीं हैं। यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि अंतर्निहित परिसंपत्तियां कहां और कैसे रखी गई हैं, स्वामित्व कैसे दर्ज होता है, रिडेम्पशन की जिम्मेदारी किसकी है और तकनीकी या कारोबारी विवाद होने पर कौन से नियम लागू होंगे। कई प्लेटफॉर्म और अधिकार-क्षेत्रों में कामकाज से जिम्मेदारियों का बंटवारा और नियामकीय समन्वय और जटिल हो सकता है।
IMF की चेतावनी का मतलब यह नहीं है कि टोकनाइज्ड बाजार में संकट आना तय है। इसका संकेत यह है कि बाजार के विस्तार के साथ जोखिम प्रबंधन और नियामकीय व्यवस्थाओं को भी विकसित होना होगा। करीब 65 अरब डॉलर के आकार तक पहुंच चुके बाजार में, ऑन-चेन परिसंपत्तियों और पारंपरिक वित्त के गहरे होते संबंधों के बीच तरलता, परिचालन और परस्पर जुड़े जोखिमों की पहचान और प्रबंधन यह तय करने में अहम होंगे कि तनाव के समय बाजार कैसे काम करते हैं।