फेडरल रिजर्व के गवर्नर माइकल बार ने कहा है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) लंबे समय में अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकती है, लेकिन बड़े पैमाने पर इसका इस्तेमाल निकट अवधि में श्रम बाजार में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। उन्होंने नीति-निर्माताओं और आम जनता से रोजगार के नए अवसर, कौशल प्रशिक्षण और नई भूमिकाओं में जाने के रास्ते पहले से तैयार करने का आग्रह किया।
बार ने इस महीने की शुरुआत में फेड की ब्याज दर बढ़ाने के फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति को केंद्रीय बैंक के 2% लक्ष्य तक वापस लाने के लिए मौद्रिक नीति को आगे भी सख्त किया जा सकता है।
बार ने प्रशिक्षण और नए रोजगार में शुरुआती निवेश पर जोर दिया
मंगलवार दोपहर डेट्रॉयट इकोनॉमिक क्लब में बोलते हुए बार ने कहा कि एआई किस हद तक मानव श्रम का स्थान लेगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। हालांकि, उनका कहना था कि संभावित बदलाव व्यापक होने से पहले ही नीति-निर्माताओं और समाज को उनकी तैयारी शुरू कर देनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि रोजगार पर एआई का अंतिम असर इस बात पर भी निर्भर करेगा कि अर्थव्यवस्था नए रोजगार पैदा करने, कर्मचारियों को दोबारा प्रशिक्षित करने और उन्हें अलग-अलग भूमिकाओं में जाने में कितनी मदद करती है। ऐसे कदम लंबे समय में होने वाले व्यवधान को सीमित कर सकते हैं।
बार के अनुसार, एआई का इस्तेमाल अभी शुरुआती चरण में है, इसलिए इन मुद्दों पर अभी काम शुरू करना जरूरी है। समय रहते तैयारी करने से श्रम बाजार के समायोजन की लागत घट सकती है और तकनीक से मिलने वाले दीर्घकालीन लाभों को बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
अमेरिकी श्रम बाजार फिलहाल व्यापक रूप से मजबूत बना हुआ है। इस साल पेरोल रोजगार में हर महीने औसतन करीब 80,000 की वृद्धि हुई है। बार ने इस गति को रोजगार में संतुलन बनाए रखने के अनुरूप बताया। बेरोजगारी दर करीब 4.1% पर बनी हुई है।
फिर भी, युवा कर्मचारियों में बेरोजगारी अधिक है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या एआई आधारित उद्योग तकनीक का इस्तेमाल कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ाने के बजाय कुछ शुरुआती स्तर की नौकरियों को खत्म करने के लिए कर रहे हैं।
अलग-अलग पेशों पर एआई का असर असमान हो सकता है
बार ने कहा कि स्पष्ट प्रक्रियाओं और अनुमानित नतीजों वाले कामों में मानव श्रम के स्थान पर तकनीक के इस्तेमाल का जोखिम अधिक हो सकता है। इसके विपरीत, जिन नौकरियों में मानवीय निर्णय, प्रबंधन, समन्वय, पारस्परिक कौशल या रचनात्मकता की जरूरत होती है, वहां एआई कर्मचारियों के काम में सहायता या उसका विस्तार करने की अधिक संभावना है। ऐसे काम भी अपेक्षाकृत सुरक्षित हो सकते हैं जिनके नतीजों को मापना कठिन होता है।
एआई को अपनाने की गति भी श्रम बाजार के समायोजन की कठिनाई तय करेगी। तेज बदलाव से कर्मचारियों को नई भूमिकाओं में जाने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल सकता और नियोक्ताओं तथा कर्मचारियों के बीच कौशल का असंतुलन बढ़ सकता है। धीमी गति से अपनाने पर कंपनियों और कर्मचारियों को अनुकूलन के लिए अधिक समय मिलेगा।
बार ने कहा कि मौद्रिक नीति के लिए सबसे कठिन सवाल एआई के मध्यम अवधि के प्रभावों से जुड़ा है, खासकर अगले दो से पांच वर्षों में इसके असर को लेकर।
डेटा सेंटर निवेश से मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ा
बार के अनुसार, उन्नत तकनीकी उपकरणों के लिए बढ़ती प्रतिस्पर्धा और डेटा सेंटरों में निवेश में तेजी मांग से जुड़ा मुद्रास्फीति दबाव पैदा कर रही है। दूसरी ओर, तेल आपूर्ति पर सीमाएं और ऊंची व्यापार बाधाएं कुल आपूर्ति को सीमित कर रही हैं। इससे मुद्रास्फीति का परिदृश्य और जटिल हो गया है।
मुद्रास्फीति के आंकड़े पांच साल से अधिक समय से फेड के 2% लक्ष्य से ऊपर बने हुए हैं। इसी वजह से बार ने इस महीने की शुरुआत में फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की दर वृद्धि का समर्थन किया। उन्होंने दोहराया कि मुद्रास्फीति को समयबद्ध तरीके से लक्ष्य तक लाने के लिए आगे भी नीतिगत बदलाव जरूरी हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि फेड टिकाऊ आर्थिक वृद्धि और अधिकतम रोजगार को समर्थन देना चाहता है, लेकिन इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए मूल्य स्थिरता एक महत्वपूर्ण शर्त है।
अर्थशास्त्रियों और बाजार प्रतिभागियों में इस बात पर मतभेद है कि एआई से संभावित उत्पादकता लाभों को आर्थिक पूर्वानुमानों में किस तरह शामिल किया जाना चाहिए। एआई को लेकर आशावादी कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अधिक उत्पादकता मुद्रास्फीति घटा सकती है और कम ब्याज दरों का रास्ता खोल सकती है।
हालांकि, बार ने कहा कि तेज आर्थिक वृद्धि से निवेशकों द्वारा अपेक्षित रिटर्न बढ़ सकता है। साथ ही, यदि परिवारों को जीवनभर की आय अधिक होने की उम्मीद हो, तो वे कम बचत कर सकते हैं। इन बदलावों से संतुलनकारी ब्याज दर बढ़ सकती है और फेडरल फंड्स दर का स्तर भी ऊंचा रह सकता है।
बार ने कहा कि दोनों संभावनाएं मौजूद हैं, लेकिन यह अभी स्पष्ट नहीं है कि इनमें से किसी तरह का बदलाव अर्थव्यवस्था में पहले ही शुरू हो चुका है या नहीं। उन्होंने जोर दिया कि तत्काल तथ्य यह है कि मुद्रास्फीति अब भी ऊंची है, इसलिए मौजूदा आर्थिक परिस्थितियां मौद्रिक नीति के फैसलों का केंद्र बनी हुई हैं।
वित्तीय धोखाधड़ी से निपटने के लिए समन्वय की जरूरत
भाषण के बाद सवाल-जवाब सत्र में बार ने पारंपरिक धोखाधड़ी के साथ-साथ क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े घोटालों पर भी चर्चा की। उन्होंने ऐसे अनुमानों का उल्लेख किया जिनके अनुसार हर साल करीब 600 मिलियन से 700 मिलियन डॉलर की धोखाधड़ी में क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल होता है। बार ने कहा कि इस गतिविधि को कम करने के लिए सरकारी एजेंसियों और वित्तीय उद्योग के बीच समन्वित कार्रवाई जरूरी होगी।
उनके अनुसार, नियामक बैंकों पर धोखाधड़ी-रोधी नियंत्रण, साइबर सुरक्षा और तीसरे पक्ष से जुड़े जोखिम प्रबंधन को मजबूत करने का दबाव डाल सकते हैं। बैंकों को ग्राहकों, बैंक काउंटर कर्मचारियों और अन्य कर्मचारियों को आम घोटालों की पहचान करने में भी मदद करनी चाहिए। कानून प्रवर्तन एजेंसियों को धोखाधड़ी को प्राथमिकता देनी होगी।
बार ने कहा कि व्यक्तिगत नुकसान छोटे दिखाई दे सकते हैं, लेकिन इनका संयुक्त सामाजिक खर्च वित्तीय प्रणाली को नुकसान पहुंचा सकता है।
फेड की स्वतंत्रता के लिए जनता की समझ जरूरी
बार ने फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता पर भी बात की। उन्होंने कहा कि नियुक्तियों से जुड़े राजनीतिक दबाव से फेड अधिकारियों की रक्षा की जानी चाहिए, ताकि वे प्रतिशोध के डर के बिना कठिन नीतिगत फैसले ले सकें। इस स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए कांग्रेस का समर्थन और फेड की भूमिका को लेकर जनता की समझ, दोनों जरूरी हैं।
बार के अनुसार, जनता जितना बेहतर समझेगी कि स्वतंत्र फेडरल रिजर्व किस तरह समाज की सेवा करता है, उतनी ही टिकाऊ उसकी स्वतंत्रता होगी।