फेडरल रिजर्व के गवर्नर माइकल बर्र ने 29 सितंबर को फिर कहा कि महंगाई का दबाव कम नहीं हुआ तो अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरें और बढ़ा सकता है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था उम्मीद से अधिक मजबूत बनी हुई है, इसलिए नीति-निर्माताओं का जोर फिलहाल विकास को सहारा देने के लिए दरें घटाने के बजाय महंगाई पर काबू पाने पर है।
बर्र की टिप्पणी से साफ है कि फेड का अगला कदम आर्थिक गतिविधियों और महंगाई के आंकड़ों पर निर्भर करेगा। यदि निवेशक इस संभावना को फिर से आंकते हैं कि अमेरिकी दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं, तो बॉन्ड, शेयर और विदेशी मुद्रा बाजारों में कीमतों का आकलन बदल सकता है। कर्ज की लागत भी ऊंची बनी रह सकती है। बर्र ने न तो अगली दर बढ़ोतरी का समय बताया, न ही उसका आकार; आगे के फैसले आने वाले आंकड़ों और महंगाई के रुझान पर निर्भर रहेंगे।
बर्र ने महंगाई को नीति का केंद्र बताया
मंगलवार को बर्र की टिप्पणी पिछले सप्ताह दिए गए उनके संकेत को आगे बढ़ाती है। तब उन्होंने कहा था कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती के कारण महंगाई पर काबू पाना प्राथमिकता बना रहना चाहिए। उनकी ताजा बातों से संकेत मिलता है कि जब तक आर्थिक वृद्धि में उल्लेखनीय सुस्ती नहीं आती, फेड अधिकारी यह परखते रहेंगे कि महंगाई को स्वीकार्य स्तर तक लाने के लिए ब्याज दरें पर्याप्त ऊंची हैं या नहीं।
बर्र का कहना कि “दरें और बढ़ानी पड़ सकती हैं” यह नहीं बताता कि फेड ने अगली बैठक में कार्रवाई का फैसला कर लिया है। यह नीति पर उनका आकलन है, कोई तय दर-पथ की घोषणा नहीं। बाजार आगे के आर्थिक आंकड़ों के साथ यह भी देखेंगे कि क्या फेड के अन्य अधिकारी इसी रुख का समर्थन करते हैं।
मजबूत अर्थव्यवस्था से दरों पर फैसला कठिन
अर्थव्यवस्था की लगातार मजबूती फेड के सामने महंगाई घटाने और जरूरत से ज्यादा सख्ती से बचने के बीच संतुलन की चुनौती रखती है। मांग और आर्थिक गतिविधियां मजबूत रहीं तो महंगाई केंद्रीय बैंक के लक्ष्य के अनुरूप धीमी होने में अधिक समय ले सकती है और ऊंची दरें लंबे समय तक बनी रह सकती हैं। इसके उलट, आगे के आंकड़ों में अर्थव्यवस्था के स्पष्ट रूप से ठंडा पड़ने के संकेत मिले तो अतिरिक्त दर बढ़ोतरी की जरूरत पर फिर सवाल उठ सकते हैं।
बर्र ने दरों का कोई नया अनुमान नहीं दिया और न ही भविष्य के नीतिगत बदलावों के लिए खास शर्तें बताईं। निवेशकों के लिए अहम सवाल हैं कि क्या आर्थिक वृद्धि मौजूदा मजबूती बनाए रखेगी और क्या महंगाई में लगातार इतनी नरमी आएगी कि फेड अपना आकलन बदले। जब तक ये संकेत स्पष्ट नहीं होते, उनकी ताजा टिप्पणी यही बताती है कि फेड विकास को सहारा देने के लिए दरें घटाने से पहले महंगाई को प्राथमिकता दे रहा है।