अमेरिकी सीनेट ने गुरुवार को ईरान के साथ जारी युद्ध खत्म करने वाले प्रस्ताव को 49-50 मतों से खारिज कर दिया। चार रिपब्लिकन सीनेटरों को छोड़कर सभी रिपब्लिकनों ने प्रस्ताव का विरोध किया, जबकि पेंसिल्वेनिया के डेमोक्रेट सीनेटर जॉन फेटरमैन इसके खिलाफ मतदान करने वाले एकमात्र डेमोक्रेट रहे।
मतदान विफल रहने से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई बदलने के लिए कांग्रेस की कोई नई तत्काल बाध्यता नहीं आई। हालांकि, युद्ध का असर ऊर्जा कीमतों पर बढ़ रहा है, जिससे अमेरिकी उपभोक्ताओं, किसानों और ट्रकिंग कंपनियों की लागत बढ़ रही है। यह मुद्दा मध्यावधि चुनावों की तैयारी कर रहे रिपब्लिकन सांसदों के लिए भी आर्थिक दबाव बनता जा रहा है।
सीनेट में प्रस्ताव जरूरी समर्थन से चूका
यह प्रस्ताव वॉर पावर्स रिजॉल्यूशन के तहत लाया गया संयुक्त प्रस्ताव था। अगर सीनेट इसे मंजूर कर देती, तो राष्ट्रपति को ईरान में या उसके खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई से अमेरिकी बलों को हटाना पड़ता, जब तक कि कांग्रेस आगे की सैन्य कार्रवाई को स्पष्ट रूप से अधिकृत न करती। प्रतिनिधि सभा जुलाई में इस प्रस्ताव को पहले ही पारित कर चुकी थी और सीनेट में इसे पारित कराने के लिए 50 मतों की जरूरत थी।
प्रस्ताव के समर्थन में मतदान करने वाले रिपब्लिकन सीनेटरों में नॉर्थ कैरोलाइना के टॉम टिलिस, मेन की सुसान कॉलिन्स, अलास्का की लिसा मुर्कोव्स्की और केंटकी के रैंड पॉल शामिल थे। डेमोक्रेट-नेतृत्व वाली इस पहल का उद्देश्य युद्ध संबंधी फैसलों में कांग्रेस की भूमिका को मजबूत करना था, लेकिन 49-50 के नतीजे से मौजूदा नीति में बदलाव नहीं हुआ।
सामान्य बाध्यकारी कानून के विपरीत, इस संयुक्त प्रस्ताव को मंजूरी मिलने पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए नहीं भेजा जाता। इसलिए पारित होने की स्थिति में भी इसका तत्काल कानूनी प्रभाव सीमित रहता। मतदान मुख्य रूप से सैन्य अभियान के प्रति कांग्रेस के विरोध और इस चिंता का संकेत था कि कार्यपालिका ने कांग्रेस की अनुमति के बिना कार्रवाई की है।
डेमोक्रेट्स का आरोप, ट्रंप ने कांग्रेस को दरकिनार किया
वर्जीनिया के सीनेटर टिम केन, जो इस मुद्दे पर बार-बार मतदान कराने की मांग करते रहे हैं, ने कहा कि संविधान युद्ध की घोषणा का अधिकार कांग्रेस को देता है। उनके अनुसार, राष्ट्रपति की मौजूदा कार्रवाई संविधान, वॉर पावर्स एक्ट और कांग्रेस के पहले के प्रस्तावों का उल्लंघन करती है।
केन ने कहा कि कांग्रेस को इसी मुद्दे पर बार-बार मतदान नहीं करना चाहिए, क्योंकि राष्ट्रपति को पहले से मौजूद कानून का पालन करना चाहिए। लेकिन युद्ध कई महीनों से जारी रहने के कारण प्रस्ताव के समर्थक कांग्रेस में अपना समर्थन बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं और संघर्ष के प्रति जनता के विरोध का भी जवाब दे रहे हैं।
युद्ध शुरू होने के बाद से सीनेट में ऐसे कई प्रस्तावों पर मतदान हो चुका है, जिनमें एक प्रस्ताव पहले पारित भी हुआ था। हाल के हफ्तों में कुछ रिपब्लिकन सांसदों का समर्थन बढ़ा है। इसकी एक वजह यह है कि प्रशासन ने कांग्रेस द्वारा मांगी गई औपचारिक सैन्य मंजूरी नहीं ली है और संबंधित समयसीमा को कई बार टाला है।
पेट्रोल की औसत कीमत 4.48 डॉलर प्रति गैलन
युद्ध के दौरान अमेरिका में ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी जारी है। एएए के आंकड़ों के अनुसार, पेट्रोल की राष्ट्रीय औसत कीमत अब 4.48 डॉलर प्रति गैलन पहुंच गई है। डीजल की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं, जिससे किसानों और ट्रकिंग कंपनियों की परिचालन लागत पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।
ऊर्जा लागत बढ़ने से मिडवेस्ट का प्रतिनिधित्व करने वाले रिपब्लिकन सांसदों पर दबाव बढ़ रहा है। इनमें से कुछ ने व्हाइट हाउस से दूरी बनानी शुरू कर दी है और सार्वजनिक रूप से युद्ध खत्म करने की मांग की है। परिवारों के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतें सीधे आवागमन, कृषि उत्पादन और माल ढुलाई की लागत में जुड़ती हैं। बाजारों के लिए संघर्ष की अवधि और ऊर्जा आपूर्ति में बदलाव महंगाई की अपेक्षाओं को प्रभावित करने वाले अहम कारक बने हुए हैं।
मध्यावधि चुनाव अभियान में ऊर्जा लागत का दबाव
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में छह सप्ताह से भी कम समय बचा है। ऐसे में कांग्रेस के सदस्य अक्टूबर का बड़ा हिस्सा अपने राज्यों में चुनाव प्रचार में बिताने की तैयारी कर रहे हैं। रिपब्लिकन सांसदों को यह बताना होगा कि प्रशासन पेट्रोल और रोजमर्रा की दूसरी लागतें घटाने के लिए क्या कदम उठाने की योजना बना रहा है। उन्हें युद्ध का सरकारी वित्त और परिवारों के बजट पर असर भी समझाना होगा।
नॉर्थ डकोटा के रिपब्लिकन सीनेटर केविन क्रेमर ने कहा कि आर्थिक दबाव झेल रहे मतदाताओं से बात करते समय रिपब्लिकनों के पास नीतिगत उपलब्धियों की लंबी सूची हो सकती है, लेकिन मतदाता इस बात पर अधिक ध्यान दे रहे हैं कि सरकार ने हाल में उनकी जिंदगी में क्या बदला है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनावी संदेश में दलगत टकराव बना रहेगा।
प्रस्ताव खारिज होने से ईरान के प्रति अमेरिकी सैन्य नीति में तत्काल बदलाव नहीं आया। लेकिन पेट्रोल की राष्ट्रीय औसत कीमत 4.48 डॉलर प्रति गैलन पर रहने और डीजल की बढ़ती लागत से कृषि तथा ट्रकिंग क्षेत्र पर दबाव जारी रहने के कारण युद्ध का ऊर्जा बोझ कांग्रेस के मतदान और मध्यावधि चुनाव की बहस में बना हुआ है।