यूरोपीय केंद्रीय बैंक (ईसीबी) की अध्यक्ष क्रिस्टीन लागार्ड डिजिटल यूरो को आगे बढ़ाने के पक्ष में हैं। उनका तर्क है कि यह परियोजना यूरोपीय संघ की वित्तीय स्वायत्तता बनाए रखने में मदद कर सकती है। डिजिटल यूरो लागू हुआ तो यह केंद्रीय बैंक द्वारा जारी डिजिटल मुद्रा होगी और यूरो क्षेत्र में रोज़मर्रा के भुगतान का ढांचा बदल सकती है। हालांकि, परियोजना अभी विकास के चरण में है और इसके कई व्यावहारिक पहलू तय होने बाकी हैं।
यूरोप की भुगतान व्यवस्था में सार्वजनिक विकल्प
डिजिटल यूरो पर बहस केवल भुगतान का एक नया तरीका जोड़ने तक सीमित नहीं है। इलेक्ट्रॉनिक भुगतान का इस्तेमाल बढ़ने के साथ यूरोपीय संघ यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उपभोक्ताओं और कारोबारों के पास सार्वजनिक संस्थानों के समर्थन वाला भुगतान विकल्प भी हो।
भुगतान माध्यमों पर नियंत्रण, उनकी उपलब्धता और उन्हें सहारा देने वाले बुनियादी ढांचे की मजबूती अब नीति-निर्माताओं की प्राथमिकताओं में शामिल हैं। लागार्ड ने डिजिटल यूरो की दिशा में प्रगति को यूरोप की वित्तीय स्वायत्तता से जोड़ा है। ईसीबी के लिए यह परियोजना यूरो क्षेत्र को सार्वजनिक डिजिटल भुगतान का साधन दे सकती है और बाहरी भुगतान सेवाओं पर निर्भरता के बीच क्षेत्र के विकल्प बनाए रख सकती है।
लागार्ड का समर्थन यह नहीं बताता कि डिजिटल यूरो चलन में आ चुका है। न ही इससे यह संकेत मिलता है कि वह नकदी या वाणिज्यिक बैंकों की मौजूदा भुगतान सेवाओं की जगह लेगा।
जारी करने और रोज़मर्रा के इस्तेमाल की व्यवस्था बाकी
डिजिटल यूरो का व्यावहारिक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि उसे जारी करने, वितरित करने और रोज़मर्रा के लेन-देन में इस्तेमाल करने की व्यवस्था कैसी बनती है। केंद्रीय बैंक की डिजिटल मुद्रा के लिए यह स्पष्ट करना होगा कि आम लोग उसे कैसे रखेंगे और खर्च करेंगे, वित्तीय संस्थानों की क्या भूमिका होगी, और डिजिटल केंद्रीय बैंक धन मौजूदा बैंक खातों तथा भुगतान नेटवर्क से कैसे जुड़ेगा।
अभी उपलब्ध जानकारी में इन व्यवस्थाओं का ब्यौरा या परियोजना की अंतिम समयसीमा नहीं दी गई है। बैंकों और भुगतान कंपनियों के लिए इसका स्वरूप अहम होगा: इससे तय होगा कि वाणिज्यिक ऋणदाता खुदरा भुगतान में किस तरह भाग लेते रहेंगे और उपभोक्ताओं को कोई नया भुगतान माध्यम मिलेगा या नहीं।
उपयोगकर्ता इसे अपनाने से पहले इस्तेमाल की सरलता, निजता की सुरक्षा और भुगतान सेवाओं की निरंतरता पर ध्यान दे सकते हैं। परियोजना आगे बढ़ने के साथ इन सवालों के जवाब स्पष्ट होने हैं। वित्तीय स्वायत्तता का नीतिगत लक्ष्य अपने आप यह तय नहीं करता कि अंतिम उत्पाद कैसा होगा।
डिजिटल यूरो क्रिप्टो परिसंपत्तियों से अलग
डिजिटल यूरो केंद्रीय बैंक की डिजिटल मुद्रा होगी, इसलिए यह बिटकॉइन जैसी निजी क्रिप्टो परिसंपत्तियों से अलग श्रेणी में आती है। इसका मूल्य और जारी करने की व्यवस्था सार्वजनिक मौद्रिक प्रणाली के तहत तय होगी। नीति का जोर क्रिप्टो परिसंपत्तियों के दामों के बजाय भुगतान ढांचे और यूरो क्षेत्र की वित्तीय व्यवस्था पर है।
लागार्ड का समर्थन दिखाता है कि ईसीबी डिजिटल यूरो को नीतिगत एजेंडे पर बनाए रखना चाहता है। यह भुगतान साधन व्यापक रूप से अपनाया जाएगा या नहीं, इसका फैसला आगे होने वाली संस्थागत और तकनीकी रूपरेखा पर निर्भर करेगा। फिलहाल, यूरोपीय संघ डिजिटल भुगतान क्षमता को वित्तीय स्वायत्तता से जोड़ रहा है, जबकि परियोजना का अंतिम स्वरूप और समयसीमा अनिश्चित हैं।