चीन अपने स्वर्ण भंडार में रिकॉर्ड गति से इजाफा कर रहा है। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (PBOC) ने सितंबर में करीब 23 टन सोना खरीदा, जो लगभग तीन वर्षों में उसकी सबसे बड़ी मासिक खरीद है। इसके साथ केंद्रीय बैंक की खरीद लगातार 23वें महीने जारी रही।
अलग से, चीन ने 2026 के पहले आठ महीनों में 1,000 टन से अधिक सोना आयात किया, जिसकी कीमत 158.8 अरब डॉलर रही। यह मात्रा और मूल्य, दोनों ही 2025 के पूरे साल के 886 टन और 96.5 अरब डॉलर के आंकड़ों से अधिक हैं।
मांग केवल केंद्रीय बैंक तक सीमित नहीं है। घरेलू परिवार और कंपनियां भी सोने की खरीद बढ़ा रही हैं। कमजोर रियल एस्टेट बाजार, दबाव में चल रहे शेयर बाजार और गिरती जमा व बॉन्ड यील्ड के बीच सोना परिसंपत्तियों में विविधता लाने के विकल्प के रूप में फिर आकर्षक हुआ है। चीन की लगातार खरीद वैश्विक सोने की कीमतों को संरचनात्मक सहारा दे रही है, हालांकि आगे की मांग युआन, घरेलू परिसंपत्ति बाजारों और वैश्विक ब्याज दरों पर निर्भर करेगी।
PBOC की सोना खरीद लगातार 23वें महीने जारी
PBOC ने सितंबर में करीब 23 टन सोना अपने भंडार में जोड़ा। यह लगभग तीन वर्षों में उसकी सबसे बड़ी मासिक खरीद थी और 2015 के बाद से चल रहे उसके सबसे लंबे खरीद चक्रों में से एक का हिस्सा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त के अंत में चीन के आधिकारिक स्वर्ण भंडार में 2,387 टन सोना था। इस आधार पर चीन दुनिया में पांचवें स्थान पर है, हालांकि उसका भंडार अभी भी अमेरिका के भंडार के एक-तिहाई से कम है।
जूलियस बेयर के विश्लेषक कार्स्टेन मेंके के अनुसार, डॉलर परिसंपत्तियों और अमेरिकी ट्रेजरी सिक्योरिटीज पर निर्भरता घटाना चीन की इस खरीद का एक अहम कारण है। 2022 में यूक्रेन संघर्ष के बाद रूस के केंद्रीय बैंक की परिसंपत्तियां फ्रीज किए जाने से भी कई देशों ने यह दोबारा परखा है कि विदेशी वित्तीय प्रणालियां विदेशों में रखे उनके भंडार पर किस तरह की सीमाएं लगा सकती हैं। घरेलू तिजोरियों में रखा सोना किसी दूसरे देश के वित्तीय ढांचे पर निर्भर नहीं होता।
अमेरिकी ट्रेजरी के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में चीन की अमेरिकी ट्रेजरी होल्डिंग घटकर 618 अरब डॉलर रह गई, जो 18 वर्षों का सबसे निचला स्तर है। चीन अपने विदेशी मुद्रा भंडार की संरचना में बदलाव कर रहा है और इसी दौरान सोने का हिस्सा बढ़ा रहा है। मेंके का अनुमान है कि चीन के केंद्रीय बैंक ने इस साल के पहले आठ महीनों में करीब 190 टन सोना खरीदा। इनमें से लगभग 110 टन खरीद की सार्वजनिक रूप से अभी घोषणा नहीं हुई हो सकती है।
आठ महीनों में ही 2025 का सालाना आयात पार
सीमा शुल्क के आंकड़ों के अनुसार, चीन ने 2026 के पहले आठ महीनों में 1,000 टन से अधिक सोना आयात किया और इसका मूल्य 158.8 अरब डॉलर रहा। दोनों आंकड़े 2025 के पूरे साल के स्तर से ऊपर हैं। इससे पता चलता है कि मांग केवल केंद्रीय बैंक के भंडार में बदलाव से नहीं, बल्कि आभूषणों, गोल्ड बार और सिक्कों की खरीद से भी व्यापक रूप से आ रही है।
स्टेट स्ट्रीट इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट में गोल्ड स्ट्रैटेजी के प्रमुख आकाश दोशी ने कहा कि साल के पहले आठ महीनों में चीनी उपभोक्ताओं का सोना आयात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। घरेलू बाजार में सोने की कीमतों का अंतरराष्ट्रीय कीमतों से ऊपर बढ़ता प्रीमियम भी सर्दियों के मौसम से पहले मांग मजबूत होने का संकेत देता है।
हालांकि मांग बढ़ने के साथ कीमतों में लगातार तेजी नहीं आई। जनवरी में 5,500 डॉलर प्रति औंस से ऊपर का रिकॉर्ड बनाने के बाद सितंबर में सोना 8% से अधिक गिरकर करीब 4,176 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। दोशी का अनुमान है कि अगर मांग मजबूत बनी रहती है, तो 2027 की पहली तिमाही के अंत तक कीमत 4,750 से 5,500 डॉलर प्रति औंस के बीच रह सकती है। यह बाजार का अनुमान है और कीमतों की दिशा पर निश्चित निष्कर्ष नहीं।
कमजोर प्रॉपर्टी बाजार ने निवेश विकल्प सीमित किए
परिवारों की सोने की मांग चीन के घरेलू निवेश बाजार में अन्य परिसंपत्तियों के कमजोर प्रदर्शन से भी जुड़ी है। रियल एस्टेट क्षेत्र लंबे समय से मंदी में है, जिससे आवासीय संपत्ति पर दबाव पड़ा है। चीन में घर परिवारों की संपत्ति रखने का एक प्रमुख साधन रहे हैं।
बेंचमार्क CSI 300 इंडेक्स इस साल करीब 8% नीचे है, जबकि S&P 500 में लगभग 13% की बढ़त हुई है। कमजोर कर्ज मांग के कारण जमा और बॉन्ड से मिलने वाले रिटर्न पर भी असर पड़ा है। चीन की एक साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड घटकर करीब 1.2% रह गई है, जो अमेरिकी एक साल के ट्रेजरी पर लगभग 4.46% की यील्ड से काफी कम है। ऐसे माहौल में ब्याज नहीं देने वाले सोने को रखने की अवसर लागत तुलनात्मक रूप से कम हो जाती है।
सैक्सो बैंक में कमोडिटी स्ट्रैटेजी के प्रमुख ओले हैनसन ने कहा कि कई पश्चिमी बाजारों की तुलना में चीन में सोना रखने की अवसर लागत कम है। आर्थिक परिदृश्य को लेकर चिंतित परिवारों के लिए आभूषण, बार और सिक्के एक साथ उपभोक्ता वस्तु और मूल्य-संग्रह के साधन की भूमिका निभा सकते हैं, खासकर जब वित्तीय परिसंपत्तियों का प्रदर्शन असमान हो।
चीनी मांग ने कीमतों पर दबाव कुछ कम किया
मजबूत मांग ने अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़ने से पैदा हुए दबाव को सोने के बाजार में कुछ हद तक समाहित करने में मदद की है। सोना ब्याज नहीं देता, इसलिए आम तौर पर ऊंची ब्याज दरें और बॉन्ड यील्ड उसके लिए दबाव का कारण बनती हैं। लेकिन चीन और अन्य आधिकारिक संस्थानों की दीर्घकालिक खरीद अल्पकालिक कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति कम संवेदनशील होती है।
ING की कमोडिटी स्ट्रैटेजिस्ट एवा मेंथे ने कहा कि चीनी खरीद सोने की कीमतों के लिए संरचनात्मक सहारे का महत्वपूर्ण स्रोत बन गई है। मेंके ने भी कहा कि ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें अधिक सख्त रुख की ओर बदलने और बॉन्ड यील्ड में उल्लेखनीय बढ़ोतरी के बावजूद सोना गर्मियों के स्तर से ऊपर बना रहा।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने संकेत दिया है कि वह 2026 में ब्याज दरें फिर बढ़ा सकता है। अमेरिकी वास्तविक ब्याज दरों में आगे की बढ़ोतरी सोने पर दबाव डाल सकती है। इसके विपरीत, केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीद और चीन की भौतिक मांग गिरावट को सीमित करने में मदद कर सकती है।
युआन और घरेलू बाजार आगे के अहम कारक
चीन की सोने की मांग पर कुछ सीमाएं भी आ सकती हैं। हैनसन के अनुसार, अगर प्रॉपर्टी और शेयर बाजारों में भरोसा लौटता है, तो परिवारों के पास सोने की होल्डिंग बढ़ाने का कारण कम हो सकता है। युआन कमजोर होने पर घरेलू बाजार में सोने की कीमत बढ़ती है, जिससे कुछ आयात घट सकते हैं। इसके उलट, जमा दरों में बढ़ोतरी होने पर बैंक परिसंपत्तियां सोने की तुलना में अधिक आकर्षक हो सकती हैं।
वैश्विक केंद्रीय बैंकों की रिजर्व रणनीति में व्यापक बदलाव भी बाजार को प्रभावित कर सकता है। यदि केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों से विविधीकरण घटाते हैं या भू-राजनीतिक तनाव में उल्लेखनीय कमी आती है, तो रणनीतिक सोना मांग धीमी पड़ सकती है। फिलहाल आधिकारिक संस्थानों की लगातार खरीद, चीन में सीमित घरेलू निवेश विकल्प और रिकॉर्ड भौतिक आयात सोने के बाजार के प्रमुख तथ्य बने हुए हैं।