Ethereum के सह-संस्थापक विटालिक ब्यूटेरिन ने चेताया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से गणित में होने वाली प्रगति अगले दो वर्षों में लैटिस क्रिप्टोग्राफी की सुरक्षा को कमजोर कर सकती है। इसका असर डिजिटल हस्ताक्षरों और एन्क्रिप्शन पर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि Bitcoin और Ethereum वॉलेट में इस्तेमाल होने वाले एलिप्टिक-कर्व हस्ताक्षरों को भी उम्मीद से पहले चुनौती मिल सकती है। हालांकि, ब्यूटेरिन ने उपयोगकर्ताओं से अभी संपत्ति स्थानांतरित करने या वॉलेट बदलने को नहीं कहा। उनकी टिप्पणियां क्रिप्टो कुंजियों की दीर्घकालीन सुरक्षा और ब्लॉकचेन नेटवर्क की तैयारी पर बहस को सामने लाती हैं।
लैटिस क्रिप्टोग्राफी की दीर्घकालीन सुरक्षा पर सवाल
ब्यूटेरिन ने Ethereum शोधकर्ता जस्टिन ड्रेक की उस अपील के जवाब में यह चिंता जताई, जिसमें उद्योग से “बंकर मोड” की योजना बनाने को कहा गया था। पहले कई लोग मानते थे कि क्वांटम कंप्यूटिंग से एलिप्टिक कर्व कमजोर हो सकते हैं, जबकि हैश-आधारित और लैटिस-आधारित तरीके तुलनात्मक रूप से सुरक्षित हैं। अब ब्यूटेरिन सवाल उठा रहे हैं कि क्या लैटिस क्रिप्टोग्राफी को लंबे समय तक सुरक्षित मानना उचित है।
पोस्ट-क्वांटम सुरक्षा की प्रमुख बुनियादों में लैटिस क्रिप्टोग्राफी शामिल है। मॉड्यूल-लैटिस-आधारित डिजिटल सिग्नेचर एल्गोरिदम (ML-DSA) लैटिस संरचनाओं का उपयोग करता है और इसे क्वांटम-कंप्यूटिंग हमलों का सामना करने के लिए बनाया गया है। पूरी तरह होमोमॉर्फिक एन्क्रिप्शन (FHE) भी लैटिस क्रिप्टोग्राफी पर निर्भर करता है। FHE में डेटा को डिक्रिप्ट किए बिना, एन्क्रिप्टेड डेटा पर गणना की जा सकती है। इसलिए लैटिस समस्याओं को हल करने का कोई नया गणितीय शॉर्टकट डिजिटल परिसंपत्तियों के हस्ताक्षरों से आगे के अनुप्रयोगों को भी प्रभावित कर सकता है।
ब्यूटेरिन ने पूर्णांक गुणनखंडन में हुई प्रगति का उदाहरण दिया। नंबर फील्ड सिव जैसे तरीकों ने यह आकलन बदल दिया था कि गुणनखंडन कितना कठिन है और कई दशकों में क्रिप्टोग्राफिक कुंजियों के लगातार लंबा होने में योगदान दिया। उन्होंने एक काल्पनिक स्थिति रखी: अगर AI गणित में दशकों की प्रगति को केवल दो वर्षों में संभव कर दे, तो लैटिस क्रिप्टोग्राफी की सुरक्षा का भी नए सिरे से आकलन करना पड़ सकता है। यह संभावित जोखिम का परिदृश्य है, इस बात का प्रमाण नहीं कि लैटिस प्रणालियां व्यावहारिक रूप से तोड़ी जा चुकी हैं।
Ethereum रोडमैप में हैश-आधारित हस्ताक्षरों पर जोर
ब्यूटेरिन के अनुसार, हैश फ़ंक्शन एलिप्टिक कर्व और लैटिस संरचनाओं की तुलना में अधिक मजबूत विकल्प हो सकते हैं, क्योंकि उनमें ऐसे गणितीय ढांचे कम हैं जिनका फायदा उठाया जा सके। पिछले एक साल में Ethereum के दीर्घकालीन Lean रोडमैप में हैश-आधारित डिजाइनों की ओर बदलाव हुआ है। इनमें SPHINCS और WOTS जैसी हस्ताक्षर तकनीकें शामिल हैं।
यह बदलाव क्रिप्टोग्राफिक बुनियादी ढांचे की दीर्घकालीन मजबूती पर डेवलपर्स के ध्यान को दर्शाता है। ब्लॉकचेन पर हस्ताक्षर यह तय करते हैं कि किसी पते से जुड़ी संपत्ति पर उपयोगकर्ता का नियंत्रण है। हस्ताक्षर प्रणाली बदलने पर नेटवर्क अपग्रेड, वॉलेट की अनुकूलता और संपत्ति स्थानांतरित करने जैसे व्यावहारिक सवाल उठेंगे। ब्यूटेरिन की टिप्पणियां मौजूदा वॉलेट या हस्ताक्षर प्रणालियों को तुरंत बदलने की मांग नहीं करतीं।
Bitcoin में ECDSA का जोखिम चरम स्थिति पर निर्भर
Bitcoin भी एलिप्टिक-कर्व हस्ताक्षरों का उपयोग करता है, इसलिए ड्रेक की चेतावनी इस नेटवर्क पर भी लागू होती है। उन्होंने कहा कि सबसे खराब स्थिति में ECDSA को कुछ ही महीनों में तोड़ा जा सकता है। यह एक चरम संभावना का आकलन है; उपलब्ध जानकारी यह नहीं दिखाती कि ECDSA को वास्तव में तोड़ दिया गया है।
ड्रेक ने Project11 की “risq list” का भी हवाला दिया। यह एक ट्रैकिंग टूल है, जो उन Bitcoin पतों को दर्ज करता है जिनकी सार्वजनिक कुंजियां ऑन-चेन उजागर हो चुकी हैं। उनके मुताबिक, 50 BTC से कम रखने वाले वॉलेट को “सातोशी की ढाल” से आंशिक सुरक्षा मिलती है; यह दावा करीब 20,000 उजागर पतों से जुड़ा है। सार्वजनिक जानकारी यह स्पष्ट नहीं करती कि यह सुरक्षा कैसे काम करती है। इसलिए इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि ये वॉलेट क्रिप्टोग्राफिक जोखिमों से पूरी तरह सुरक्षित हैं।
धारकों के लिए फिलहाल अहम सवाल सार्वजनिक कुंजियों का उजागर होना, हस्ताक्षर एल्गोरिदम का विकास और जरूरत पड़ने पर उद्योग का समन्वित बदलाव लागू कर पाना है—न कि तुरंत संपत्ति स्थानांतरित करना। ब्यूटेरिन ने जल्दबाजी न करने की स्पष्ट सलाह दी। लैटिस क्रिप्टोग्राफी और ECDSA की सुरक्षा का भविष्य गणित में आगे होने वाली प्रगति और उसके व्यावहारिक हमले में बदल पाने पर निर्भर करेगा।