जापान में बिताए एक साल ने अलिसा हिकमैन के लिए यह सवाल बदल दिया है कि वह आगे कहां रहना चाहती हैं। ओटावा में पली-बढ़ी हिकमैन का वर्किंग-हॉलिडे वीजा खत्म होने पर कनाडा लौटने का इरादा है, लेकिन अब अपने पुराने शहर में दोबारा बसना तय मानकर नहीं चल रही हैं। रहने की बढ़ती लागत, जापान की सुविधाजनक परिवहन व्यवस्था और विदेश में खुद की नई दिनचर्या बनाने के अनुभव ने उनकी योजनाओं को प्रभावित किया है।
ओटावा से शुरू हुआ एक साल का सफर
हिकमैन का जन्म और पालन-पोषण ओटावा में हुआ। उनके परिवार के अधिकांश सदस्य अब भी वहीं रहते हैं, जबकि कुछ अन्य रिश्तेदार भी कुछ घंटे की दूरी पर हैं। जीवन के बड़े हिस्से में उनका परिचित खाका यही था कि वह घर के करीब रहेंगी, कभी-कभार यात्रा करेंगी और अंततः ऐसी जगह बसेंगी जिसे पहले से जानती हों।
वयस्क होने के बाद कनाडा से बाहर जीवन को लेकर उनकी दिलचस्पी बढ़ी। इसी दौरान बढ़ती जीवन-यापन लागत का दबाव भी महसूस होने लगा। उनके अपार्टमेंट का लीज समझौता खत्म होने वाला था, इसलिए उन्होंने बदलाव पर विचार शुरू किया। जापान की पिछली यात्रा ने उन पर गहरी छाप छोड़ी थी और एक साल का वर्किंग-हॉलिडे वीजा विदेश में रहकर जीवन को परखने का रास्ता दे रहा था।
शुरुआती योजना सीधी थी: जापान में एक साल बिताना, फिर ओटावा लौटकर आसपास ही एक और घर किराये पर ले लेना। लेकिन टोक्यो में पहली रात ही वह विदेश में अधिक समय तक रहने के विकल्प तलाशने लगीं।
टोक्यो और ओसाका में रेल यात्रा ने बदली दिनचर्या
जापान में रहने के दौरान हिकमैन टोक्यो और ओसाका, दोनों शहरों में रहीं और एक दर्जन से अधिक शहरों व कस्बों का दौरा किया। उन्होंने नए रेस्तरां आजमाए, अलग-अलग देशों के लोगों से मुलाकात की और पाया कि घूमने-फिरने के लिए हमेशा कोई नई जगह उपलब्ध है।
जापान के रेल नेटवर्क ने बिना लंबी तैयारी के यात्रा करना आसान बना दिया। वह अचानक किसी अनजान शहर जाने का फैसला कर सकती थीं। उनके अनुसार, ओटावा में इसी तरह की यात्रा के लिए आम तौर पर अधिक योजना बनानी पड़ती और खर्च भी ज्यादा होता। हिकमैन के लिए परिवहन संपर्कों ने सिर्फ यात्रा के अनुभव को नहीं बदला; उन्होंने नए स्थानों की खोज को रोजमर्रा की जिंदगी का व्यावहारिक हिस्सा बना दिया।
उन्हें लंबे समय से रोमांच और नई जगहों की तलाश पसंद रही है। वह बचपन में शहर से बाहर निकलने के लिए अपनी मां के साथ की गई पदयात्राओं और छोटी सड़क यात्राओं को याद करती हैं। जापान के जीवन ने इस रुचि को और जगह दी। उन्हें कभी-कभी कनाडा की याद आती है, लेकिन जापान में मिली परिचित-सी सहजता उनकी अपेक्षा से कहीं अधिक रही। इस कारण उस जीवनशैली को बिना सोचे छोड़ देने की कल्पना अब कठिन लगती है।
इस अनुभव ने उन्हें यह विश्वास नहीं दिलाया कि उन्हें हमेशा जापान में ही रहना चाहिए। इसके बजाय, इसने उनके लिए “घर” का अर्थ बदल दिया। अब वह यह नहीं मानतीं कि जिस जगह जन्म हुआ है, पूरी जिंदगी वहीं बिताना जरूरी है। दूसरे शहर और नए अनुभव अब ऐसे विकल्प लगते हैं, जिन पर गंभीरता से विचार किया जा सकता है।
वीजा खत्म होने पर फिलहाल कनाडा वापसी
हिकमैन का जापानी वीजा अब समाप्ति के करीब है, इसलिए निकट अवधि में कनाडा लौटना सबसे व्यावहारिक योजना है। विदेश में स्थायी रूप से बसने के लिए व्यवस्थाओं और कागजी कार्रवाई पर अधिक समय चाहिए। उनका अनुमान है कि वह कुछ महीनों में जापान छोड़ेंगी और दक्षिण-पूर्व एशिया की यात्रा करेंगी। यात्रा कार्यक्रम और समय के अनुसार कनाडा लौटने से पहले कुछ अन्य जगहों पर रुकने की भी संभावना है।
कनाडा लौटने के बाद वह किसी नई यात्रा की योजना बना सकती हैं या एक साल के किसी दूसरे वीजा कार्यक्रम पर विचार कर सकती हैं। वह खुद को फिर से विदेश में रहते हुए देखती हैं, या कम से कम अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के लिए अधिक समय निकालना चाहती हैं। जापान एक विकल्प बना हुआ है, लेकिन अब वही एकमात्र विकल्प नहीं है।
फिलहाल उन्हें उम्मीद नहीं है कि कनाडा लौटते ही वह ओटावा में पहले से सोची हुई स्थिर जिंदगी शुरू कर देंगी। अगले कदम को लेकर फैसला अभी बाकी है। वह कनाडा के किसी दूसरे हिस्से में जाने या सड़क यात्रा पर निकलकर यह देखने पर भी विचार कर रही हैं कि परिस्थितियां उन्हें कहां ले जाती हैं। जापान में मिले नए नजरिये के साथ उन्हें यह भी महसूस हुआ है कि उन्होंने अपने ही देश का अपेक्षाकृत कम हिस्सा देखा है और अब उसे बेहतर ढंग से जानना चाहती हैं।
अभी वह बीसवें दशक में हैं और उनका मानना है कि फैसले धीरे-धीरे लेने के लिए उनके पास पर्याप्त समय है। जापान में बिताए एक साल ने उनके हर सवाल का जवाब नहीं दिया; उसने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल इतना तय है कि वीजा खत्म होने पर वह जापान छोड़ेंगी, कनाडा लौटेंगी और अगली यात्रा तथा लंबी अवधि की योजनाओं के बीच संतुलन तलाशती रहेंगी।