अमेरिकी यूरोपीय मल्टीडोमेन कमान के तहत काम करने वाली एक इकाई ने कैलिफोर्निया में टाइफॉन मध्यम-दूरी प्रणाली का पहला लाइव-फायर परीक्षण किया। इस दौरान टॉमहॉक जमीन-हमला क्रूज़ मिसाइल दागी गई। सितंबर के अंत में नेवल एयर वेपन्स स्टेशन चाइना लेक में हुआ यह परीक्षण अमेरिकी जमीन पर टाइफॉन का तीसरा प्रक्षेपण था। इससे पहले मुख्यतः हिंद-प्रशांत क्षेत्र में देखी गई यह लंबी दूरी की जमीन-आधारित मारक प्रणाली अब यूरोपीय कमान के प्रशिक्षण कार्यक्रम में भी शामिल हो गई है।
यूरोपीय कमान की इकाई ने पहली बार दागी टाइफॉन मिसाइल
यह अभ्यास तीसरी बटालियन, 12वीं फील्ड आर्टिलरी रेजिमेंट ने किया। यह इकाई अमेरिकी यूरोपीय मल्टीडोमेन कमान का हिस्सा है और लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता के लिए तैनात है। सेना की चार टाइफॉन बैटरियों में से एक इसी बटालियन के पास है। परीक्षण से पहले सैनिकों ने प्रणाली के संचालन और रखरखाव का पांच सप्ताह का प्रशिक्षण पूरा किया।
बटालियन कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल डेरेक बार्टलेट ने कहा कि प्रशिक्षण से उन्हें इकाई की प्रणाली को अग्रिम मोर्चे पर तैनात करने और चलाने की क्षमता पर “काफी भरोसा” मिला। अमेरिकी यूरोपीय मल्टीडोमेन कमान के मुताबिक, लाइव-फायर अभ्यास का उद्देश्य यह परखना था कि सैनिक नए उपकरण को वास्तविक युद्धक क्षमता में बदल सकते हैं या नहीं।
टाइफॉन एक मोबाइल, जमीन से प्रक्षेपित होने वाली प्रणाली है, जिसे आर्मी मिड-रेंज कैपेबिलिटी सिस्टम भी कहा जाता है। यह टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइल और स्टैंडर्ड मिसाइल-6 (SM-6) इंटरसेप्टर दाग सकती है। दोनों तरह के हथियार सेना को अलग-अलग मिशनों के लिए विकल्प देते हैं, जिनमें जमीन से अधिक दूरी पर स्थित लक्ष्यों को निशाना बनाना भी शामिल है। लॉकहीड मार्टिन इस प्रणाली का निर्माता है। इसे अमेरिका की मौजूदा लंबी दूरी की मारक क्षमताओं के पूरक के तौर पर विकसित किया गया है।
हिंद-प्रशांत में 2024 से अग्रिम तैनाती
टाइफॉन की पहली विदेशी तैनाती अप्रैल 2024 में हुई, जब अमेरिका ने फिलीपींस की सेनाओं के साथ संयुक्त अभ्यास के दौरान इसे वहां भेजा। अमेरिकी सेना की प्रशांत कमान ने उस तैनाती को एक अहम पड़ाव बताया था।
जुलाई 2025 में टैलिसमैन सेबर अभ्यास के दौरान अमेरिकी सेना ने अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा के पश्चिम में टाइफॉन का पहला प्रक्षेपण किया। प्रणाली से समुद्री लक्ष्य पर SM-6 दागी गई, जिसने लक्ष्य को सफलतापूर्वक डुबो दिया। कैलिफोर्निया के परीक्षण में इसके बजाय टॉमहॉक जमीन-हमला मिसाइल का इस्तेमाल हुआ। दोनों अभ्यास इस बात को रेखांकित करते हैं कि टाइफॉन अलग-अलग अभियानों के लिए विभिन्न हथियार इस्तेमाल कर सकती है।
7वीं इन्फैंट्री डिवीजन की मल्टीडोमेन कमान के तहत प्रशांत क्षेत्र की सेनाओं का नेतृत्व करने वाले मेजर जनरल बर्नार्ड हैरिंगटन ने इस सप्ताह कहा कि टाइफॉन करीब 30 महीनों से इस क्षेत्र में अग्रिम तैनाती बनाए हुए है। उनके अनुसार, लगातार तैनाती से उपकरणों पर प्रशिक्षण और परिचालन अनुभव का आदान-प्रदान संभव हुआ है। इससे अमेरिकी और फिलीपीनी कर्मियों को रखरखाव की जरूरतों, प्रणाली की सुरक्षा और स्थानीय परिस्थितियों में सेंसर तथा फायरिंग इकाइयों के बीच तालमेल का अनुभव भी मिला है।
यूरोप में लंबी दूरी की मारक क्षमता का विकल्प
अमेरिकी सेना के अधिकारियों का कहना है कि टाइफॉन यूरोपीय थिएटर में लंबी दूरी से हमला करने का एक अतिरिक्त विकल्प दे सकती है। अमेरिकी यूरोपीय मल्टीडोमेन कमान के प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल स्टीवन कारपेंटर ने कहा कि लाइव-फायर परीक्षण ने नई प्रणाली के इस्तेमाल में इकाई की क्षमता दिखाई। उन्होंने यह भी कहा कि टाइफॉन से कमांडर अधिक दूरी पर स्थित अहम लक्ष्यों को निशाने के दायरे में रख सकेंगे और संयुक्त बलों के पास अभियान के अधिक विकल्प होंगे।
टाइफॉन का विकास अमेरिका के इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्सेज (INF) संधि से हटने के फैसले से जुड़ा है। वॉशिंगटन ने 1987 के इस हथियार नियंत्रण समझौते से 2019 में यह कहते हुए कदम पीछे खींचे कि रूस ने इसकी शर्तों का उल्लंघन किया है। संधि में 500 से 5,000 किलोमीटर की दूरी तक मार करने वाली जमीन से दागी जाने वाली परमाणु और पारंपरिक बैलिस्टिक तथा क्रूज़ मिसाइलों पर रोक थी।
हिंद-प्रशांत में टाइफॉन की तैनाती का बीजिंग ने विरोध किया है। 2024 में चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा था कि अमेरिकी तैनाती “इतिहास का पहिया पीछे घुमा रही है।” उनका तर्क था कि इससे क्षेत्रीय देशों की सुरक्षा को खतरा है और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है।
चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी रॉकेट फोर्स के पास बड़ी संख्या में मिसाइलें हैं। उसके शस्त्रागार में मध्यम और मध्यम से लंबी दूरी तक मार करने वाली प्रणालियां शामिल हैं, जो अमेरिकी ठिकानों और परिसंपत्तियों के साथ-साथ सहयोगी देशों के ठिकानों के लिए भी खतरा बन सकती हैं। ताजा परीक्षण अमेरिका में हुआ, हालांकि इसमें शामिल सैनिक यूरोपीय कमान ढांचे से थे। अभ्यास से इकाई का परिचालन प्रशिक्षण पूरा होने और लाइव-फायर अनुभव मिलने का पता चलता है; उपलब्ध जानकारी में यह नहीं बताया गया है कि टाइफॉन को यूरोप में अग्रिम ठिकानों पर तैनात किया जाएगा या नहीं, और यदि हां तो कब।