क्रॉस रिवर बैंक ने Ripple के डॉलर-आधारित स्टेबलकॉइन RLUSD को अपने पारंपरिक बैंकिंग कारोबार में शामिल करने की योजना बताई है। इससे स्टेबलकॉइन और बैंकिंग सेवाओं के बीच सीधा संबंध बनेगा। बाजार की दिलचस्पी RLUSD की कीमत में नहीं, बल्कि इस बात में है कि बैंक ब्लॉकचेन कंपनी द्वारा जारी डॉलर-आधारित परिसंपत्ति को कैसे संभालेगा और क्या इसे सामान्य वित्तीय प्रक्रियाओं में जोड़ा जा सकेगा।
क्रॉस रिवर बैंक के कारोबार में RLUSD
RLUSD, Ripple का अमेरिकी डॉलर से जुड़ा स्टेबलकॉइन है। इसे डिजिटल परिसंपत्तियों के कारोबार और ऑन-चेन भुगतान जैसे उपयोगों के लिए तैयार किया गया है। इसे अपने कारोबारी ढांचे में शामिल करने के फैसले से क्रॉस रिवर बैंक और Ripple के बीच RLUSD को लेकर व्यावसायिक संबंध स्थापित होता है।
हालांकि, अब तक जारी जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि इस व्यवस्था में जमा, भुगतान, सेटलमेंट, कस्टडी या संस्थागत ग्राहकों के लिए अन्य बैंकिंग सेवाएं शामिल होंगी या नहीं। इसलिए इसे बैंक के रोजमर्रा के कामकाज में व्यापक रूप से लागू हो चुका कदम नहीं माना जा सकता।
सेवा और ग्राहक तय करेंगे व्यवस्था का दायरा
स्टेबलकॉइन पारंपरिक वित्त और क्रिप्टो परिसंपत्ति बाजार के बीच काम करते हैं। बैंकों के लिए इनसे जुड़ी गतिविधियों में ग्राहक की पहचान, लेनदेन की निगरानी, परिसंपत्तियों की कस्टडी, डॉलर रिजर्व की व्यवस्था और परिचालन तथा अनुपालन प्रक्रियाएं शामिल हो सकती हैं। जारीकर्ताओं के लिए बैंकिंग संबंध फिएट मुद्रा खातों को ब्लॉकचेन नेटवर्क पर मौजूद परिसंपत्तियों से जोड़ने में मदद कर सकते हैं।
क्रॉस रिवर बैंक और RLUSD के बीच व्यवस्था इसलिए अहम है क्योंकि इससे स्टेबलकॉइन का उपयोग डिजिटल परिसंपत्ति प्लेटफॉर्म से आगे बैंकिंग सेवाओं के ढांचे तक पहुंच सकता है। इसमें कौन-से ग्राहक और किस तरह के लेनदेन शामिल होंगे, यह दोनों कंपनियों की आगे की जानकारी पर निर्भर करेगा।
कंपनियों ने क्रॉस रिवर बैंक के जरिए होने वाले लेनदेन की मात्रा, ग्राहकों की संख्या, लॉन्च की समयसीमा या व्यवस्था से मिलने वाले राजस्व का खुलासा नहीं किया है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि बैंक सीधे रूपांतरण, भुगतान और सेटलमेंट सेवाएं देगा, कस्टडी उपलब्ध कराएगा या किसी अन्य तरीके से सहयोग करेगा। इन जानकारियों से इस व्यवस्था के व्यावसायिक मूल्य और ग्राहकों के लिए RLUSD के इस्तेमाल का तरीका स्पष्ट होगा। साथ ही, इससे बैंक की परिचालन जिम्मेदारियों का दायरा भी तय होगा।
Ripple और बैंक की जिम्मेदारियां अभी स्पष्ट नहीं
RLUSD के उत्पाद और जारी करने की रूपरेखा की जिम्मेदारी Ripple की है, जबकि क्रॉस रिवर बैंक इस व्यवस्था में पारंपरिक बैंकिंग पक्ष का प्रतिनिधित्व करता है। दोनों के बीच जिम्मेदारियों का बंटवारा, परिसंपत्तियों का हस्तांतरण और देनदारी की सीमाएं अभी स्पष्ट नहीं की गई हैं।
स्टेबलकॉइन जारीकर्ता के साथ बैंक का संबंध अपने आप में नियामकीय मंजूरी, व्यापक स्वीकार्यता या परिचालन जोखिमों के खत्म होने का संकेत नहीं है। फिलहाल यह कदम दिखाता है कि दोनों पक्ष डिजिटल परिसंपत्तियों को बैंकिंग ढांचे से जोड़ने के तरीकों पर काम कर रहे हैं।
अभी तक पुष्टि हुई है कि क्रॉस रिवर बैंक Ripple के RLUSD को अपने पारंपरिक बैंकिंग कारोबार में शामिल करने की योजना बना रहा है। संबंधित उत्पादों, लक्षित ग्राहकों और परिचालन आंकड़ों का खुलासा नहीं हुआ है। आगे की जानकारी से पता चलेगा कि यह व्यवस्था कुछ संस्थागत सेवाओं तक सीमित रहती है या भुगतान और सेटलमेंट के व्यापक उपयोग तक पहुंचती है।