Kalshi के CEO Tariq Mansour ने कहा है कि अमेरिका में प्रेडिक्शन मार्केट्स की निगरानी को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई यह तय कर सकती है कि इवेंट कॉन्ट्रैक्ट देश में उपलब्ध रहेंगे या कंपनियों को अपना कारोबार विदेश ले जाना पड़ेगा। खेलों से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट्स में ट्रेडिंग बढ़ने के साथ, Kalshi और राज्य नियामकों के बीच विवाद इस उद्योग के कारोबारी मॉडल और नियामकीय सीमाओं को आकार दे रहा है।
14 अक्टूबर को वॉशिंगटन के पास DC Fintech Week में बोलते हुए Mansour ने मौजूदा मुकदमों को लेकर कहा कि उन्हें स्थिति पर “काफी भरोसा” है। हालांकि, उन्होंने इस विवाद को सिर्फ संघीय और राज्य निगरानी के बीच अधिकारों की लड़ाई नहीं बताया। उनके मुताबिक, बड़ा सवाल यह है कि प्रेडिक्शन मार्केट्स अमेरिका में काम कर पाएंगे या उन्हें विदेश जाना होगा।
Kalshi ने संघीय निगरानी के पक्ष में दलील दी
न्यू जर्सी समेत कई राज्यों ने Kalshi और अन्य प्रेडिक्शन-मार्केट ऑपरेटरों पर मुकदमे किए हैं। राज्यों का तर्क है कि खेलों के नतीजों से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट अवैध खेल सट्टेबाजी के बराबर हैं और उन पर राज्य के जुआ नियामकों का अधिकार होना चाहिए। Kalshi और उसके एक्सचेंज की निगरानी करने वाली Commodity Futures Trading Commission (CFTC) का कहना है कि प्रेडिक्शन मार्केट संघीय वित्तीय बाजार व्यवस्था का हिस्सा हैं और इनका नियमन संघीय अधिकारियों को करना चाहिए।
मामला कई संघीय अपीलीय अदालतों तक पहुंचा है, जहां फैसले अलग-अलग रहे हैं। एक अहम फैसले में Kalshi के पक्ष का समर्थन किया गया, जबकि दो अन्य अदालतों ने राज्यों की इस दलील को सही माना कि खेलों से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट राज्य निगरानी के दायरे में आते हैं। इस अनिश्चितता का हवाला देते हुए न्यू जर्सी ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की है। National Football League समेत कई प्रमुख संगठनों ने भी अदालत में अपनी राय रखी है।
Mansour ने कहा कि कंपनी की स्थापना के बाद से वह Kalshi और नियामकीय व्यवस्था के संबंध पर विचार करते रहे हैं। उनके अनुसार, Kalshi का कारोबार कमोडिटी की परिभाषा में स्वाभाविक रूप से आता है। उन्होंने यह भी कहा कि Commodity Exchange Act कृषि वायदा से आगे तेल, धातुओं, स्वैप और अन्य जटिल या अमूर्त वित्तीय उत्पादों तक संघीय निगरानी बढ़ाने का कानूनी आधार देता है।
खेल कॉन्ट्रैक्ट्स के आर्थिक प्रभाव पर विवाद
राज्य नियामकों और अन्य विरोधियों का कहना है कि खेल सट्टेबाजी को संघीय वित्तीय कॉन्ट्रैक्ट्स की श्रेणी में नहीं रखना चाहिए। Mansour ने इस दलील को खारिज किया कि खेल आयोजनों का कोई आर्थिक असर नहीं होता। उन्होंने खेल इवेंट कॉन्ट्रैक्ट्स में ट्रेडिंग और उनसे जुड़े धन के प्रवाह की ओर इशारा करते हुए कहा कि ये उत्पाद वित्तीय बाजारों से अलग महज मनोरंजन के दांव नहीं हैं।
कानूनी विवाद का केंद्र यह है कि खेल के नतीजे से जुड़ा एक ही कॉन्ट्रैक्ट किस श्रेणी में आएगा: जुआ उत्पाद या संघीय कमोडिटी नियमों के तहत आने वाला वित्तीय कॉन्ट्रैक्ट। इसका फैसला यह तय कर सकता है कि प्लेटफॉर्म ये उत्पाद देशभर में पेश कर पाएंगे या नहीं, ग्राहकों की सुरक्षा के कौन-से नियम लागू होंगे और अलग-अलग राज्य ट्रेडिंग पर रोक लगा सकेंगे या नहीं।
क्रिप्टो ट्रेडिंग वॉल्यूम पर Mansour का जवाब
Mansour ने Kalshi के Bitcoin और Ether परपेचुअल फ्यूचर्स बाजारों के ट्रेडिंग वॉल्यूम को लेकर उठे सवालों का भी जवाब दिया। बाजार पर नजर रखने वालों ने प्लेटफॉर्म पर एक ही तय डॉलर राशि के कई दोहराए गए ट्रेड देखे थे। कुछ समय तक इन लेन-देन का कुल वॉल्यूम में बड़ा हिस्सा रहने के कारण कुछ लोगों ने पूछा कि क्या रिपोर्ट किया गया कारोबार कृत्रिम रूप से बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया था।
Mansour ने X पर हुई चर्चा को “बहुत अजीब” बताया और इस बात से इनकार किया कि ऐसे ट्रेड बढ़े हुए वॉल्यूम का संकेत हैं। उन्होंने कहा कि मार्केट मेकर अक्सर तय आकार के ऑर्डर इस्तेमाल करते हैं, जिससे एक ही राशि के लेन-देन बार-बार दिखाई दे सकते हैं।
उन्होंने कहा कि आंकड़ों पर हुई प्रतिक्रिया से पता चलता है कि कई लोग बाजारों के काम करने के तरीके को पूरी तरह नहीं समझते। Mansour के मुताबिक, बाजार की संरचना जटिल हो सकती है और केवल एक जैसे ट्रेड आकार या थोड़े समय में वॉल्यूम में बदलाव से यह साबित नहीं होता कि किसी प्लेटफॉर्म ने असामान्य गतिविधि की है।
CFTC इवेंट कॉन्ट्रैक्ट्स के नियम तय करने की ओर
मुकदमे जारी रहने के बीच CFTC प्रेडिक्शन मार्केट्स के नियामकीय ढांचे को मजबूत करने की दिशा में कदम उठा रही है। अक्टूबर की शुरुआत में एजेंसी ने एक नियम जारी किया और दूसरा प्रस्तावित किया, जिसके तहत इवेंट कॉन्ट्रैक्ट्स को स्वैप की परिभाषा में शामिल किया जाएगा। इस तरीके से इन उत्पादों को राज्य के जुआ नियामकों के बजाय स्पष्ट रूप से CFTC की निगरानी में रखा जा सकता है।
CFTC के कदम Kalshi और इसी तरह के प्लेटफॉर्मों के कारोबारी ढांचे को सीधे प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, अंतिम अधिकार क्षेत्र का फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि अदालतें संघीय कमोडिटी कानून, राज्य के जुआ कानूनों और खेलों से जुड़े इवेंट कॉन्ट्रैक्ट्स की कानूनी प्रकृति की व्याख्या कैसे करती हैं। अपीलीय अदालतों के अलग-अलग फैसलों का टकराव अभी सुलझा नहीं है और सुप्रीम कोर्ट ने न्यू जर्सी की याचिका पर सुनवाई करने का फैसला नहीं किया है।
ट्रेडरों और प्लेटफॉर्म उपयोगकर्ताओं के लिए यह विवाद सिर्फ इस बात तक सीमित नहीं है कि कोई खास उत्पाद सूचीबद्ध रह सकता है या नहीं। इससे यह भी तय होगा कि किन राज्यों के लोग इन उत्पादों तक पहुंच सकेंगे, कॉन्ट्रैक्ट्स का निपटारा कैसे होगा और प्लेटफॉर्मों को किन नियामकीय मानकों का पालन करना पड़ेगा। अदालतों और नियामकों के अगले फैसलों तक Kalshi का देशव्यापी परिचालन मॉडल कानूनी अनिश्चितता के दायरे में रहेगा।