ऊंची ऊर्जा लागत और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की आशंका से सोने पर दबाव बना हुआ है। हाजिर सोना 1.8% तक गिरकर 4,206 डॉलर प्रति औंस से नीचे चला गया। इससे पिछले सप्ताह धातु में 2% से अधिक की गिरावट आई थी। अब बाजार यह आकलन कर रहा है कि महंगा कच्चा तेल महंगाई, ब्याज दरों की दिशा और सोने की मांग को कैसे प्रभावित कर सकता है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य खोलने पर बातचीत में प्रगति नहीं
सोने में गिरावट ऐसे समय आई है जब होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर वार्ता में कोई सफलता नहीं मिली। ईरान ने कहा है कि समुद्री मार्ग बहाल करने के लिए रखी गई उसकी शर्तों में ढील नहीं दी जाएगी। अमेरिका ने सात दिन के लिए जलडमरूमध्य खोलने के ईरान के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि इस सप्ताह बातचीत फिर शुरू होने की उम्मीद है।
यह जलडमरूमध्य मध्य पूर्व से कच्चे तेल की ढुलाई का अहम रास्ता है। यहां से जहाजों की आवाजाही स्थिर रहने की संभावना का असर तेल आपूर्ति और परिवहन लागत के अनुमानों पर पड़ता है। वार्ता ठप रहने से तेल कीमतों को समर्थन मिला है और ऊर्जा लागत से महंगाई बढ़ने की आशंका कारोबारियों के फिर ध्यान में है।
इस साल ब्रेंट क्रूड 70% से ज्यादा चढ़ा
अमेरिका-ईरान संघर्ष के आठवें महीने में प्रवेश के साथ, साल की शुरुआत से ब्रेंट क्रूड 70% से अधिक महंगा हो चुका है। तेल की ऊंची कीमतें ईंधन और परिवहन लागत बढ़ाती हैं। ऊर्जा और उससे जुड़ी वस्तुओं के जरिए यह दबाव उपभोक्ता कीमतों तक भी पहुंच सकता है।
मौद्रिक नीति के लिहाज से, ऊर्जा कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से महंगाई को नीचे लाना मुश्किल हो सकता है। इसी वजह से बाजार ने फेड की ओर से आगे और ब्याज दर बढ़ाए जाने की संभावना पर दांव बढ़ाया है। दरें बढ़ने की उम्मीद आम तौर पर बिना ब्याज देने वाले सोने को रखने की अवसर लागत बढ़ाती है, जिससे निकट अवधि में इसकी कीमत पर दबाव पड़ सकता है।
ब्याज दरों और डॉलर की उम्मीदों से सोने पर दबाव
सोने से ब्याज आय नहीं होती। जब निवेशकों को लगता है कि अमेरिकी ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहेंगी या और बढ़ेंगी, तो ब्याज देने वाली परिसंपत्तियों की तुलना में सोना कम आकर्षक हो जाता है। हाल की कमजोरी से संकेत मिलता है कि भू-राजनीतिक तनाव के बीच सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग पर दरों को लेकर चिंता भारी पड़ रही है।
ताजा गिरावट किसी एक कारोबारी सत्र तक सीमित नहीं है। पिछले सप्ताह सोना 2% से अधिक गिरा था और इसके बाद कुछ समय के लिए 4,206 डॉलर प्रति औंस से नीचे चला गया। ऊर्जा आपूर्ति में झटके के जवाब में केंद्रीय बैंक की संभावित नीति को लेकर बाजार अपने अनुमान बदल रहा है। यदि तेल महंगा बना रहता है, तो महंगाई का दबाव और ब्याज दरों की उम्मीदें कीमती धातुओं के लिए अहम कारक बने रहेंगे।
कारोबारी इस सप्ताह होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर वार्ता दोबारा शुरू होने, ईरान की शर्तों में किसी बदलाव और कच्चे तेल की कीमतों की दिशा पर नजर रख रहे हैं। इन घटनाक्रमों से ऊर्जा आपूर्ति के अनुमान प्रभावित हो सकते हैं और फेड की ब्याज दर नीति को लेकर बाजार की सोच बदल सकती है।