3 नवंबर के मध्यावधि चुनाव में तीन सप्ताह से भी कम समय बचा है। रिपब्लिकन और डोनाल्ड ट्रंप के समर्थक समूहों ने कांग्रेस की सीटों के लिए 740 मिलियन डॉलर से अधिक खर्च किए हैं। टेस्ला और स्पेसएक्स के CEO एलन मस्क ने जुलाई से अब तक रिपब्लिकन समूहों को 276 मिलियन डॉलर और दिए हैं। फिर भी अहम मुकाबलों में सर्वेक्षणों में स्पष्ट बदलाव नहीं दिखा। अब रिपब्लिकन उन सीटों की रक्षा के लिए धन लगा रहे हैं, जिन्हें पहले चुनौती देने की योजना थी।
लेबर डे से 14 अक्टूबर तक रिपब्लिकन समूहों ने कांग्रेस चुनावों पर 740 मिलियन डॉलर से अधिक खर्च किए। इसमें डोनाल्ड ट्रंप से जुड़े संगठनों का कम से कम 220 मिलियन डॉलर शामिल है। पार्टी के पास भारी धनराशि होने के बावजूद कई करीबी सीनेट मुकाबलों में डेमोक्रेट सर्वेक्षणों में आगे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि विज्ञापन उम्मीदवारों का संदेश पहुंचा सकते हैं, लेकिन प्रतिकूल राजनीतिक माहौल को अकेले पलटना मुश्किल है।
मस्क और रिपब्लिकन समूहों के पास बड़ा वित्तीय भंडार
चुनाव के आखिरी चरण में रिपब्लिकन को धन के मामले में स्पष्ट बढ़त हासिल थी। फेडरल इलेक्शन कमीशन में दाखिल दस्तावेजों के मुताबिक, ट्रंप समर्थक MAGA Inc. के पास अगस्त के अंत में करीब 416 मिलियन डॉलर थे। प्रमुख रिपब्लिकन समूहों के पास कुल मिलाकर लगभग 1 अरब डॉलर उपलब्ध थे, जबकि उनके डेमोक्रेटिक समकक्षों के पास 579 मिलियन डॉलर थे।
मस्क ने पहले कहा था कि वह इस चुनाव चक्र में अपनी भागीदारी कम करेंगे। लेकिन जुलाई से उन्होंने रिपब्लिकन समूहों को 276 मिलियन डॉलर से अधिक दिए हैं। इसमें रिपब्लिकन सीनेट उम्मीदवारों का समर्थन करने वाली सुपर PAC Senate Leadership Fund को 158 मिलियन डॉलर और उनके अपने America PAC को 76 मिलियन डॉलर से अधिक शामिल हैं। चुनाव चक्र के पहले हिस्से में ज्ञात संघीय राजनीतिक चंदे को जोड़ने पर मस्क का कुल योगदान करीब 366 मिलियन डॉलर बैठता है। अब तक पहचाने गए व्यक्तिगत दानदाताओं में यह सबसे बड़ी राशि है।
बड़े चंदे सिर्फ मस्क तक सीमित नहीं हैं। इस चुनाव चक्र में सबसे बड़े 10 व्यक्तिगत और पारिवारिक दानदाता समूहों में से नौ के रिपब्लिकन से करीबी संबंध हैं। इन समूहों ने शीर्ष 10 की कुल चंदा राशि का 86% दिया है। चुनावी वित्त पर नजर रखने वाली संस्था OpenSecrets की कार्यकारी निदेशक हिलेरी ब्रासेथ ने कहा कि इस चुनाव चक्र में राजनीतिक प्रभाव और संपत्ति का पैमाना तथा संकेंद्रण अभूतपूर्व है।
राजनीतिक विज्ञापन पर खर्च भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की राह पर है। AdImpact का अनुमान है कि 2025-26 के चुनाव चक्र में विज्ञापन पर कुल 11.6 अरब डॉलर खर्च होंगे। यह 2022 के मध्यावधि चुनाव और 2024 के राष्ट्रपति चुनाव—दोनों के कुल खर्च से अधिक होगा।
टीवी विज्ञापनों की बढ़ती लागत से खर्च की बढ़त सीमित
बड़ा चुनावी कोष होने का मतलब यह नहीं कि टीवी पर उतने ही अनुपात में ज्यादा प्रचार मिलेगा। चुनाव से पहले के आखिरी 60 दिनों में उम्मीदवारों को प्रसारण विज्ञापनों के लिए सबसे कम दरें मिलती हैं। सुपर PAC जैसे बाहरी समूहों को यह रियायती दर नहीं मिलती। रिपब्लिकन समूहों के कुछ फंड देर से आए और उन्हें ऐसे बाहरी समूहों के जरिए खर्च किया गया, जिन्हें टीवी समय के लिए अधिक भुगतान करना पड़ता है। वहीं, डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों ने आम तौर पर अपने रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वियों से अधिक चुनावी चंदा जुटाया है।
टेक्सास का सीनेट मुकाबला इस अंतर को दिखाता है। 1 से 14 अक्टूबर के बीच डेमोक्रेट जेम्स तालारिको के अभियान ने डलास में स्थानीय टीवी विज्ञापनों पर करीब 2.4 मिलियन डॉलर खर्च किए। अनुमान है कि औसत दर्शक ने ये विज्ञापन 48 बार देखे। रिपब्लिकन उम्मीदवार केन पैक्सटन का समर्थन करने वाली एक राजनीतिक कार्रवाई समिति ने लगभग 7.8 मिलियन डॉलर खर्च किए, जिससे औसत दर्शक तक अनुमानित 81 बार पहुंच बनी। तीन गुने से अधिक खर्च के बावजूद विज्ञापनों की पहुंच केवल करीब 70% ज्यादा रही।
विज्ञापन दरें बढ़ने पर पैक्सटन के समर्थकों ने राष्ट्रीय स्तर पर प्रसारित खेल आयोजनों के दौरान विज्ञापन खरीदना शुरू किया। इसका मकसद टेक्सास के पर्याप्त मतदाताओं तक पहुंचना था, वह भी राज्य के हर बाजार में अलग-अलग प्रसारण समय खरीदने से कम लागत पर। 5 अक्टूबर को टेक्सास के रिपब्लिकन सीनेटर जॉन कॉर्निन ने X पर लिखा कि पार्टी की वित्तीय बढ़त दिखने जितनी बड़ी नहीं थी।
Cook Political Report ने 1 अक्टूबर को सीनेट के नौ अहम मुकाबलों की पहचान की थी। 30 सितंबर तक रिपब्लिकन सात राज्यों में प्रसारण टीवी विज्ञापन पर डेमोक्रेट से आगे थे। उनका कुल खर्च 26% अधिक था, लेकिन विज्ञापनों की संख्या केवल 7% ज्यादा थी। डिजिटल विज्ञापनों में सुपर PAC और उम्मीदवारों के बीच कीमत का अंतर कम है, लेकिन टीवी अब भी बड़ा माध्यम है। इस चुनाव चक्र में कुल विज्ञापन खर्च का 48% टीवी पर जाने का अनुमान है।
नकारात्मक विज्ञापनों से सीनेट सर्वेक्षणों में बड़ा बदलाव नहीं
टेक्सास प्राइमरी के बाद से तालारिको को निशाना बनाने वाले हमलावर विज्ञापनों पर 113 मिलियन डॉलर से अधिक खर्च हो चुका है। इसके बावजूद अक्टूबर में जारी Siena College के सर्वेक्षण में वह पैक्सटन से 48% के मुकाबले 44% से आगे थे। यह अंतर सितंबर के सर्वेक्षण से केवल थोड़ा कम था, जब तालारिको की बढ़त छह अंक थी।
मिशिगन में भी कुछ ऐसा ही रुझान दिखा। इस साल डेमोक्रेट अब्दुल अल-सैयद के खिलाफ हमलावर विज्ञापनों पर 87 मिलियन डॉलर से अधिक खर्च किए गए हैं। सितंबर के आखिर में आए Fox News के सर्वेक्षण में पंजीकृत मतदाताओं के बीच अल-सैयद की अनुकूलता अगस्त की शुरुआत से पांच अंक बढ़ी थी, जबकि रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स की अनुकूलता चार अंक घटी थी।
विज्ञापन विशेषज्ञों का कहना है कि चुनाव के दिन करीब आने पर उन्हीं मतदाताओं को बार-बार विज्ञापन दिखाने का असर घटने लगता है, जिन्हें मनाने की कोशिश की जा रही हो। राजनीतिक वित्त सुधार समूह Issue One के प्रमुख माइकल बेकल ने कहा कि जो मतदाता एक दिन में पहले ही 20 नकारात्मक विज्ञापन देख चुका है, वह 21वें विज्ञापन से शायद प्रभावित न हो और उसे नजरअंदाज कर सकता है।
रिपब्लिकन का कहना है कि सर्वेक्षणों में बढ़त का अंतर उनके खर्च का पूरा असर नहीं दिखाता। उनके मुताबिक, सितंबर में देर से आई धनराशि ने बिगड़ते राजनीतिक माहौल के बावजूद कुछ उम्मीदवारों को मुकाबले में बनाए रखा। टेक्सास के सीनेट चुनाव में रिपब्लिकन ने सितंबर में 121.5 मिलियन डॉलर खर्च किए, जबकि इससे पहले के तीन महीनों में कुल खर्च 5.5 मिलियन डॉलर था। मस्क के America PAC ने डाक से प्रचार और घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क करने के अभियान भी बढ़ाए। इस मुकाबले से जुड़े एक रिपब्लिकन ने कहा कि इस खर्च से पैक्सटन आगे नहीं आए, लेकिन एक कठिन मुकाबले को ऐसी स्थिति में जाने से रोका जहां जीतना असंभव हो जाता।
मेन का सीनेट मुकाबला भी चुनावी खर्च की एक और कसौटी है। रिपब्लिकन ने मौजूदा सीनेटर सुसान कॉलिन्स के समर्थन में 50 मिलियन डॉलर से अधिक लगाए हैं—यह डेमोक्रेटिक खर्च का करीब दोगुना है। सितंबर की शुरुआत से FiveThirtyEight के सर्वेक्षण औसत में डेमोक्रेट ट्रॉय जैक्सन की बढ़त करीब तीन अंक से घटकर लगभग दो अंक रह गई है।
रिपब्लिकन का खर्च अब सीटों की रक्षा पर केंद्रित
रणनीति में सबसे स्पष्ट बदलाव उन सीटों की ओर धन मोड़ना है जिन्हें पहले अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता था। अप्रैल में Senate Leadership Fund ने सीनेट में बहुमत बचाने और पार्टी की पहुंच बढ़ाने के लिए आठ राज्यों में विज्ञापन पर रिकॉर्ड 342 मिलियन डॉलर खर्च करने की योजना घोषित की थी। टेक्सास, कंसास और नेब्रास्का उस सूची में नहीं थे। लेकिन 1 सितंबर से इस समूह और उससे जुड़े संगठनों ने इन तीन राज्यों में करीब 180 मिलियन डॉलर खर्च किए हैं या खर्च के लिए प्रतिबद्ध किए हैं। 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप ने तीनों राज्यों में दोहरे अंकों के अंतर से जीत दर्ज की थी।
Issue One के बेकल ने कहा कि बाहरी समूह रिपब्लिकन की रक्षा मजबूत करने के लिए लाखों डॉलर उन राज्यों में भेज रहे हैं जहां पार्टी का दबदबा है। इससे कुछ ऐसी सीटों के लिए चुनाव के आखिरी चरण में पर्याप्त धन नहीं बच रहा, जिन्हें रिपब्लिकन चुनौती देना चाहते थे। यह बदलाव नॉर्थ कैरोलाइना में साफ दिखता है। Senate Leadership Fund ने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइकल व्हाटली के समर्थन में पहले 71 मिलियन डॉलर देने का वादा किया था, लेकिन करीब 32.8 मिलियन डॉलर खर्च करने के बाद 2 अक्टूबर को उसने विज्ञापनों की बाकी बुकिंग का बड़ा हिस्सा रद्द कर दिया। सर्वेक्षण औसत में डेमोक्रेट रॉय कूपर अब भी दोहरे अंकों से आगे हैं। यह वापसी इसलिए भी उल्लेखनीय है कि 2008 से रिपब्लिकन ने राज्य के हर राष्ट्रपति और सीनेट चुनाव में जीत हासिल की है।
प्रतिनिधि सभा के लिए खर्च में भी फेरबदल हो रहा है। इसी सप्ताह Congressional Leadership Fund ने न्यू जर्सी के रिपब्लिकन प्रतिनिधि थॉमस कीन जूनियर और आयोवा की प्रतिनिधि मैरियानेट मिलर-मीक्स का समर्थन बंद कर दिया। समूह ने मिशिगन की प्रतिनिधि क्रिस्टन मैकडॉनल्ड रिवेट और ओहायो के प्रतिनिधि ग्रेग लैंड्समैन की सीटों को चुनौती देने की योजनाएं भी छोड़ दीं। 14 अक्टूबर तक इन चार मुकाबलों में समूह करीब 13.7 मिलियन डॉलर लगा चुका था। अब करीब 10 मिलियन डॉलर को 16 अन्य जिलों में भेजा जा रहा है, जिनमें दक्षिण टेक्सास का वह जिला भी शामिल है जिसका प्रतिनिधित्व रिपब्लिकन प्रतिनिधि मोनिका डे ला क्रूज़ करती हैं।
Cook Political Report के आकलन में डेमोक्रेट के प्रतिनिधि सभा का नियंत्रण हासिल करने की संभावना अधिक है, जबकि सीनेट में मुकाबला अब भी करीबी है। रिपब्लिकन अपने संसाधनों का बड़ा हिस्सा सीटें बचाने में लगा रहे हैं, इसलिए विस्तार की उनकी योजनाएं सिमट रही हैं। क्या बचे हुए विज्ञापन मतदाताओं की राय बदल पाएंगे, इसका जवाब मतपेटियों से मिलेगा।