अमेरिकी सरकार ने Microsoft, Adobe और कई प्रौद्योगिकी तथा IT सेवा कंपनियों को स्थायी श्रम प्रमाणन यानी PERM कार्यक्रम से निलंबित कर दिया है। यह उन योग्य विदेशी कर्मचारियों के लिए अमेरिका में स्थायी निवास पाने का एक सामान्य मार्ग है। मौजूदा H-1B वीजा धारक सीधे तौर पर प्रभावित नहीं हुए हैं, लेकिन इस नीति बदलाव से तकनीकी प्रतिभाओं को बनाए रखने की कोशिश कर रही कंपनियों के सामने अनिश्चितता बढ़ गई है। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि अमेरिका कृत्रिम बुद्धिमत्ता विशेषज्ञों को आकर्षित करने की अपनी क्षमता कितने समय तक बनाए रख पाएगा।
Microsoft और Adobe समेत कंपनियां PERM निलंबन के दायरे में
निलंबन से प्रभावित कंपनियों में Microsoft (Nasdaq: MSFT), Adobe (Nasdaq: ADBE), Cognizant Technology Solutions (Nasdaq: CTSH), Infosys (NYSE: INFY), Tata Consultancy Services, Wipro (NYSE: WIT), HCL Technologies और Capgemini शामिल हैं। PERM वह श्रम प्रमाणन प्रक्रिया है जिसका इस्तेमाल नियोक्ता कुछ विदेशी कर्मचारियों के लिए अमेरिकी स्थायी निवास आवेदन के तहत करते हैं।
इस निलंबन से प्रभावित कर्मचारियों की मौजूदा H-1B स्थिति रद्द नहीं होती। हालांकि, अस्थायी कार्य अनुमति से स्थायी निवास की ओर बढ़ने वाला एक आम रास्ता अवरुद्ध हो जाता है। वैश्विक स्तर पर नियुक्तियां कर शोध एवं विकास टीम बनाने वाली टेक कंपनियों के लिए कर्मचारियों की लंबे समय तक अमेरिका में रहने की क्षमता केवल भर्ती का विषय नहीं है। इसका असर प्रतिभा विकास, टीम की स्थिरता और शोध परियोजनाओं के समय-निर्धारण पर भी पड़ सकता है।
विदेशी कर्मचारियों की नीतियां AI शोध क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं
Envorso के संस्थापक साझेदार Todd Warren ने कहा कि H-1B मार्ग पर कड़े प्रतिबंध कंपनियों के लिए मुश्किलें बढ़ा सकते हैं और कुछ नियुक्तियों को विदेश ले जाने का प्रोत्साहन दे सकते हैं। उनके अनुसार, यदि अमेरिका में शिक्षित तकनीकी कर्मचारी वहीं अपना करियर आगे नहीं बढ़ा पाते, तो उनमें से कुछ अमेरिकी श्रम बाजार में प्रवेश करने के बजाय अपने मूल देशों में लौट सकते हैं।
Warren ने यह भी कहा कि डेवलपर्स की मांग 2022 के शिखर से काफी घट चुकी है। बड़ी टेक कंपनियां अपने कुछ खर्च को श्रम से हटाकर डेटा सेंटर और AI इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर ले जा रही हैं। इससे नीति बदलाव का अल्पकालिक भर्ती प्रभाव सीमित हो सकता है, लेकिन कुशल कर्मचारियों की उपलब्धता को लेकर दीर्घकालिक चिंता खत्म नहीं होती।
Mahoney Asset Management के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी Ken Mahoney ने कहा कि इस नीति का बड़ी टेक कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन पर तत्काल महत्वपूर्ण असर पड़ने की संभावना कम है। उनके मुताबिक, लंबे समय में नवाचार और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर नजर रखना अधिक महत्वपूर्ण होगा। Mahoney ने Nvidia के मुख्य कार्यकारी Jensen Huang और AMD की मुख्य कार्यकारी Lisa Su का उदाहरण दिया, दोनों प्रवासी पृष्ठभूमि वाले नेता हैं और सेमीकंडक्टर उद्योग में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।
H-1B प्रतिबंधों से शोध एवं विकास की योजना पर अनिश्चितता
Mahoney के अनुसार, यदि प्रतिबंधों का दायरा बढ़ता है या वे लंबे समय तक लागू रहते हैं, तो कंपनियों की भर्ती लागत बढ़ सकती है और शोध टीमों या परियोजनाओं को विदेशों में स्थानांतरित करने का प्रोत्साहन मजबूत हो सकता है। व्हाइट हाउस ने कुछ H-1B गैर-आप्रवासी कर्मचारियों पर लक्षित प्रवेश प्रतिबंधों को सितंबर 2027 तक पहले ही बढ़ाया है। संबंधित आवेदनों में आम तौर पर 100,000 डॉलर का भुगतान शामिल होता है, हालांकि नियमों में कुछ अपवाद भी दिए गए हैं।
Microsoft, Nvidia (Nasdaq: NVDA) और Broadcom (Nasdaq: AVGO) जैसी कंपनियों के लिए मुद्दा केवल यह नहीं है कि वे डेवलपर्स की भर्ती जारी रख पाएंगी या नहीं। सवाल यह भी है कि क्या अमेरिका AI शोधकर्ताओं, इंजीनियरों और संस्थापकों के लिए सुविधाजनक आधार बना रहेगा। प्रतिभा संबंधी नीतियों में बदलाव का असर तिमाही नतीजों में तुरंत दिखाई नहीं दे सकता। भर्ती लागत, विदेशों में R&D विस्तार और प्रतिभाओं की उपलब्धता पर प्रबंधन की टिप्पणियां यह संकेत पहले दे सकती हैं कि कंपनियां इस स्थिति के अनुसार किस तरह प्रतिक्रिया दे रही हैं।