व्हाइट हाउस के रूस को नए टैरिफ और प्रतिबंधों से बाहर रखने के फैसले ने रिपब्लिकन पार्टी के भीतर मतभेद उजागर कर दिए हैं। कुछ सांसदों का कहना है कि यह कदम पिछले महीने कांग्रेस में व्यापक समर्थन से पारित कानून की अवहेलना करता है और मॉस्को पर दबाव कम कर सकता है। राष्ट्रपति ने इस छूट का सार्वजनिक रूप से बचाव किया है।
रिपब्लिकन सांसदों ने छूट पर उठाए सवाल
विवाद का केंद्र कार्यपालिका और कांग्रेस के बीच अधिकारों का संतुलन तथा रूस के प्रति अमेरिकी नीति की दिशा है। आलोचक रिपब्लिकन सांसदों का तर्क है कि कांग्रेस ने हाल ही में रूस के खिलाफ नए प्रतिबंधों को मंजूरी दी थी, लेकिन प्रशासन ने इसके बाद इन उपायों से छूट देकर सांसदों की व्यक्त इच्छा को लागू नहीं किया। यह विधेयक पिछले महीने कांग्रेस में दोनों दलों के व्यापक समर्थन से पारित हुआ था।
रिपब्लिकन सांसदों ने यह भी चेतावनी दी है कि रूस पर प्रतिबंधों में ढील से मॉस्को को लाभ मिल सकता है और यूक्रेन में जारी युद्ध के प्रति अमेरिकी नीति प्रभावित हो सकती है। उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि छूट किन टैरिफ या प्रतिबंधों पर लागू होती है। इसके दायरे और अवधि का भी विवरण सामने नहीं आया है, इसलिए इसके तत्काल आर्थिक प्रभाव का आकलन करना अभी संभव नहीं है।
प्रतिबंधों के अमल और व्यापार उपायों पर टकराव
विवाद में रूस से जुड़े प्रतिबंध और टैरिफ, दोनों शामिल हैं। प्रतिबंधों से छूट का मतलब है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंध व्यवहार में किस तरह लागू होंगे, जबकि टैरिफ संबंधी व्यवस्था रूस से जुड़ी व्यापारिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है। कांग्रेस और प्रशासन के बीच अमल को लेकर असहमति ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि ये उपाय आगे कितने समय तक प्रभावी रहेंगे।
रिपब्लिकन आलोचकों के सटीक बयान सार्वजनिक नहीं किए गए हैं और प्रशासन ने छूट देने के विस्तृत कारण भी नहीं बताए हैं। इतना स्पष्ट है कि रिपब्लिकन सांसदों ने फैसले का विरोध किया है, जबकि राष्ट्रपति ने इसका सार्वजनिक बचाव किया है। छूट के दायरे, उसके अमल और कांग्रेस की संभावित अगली प्रतिक्रिया से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी अभी जारी नहीं हुई है।