ड्रोन क्षेत्र में अमेरिकी सुरक्षा के लिए नई आयात दरों की घोषणा
13 अगस्त 2026 को, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ड्रोन और उनके महत्वपूर्ण पुर्जों पर नई आयात दरें लागूं करने का ऐलान किया। यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा खतरों को रोकने और अमेरिकी ड्रोन विनिर्माण उद्योग को घरेलू आधार पर पुनःस्थापित करने की दिशा में एक रणनीतिक पहल है। इस आदेश के मुताबिक, बड़े ड्रोन और जो विशिष्ट सुरक्षा तकनीकों से लैस हैं, उनके साथ जुड़े पुर्जों पर 100% आयात दर लगाई जाएगी।
नई दरों के अंतर्गत 25 किलो से अधिक उठान क्षमता वाले या थर्मल इमेजिंग जैसी सुरक्षा सुविधाओं वाले ड्रोन पर भारी आयात शुल्क लगने का प्रावधान है। इसके अलावा, छोटे मॉडल ड्रोन और सामान्य पुर्जों पर 25% दर, और यूरोपीय संघ, जापान, लिकटेंस्टीन, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड, एवं ताइवान से आने वाले ड्रोन और पुर्जों पर 15% दर लागू होगी। ब्रिटेन से आने वाले उत्पादों पर 10% दर लागू होगी, बशर्ते कि इनका मुख्य तकनीकी और हार्डवेयर स्रोत उक्त देशों या अमेरिका हो।
प्रशासन ने वाणिज्य मंत्री को देश में ड्रोन उत्पादन को बढ़ावा देने वाले निवेश योजनाओं को लॉन्च करने का अधिकार दिया। ये सभी दरें 4 सितंबर 2026 से प्रभावी होंगी, जबकि गैर-संवेदनशील ड्रोन पुर्जों पर 180 दिनों के बाद यह दरें लागू होंगी। रक्षा मंत्रालय कुछ विशिष्ट उत्पादों को इस दर से मुक्त रखने का प्रावधान करेगा, जो 180 दिनों के बाद लागू होगा।
रक्षा ड्रोन निर्माता कंपनियों के शेयर में सुधार
नये आयात शुल्कों के प्रभाव से 14 अगस्त 2026 को अमेरिकी स्टॉक मार्केट में रक्षा ड्रोन निर्माता कंपनियों के शेयरों में तेजी देखी गई। Unusual Machines (UMAC) के शेयर लगभग 12% तक बढ़े। AeroVironment के शेयरों में भी खरीदारी बढ़ी, क्योंकि निवेशक मानते हैं कि घरेलू निर्माता कंपनियों की मांग में वृद्धि संभव है।
इसके विपरीत, मुख्य रूप से व्यावसायिक ड्रोन और हवाई टैक्सी प्रदाता कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई, क्योंकि बाजार को इन पर लागत बढ़ने और निर्यात प्रतिबंधों का डर है। नई नीति ने ड्रोन उद्योग की आपूर्ति श्रृंखलाओं में बदलाव की उम्मीदें तेज कर दी हैं। कुछ कंपनियों के लिए यह अवसर और निवेश का मौका साबित हो सकता है, लेकिन साथ ही लागत में वृद्धि और बाजार अस्थिरता की भी आशंका है।
नीति के उद्देश्य और प्रभाव
यह आयात दर रणनीति अमेरिकी सरकार की ड्रोन सेक्टर की सुरक्षा एवं आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने की नीति का हिस्सा है। भारी आयात शुल्क तकनीकी संवेदनशीलता के जोखिम को सीमित करने के साथ, घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करता है। वाणिज्य मंत्री इस रणनीति के क्रियान्वयन के लिए कदम उठाएंगे, जिनके विस्तृत पहलुओं को आने वाले महीनों में स्पष्ट किया जाएगा।
निवेशक दृष्टिकोण से, रक्षा ड्रोन निर्माताओं को नीति से स्पष्ट लाभ होने की उम्मीद है, जबकि व्यावसायिक ड्रोन कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं पर निर्भर इकाइयों को प्रभाव का सामना करना पड़ेगा। नीति के लागू होने के बाद छूट प्रावधान और प्रदर्शन मुख्य ध्यान केंद्र होंगे, खासकर जब वैश्विक व्यापार परिदृश्य में अस्थिरता बनी हुई है। ड्रोन उद्योग की सुरक्षा और परिचालन दक्षता दोनों पर इसका असर निवेशकों और नियामकों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।