अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य और कूटनीतिक गतिरोध संयुक्त राष्ट्र महासभा से पहले और तेज हो गया है। ईरान की सेना ने चेतावनी दी है कि अमेरिका की किसी नई कार्रवाई के जवाब में मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों और हितों पर लगातार हमले किए जाएंगे। वहीं, वॉशिंगटन तेहरान पर समझौते के लिए दबाव बनाए हुए है और ईरान की अर्थव्यवस्था या नेतृत्व के खिलाफ आगे की कार्रवाई की धमकी दे रहा है। इस तनाव से होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों, वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति और ऊर्जा कीमतों को लेकर बाजार की चिंता बढ़ी है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा से पहले वॉशिंगटन-तेहरान की धमकियां
अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाल में कहा कि यदि तेहरान समझौते को स्वीकार नहीं करता है, तो वॉशिंगटन ईरान की अर्थव्यवस्था को नष्ट करने और उसके नेतृत्व को निशाना बनाने की कोशिश कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मुलाकात की संभावना से उन्होंने इनकार नहीं किया है। हालांकि, सैन्य अभियान का विस्तार किया जाएगा या नहीं, इस पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है।
ईरान के खात्म अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर्स ने कहा कि खुफिया जानकारी से संकेत मिलता है कि अमेरिका और उसके सहयोगी बड़े पैमाने पर नए हमले की तैयारी कर सकते हैं। उसने चेतावनी दी कि ऐसी कार्रवाई का समर्थन करने वाले क्षेत्रीय देशों को संघर्ष में शामिल पक्ष माना जा सकता है। बयान में कहा गया कि यदि अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करता है, तो पूरे मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकाने और हित जवाबी कार्रवाई का लक्ष्य बनेंगे।
धमकियों का यह ताजा आदान-प्रदान सात महीने से चले आ रहे संघर्ष के बाद हुआ है। जून में हुआ समझौता ज्ञापन अब समाप्त हो चुका है, जबकि ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए न्यूयॉर्क जाने वाला है। पेजेशकियन के भी इस बैठक के दौरान कई विदेशी नेताओं से मिलने की उम्मीद है। ऊर्जा आपूर्ति के परिदृश्य का आकलन कर रहे बाजारों के लिए यह महत्वपूर्ण सवाल बन गया है कि क्या कूटनीतिक संपर्क दोबारा शुरू हो सकते हैं।
हूती हमले से खाड़ी की सुरक्षा चिंता बढ़ी
अमेरिकी विदेश विभाग ने सुरक्षा चेतावनी जारी कर अमेरिकी नागरिकों से मध्य पूर्व में अचानक तनाव बढ़ने की स्थिति के लिए तैयार रहने को कहा है। इसमें उड़ानें रद्द होने और हवाई क्षेत्र बंद किए जाने की संभावनाएं भी शामिल हैं।
यह चेतावनी ईरान समर्थित हूती आंदोलन के उस दावे के बाद आई कि उसने शनिवार को सऊदी अरब की राजधानी रियाद पर मिसाइल और ड्रोन हमला किया। जुलाई में संघर्ष बढ़ने के बाद यह पहली बार था जब शहर में हवाई हमले के सायरन सुनाई दिए। सऊदी अरब ने कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणालियों ने एक बैलिस्टिक मिसाइल को रोककर नष्ट कर दिया। किसी के हताहत होने या संपत्ति के नुकसान की सूचना नहीं है।
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने कहा कि हूतियों ने सऊदी अरब के कई हिस्सों में नागरिकों और बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाने की कोशिश की, लेकिन सऊदी वायु रक्षा ने हमलों को रोक दिया। ऐसे हमले जारी रहने पर खाड़ी क्षेत्र में टैंकर मार्गों, बंदरगाह सुविधाओं तथा बीमा और माल ढुलाई लागत पर असर पड़ सकता है।
तेल कीमतों में नरमी, लेकिन आपूर्ति की कमी कायम
क्षेत्रीय संघर्ष बढ़ने के बावजूद हाल के कारोबारी सत्रों में अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में गिरावट आई है। कारोबारियों को उम्मीद है कि सऊदी अरब और अन्य उत्पादक देशों से ऊर्जा आपूर्ति धीरे-धीरे बहाल हो सकती है। नवीनतम सत्र में ब्रेंट क्रूड वायदा 1.7% गिरकर 102.15 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट वायदा 1.8% गिरकर 98.46 डॉलर प्रति बैरल रहा।
यूरेशिया ग्रुप की विश्लेषण टीम ने कहा कि यदि अमेरिका होर्मुज़ जलडमरूमध्य के रास्ते कच्चे तेल की आवाजाही सुगम बनाने में प्रगति भी करता है, तब भी कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं। टीम के मुताबिक, अतिरिक्त आपूर्ति बाजार में मौजूद व्यापक कमी को पूरी तरह दूर करने के लिए पर्याप्त नहीं होगी। उसने अनुमान जताया कि इस साल के बाकी समय में ब्रेंट 90 से 110 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में कारोबार कर सकता है।
ईरान पहले कह चुका है कि जब तक अमेरिका जून के समझौता ज्ञापन में किए गए वादों को पूरा नहीं करता, तब तक वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य को दोबारा नहीं खोलेगा। इन वादों में ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकाबंदी हटाना, प्रतिबंधों में ढील देना, ईरान की जमा परिसंपत्तियों को मुक्त करना और अमेरिकी सैन्य धमकियां समाप्त करना शामिल है।
होर्मुज़ से गुजरने वाला यातायात बना मुख्य बाजार संकेतक
ईरानी नेतृत्व प्रतिरोध पर जोर दे रहा है, जबकि देश के भीतर सैन्य कार्रवाई और कूटनीतिक वार्ता को लेकर मतभेद बने हुए हैं। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गलीबाफ ने कहा कि दबाव का रुख बदलने के लिए ईरान को एक साथ संघर्ष और वार्ता, दोनों जारी रखने की जरूरत है। उनके अनुसार, कूटनीतिक प्रयास तभी अधिक प्रभावी होंगे जब ईरान को युद्धक्षेत्र में बढ़त हासिल होगी।
ऊर्जा बाजारों के लिए अगला चरण केवल तेल क्षेत्रों के उत्पादन पर निर्भर नहीं करेगा। होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले यातायात का स्तर, टैंकरों पर हमलों का जोखिम और खाड़ी देश स्थिर निर्यात बनाए रख पाते हैं या नहीं—ये सभी कारक महत्वपूर्ण होंगे। यदि ईरान क्षेत्रीय सशस्त्र समूहों और टैंकरों को निशाना बनाने वाली कार्रवाइयों के जरिए जहाजरानी को प्रभावित करता रहता है, तो व्यवधान के जोखिम से कच्चे तेल की कीमतों को सहारा मिल सकता है। इसके विपरीत, कूटनीतिक संपर्क बहाल होने और जहाजरानी सामान्य होने पर कीमतों पर फिर गिरावट का दबाव बन सकता है। बाजार संयुक्त राष्ट्र महासभा में बैठकों के कार्यक्रम, क्षेत्रीय हमलों के विस्तार और तेहरान के प्रति वॉशिंगटन के अगले कदम पर नजर रख रहा है।