सोमवार को तेल कीमतों में गिरावट आई। कारोबारी यह आकलन कर रहे हैं कि मिसाइल और ड्रोन हमलों से सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन प्रणाली बाधित होने के बाद देश से कच्चे तेल का निर्यात धीरे-धीरे सामान्य हो पाएगा या नहीं। क्षेत्रीय भू-राजनीतिक तनाव के अनुपात में आपूर्ति में कमी नहीं आई है, जिससे निकट अवधि में कीमतों पर दबाव बना हुआ है। फिलहाल बाजार का रुख मुख्य रूप से समुद्री परिवहन की स्थिति और मध्य पूर्व से जुड़ी घटनाओं से तय हो रहा है।
नवंबर डिलीवरी वाले ब्रेंट क्रूड वायदा का भाव 1.66% गिरकर 102.15 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि अक्टूबर डिलीवरी वाले वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) वायदा में 1.83% की गिरावट आई और यह 98.46 डॉलर प्रति बैरल पर रहा। कारोबार के दौरान ICE ब्रेंट 101.76 डॉलर प्रति बैरल तक फिसला, जो 2.11 डॉलर या 2.03% की कमी थी। WTI 98.17 डॉलर तक गिरा, यानी 2.13 डॉलर या 2.12% नीचे। अलग-अलग कोट के समय और अनुबंध की स्थिति से पता चलता है कि बाजार में कीमतों में बदलाव कितनी तेजी से हो रहा है।
मध्य पूर्व से कच्चे तेल का प्रवाह अनुमान से बेहतर
18 सितंबर की एक रिपोर्ट में JPMorgan के विश्लेषकों ने कहा कि सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन में व्यवधान के बावजूद मध्य पूर्व से कच्चे तेल का प्रवाह “आश्चर्यजनक रूप से मजबूत” बना हुआ है। पिछले 10 दिनों में क्षेत्र से कच्चे तेल का औसत प्रवाह 1.71 करोड़ बैरल प्रतिदिन रहा, जो 2025 के औसत से 61 लाख बैरल प्रतिदिन कम है।
आंकड़े बताते हैं कि क्षेत्रीय आपूर्ति प्रभावित हुई है, लेकिन वैकल्पिक मार्गों या शिपिंग व्यवस्थाओं के जरिए पर्याप्त मात्रा में कच्चा तेल अब भी बाजार तक पहुंच रहा है। कारोबारियों के लिए हमले से ज्यादा महत्वपूर्ण वास्तविक लोडिंग, बंदरगाहों का संचालन और निर्यात बहाली की गति हो सकती है, क्योंकि इन्हीं से निकट अवधि में आपूर्ति की कमी का वास्तविक आकार तय होगा।
सऊदी हमलों से परिवहन जोखिम फिर केंद्र में
शनिवार को ईरान समर्थित हूती बलों ने मिसाइलों और ड्रोन से सऊदी अरब पर हमला किया। बाजार अब भी यह परख रहा है कि इस घटना से सऊदी उत्पादन, पाइपलाइन परिवहन या बंदरगाहों पर तेल लोडिंग में और व्यवधान आएगा या नहीं। ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन सऊदी अरब के पूर्वी तेल उत्पादक क्षेत्र को पश्चिमी तट के बंदरगाहों से जोड़ती है। इसका संचालन इस बात पर सीधे असर डालता है कि बाधित समुद्री मार्गों से बचते हुए देश कितना कच्चा तेल निर्यात कर सकता है।
इसी बीच, अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध तथा समुद्री परिवहन पर लागू संबंधित प्रतिबंधों से आपूर्ति बाधित होने की चिंता बढ़ रही है। अगर समुद्री परिवहन की स्थिति बिगड़ती है या निर्यात बहाल होने में देरी होती है, तो भौतिक तेल बाजार में फिर से कसाव आ सकता है। इसके विपरीत, यदि प्रवाह अपेक्षाकृत स्थिर रहता है, तो तेल कीमतों में शामिल भू-राजनीतिक प्रीमियम कम हो सकता है।
निर्यात बहाली की गति पर टिकी कीमतें
स्काई लिंक्स कैपिटल ग्रुप के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी डेनियल तकिएद्दीन ने कहा कि तेल कीमतों की अगली दिशा निर्यात बहाली की गति और कूटनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर रहने की संभावना है। उनके अनुसार, यदि तनाव फिर बढ़ता है या समुद्री परिवहन की स्थिति खराब होती है, तो भौतिक बाजार में आपूर्ति कस सकती है और कीमतों पर दोबारा ऊपर की ओर दबाव बन सकता है।
बाजार इस समय दो परस्पर विरोधी संकेतों को तौल रहा है। मध्य पूर्व से कच्चे तेल का प्रवाह सामान्य स्तर से नीचे है, सऊदी अरब का प्रमुख परिवहन ढांचा बाधित हुआ है और समुद्री सुरक्षा से जुड़े जोखिम समाप्त नहीं हुए हैं। फिर भी, पिछले 10 दिनों में 1.71 करोड़ बैरल प्रतिदिन का औसत प्रवाह दिखाता है कि आपूर्ति पूरी तरह बंद नहीं हुई है। कारोबारी सऊदी निर्यात की बहाली, क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा और कूटनीतिक घटनाक्रम पर नजर रखेंगे, ताकि यह पता चल सके कि आपूर्ति की कमी घटती रहेगी या फिर दोबारा बढ़ने लगेगी।