अमेरिका के सबसे बड़े खाद्य खुदरा कर्मचारी संघ UFCW ने नवनिर्वाचित डेमोक्रेट सांसदों से किराना दुकानों में इलेक्ट्रॉनिक शेल्फ लेबल और उपभोक्ताओं के निजी डेटा के आधार पर कीमतें तय करने पर सीमाएं लगाने का आग्रह किया है। संघ का कहना है कि इन तरीकों का असर किराने के सामान की वहनीयता और खुदरा क्षेत्र की नौकरियों पर पड़ सकता है। खुदरा कंपनियों का तर्क है कि डिजिटल लेबल से कीमतें बदलना अधिक तेज और सटीक होता है।
UFCW ने दोनों मूल्य निर्धारण तरीकों पर रोक की मांग की
UFCW 12 लाख से अधिक कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करता है। मध्यावधि चुनाव में श्रमिक संगठनों के समर्थन वाले उम्मीदवारों की जीत पर जारी बयान में संघ ने सांसदों से किराना दुकानों को इलेक्ट्रॉनिक शेल्फ लेबल और उपभोक्ता डेटा-आधारित मूल्य निर्धारण अपनाने से रोकने की अपील की।
UFCW के अध्यक्ष मिल्टन जोन्स ने कहा कि सांसदों को निगरानी-आधारित मूल्य निर्धारण और किराना दुकानों में इलेक्ट्रॉनिक लेबल पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। उनके मुताबिक, इससे उपभोक्ताओं को कंपनियों की अनुचित मूल्य नीतियों से बचाया जा सकेगा। संघ ने इस अभियान को खाद्य पदार्थों की वहनीयता और खुदरा नौकरियों के संरक्षण से जोड़ा है।
FTC ने बड़ी किराना कंपनियों से मांगी मूल्य संबंधी जानकारी
वॉलमार्ट और क्रोगर समेत कई खुदरा कंपनियां कागजी शेल्फ टैग की जगह डिजिटल लेबल लगा रही हैं। इन्हें दूर से अपडेट किया जा सकता है, इसलिए हर टैग को अलग-अलग बदलने की जरूरत नहीं रहती। इस साल इस तकनीक पर चर्चा तेज हुई है। बहस का एक अहम पहलू यह है कि कंपनियां उपभोक्ताओं का डेटा किस तरह इस्तेमाल करती हैं और क्या डिजिटल लेबल से कीमतों में बदलाव की आवृत्ति बढ़ सकती है।
पिछले सप्ताह संघीय व्यापार आयोग (FTC) ने कहा कि उसने कई बड़ी किराना कंपनियों से उनकी मूल्य निर्धारण नीतियों पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। FTC के अध्यक्ष एंड्रयू एन. फर्ग्यूसन ने कहा कि उपभोक्ताओं को यह जानने का अधिकार है कि कंपनियां वेब ब्राउज़िंग की आदतों या अन्य निजी जानकारी का इस्तेमाल यह अनुमान लगाने के लिए करती हैं या नहीं कि कोई ग्राहक अधिकतम कितनी कीमत चुकाने को तैयार होगा।
न्यू जर्सी और मैरीलैंड के नियम अलग-अलग
कुछ राज्यों ने इन तरीकों के कुछ पहलुओं पर पहले ही पाबंदियां लगाई हैं। न्यू जर्सी ने इस साल निगरानी-आधारित मूल्य निर्धारण पर प्रतिबंध लगाया और इलेक्ट्रॉनिक शेल्फ लेबल के इस्तेमाल पर एक साल की रोक लगाई। मैरीलैंड में खुदरा कंपनियों को कीमतें कम से कम एक कारोबारी दिन तक स्थिर रखनी होती हैं।
इन नियमों का दायरा एक जैसा नहीं है। कुछ कानून कीमत तय करने में निजी जानकारी के इस्तेमाल पर केंद्रित हैं, जबकि कुछ कीमतों में बदलाव की आवृत्ति या इलेक्ट्रॉनिक लेबल के उपयोग को नियंत्रित करते हैं। FTC की ओर से कंपनियों से जानकारी मांगने के बाद मूल्य निर्धारण में उपभोक्ता डेटा के इस्तेमाल पर संघीय स्तर पर भी जांच बढ़ी है।
वॉलमार्ट और टारगेट ने निजी डेटा से कीमत बढ़ाने से किया इनकार
खुदरा कंपनियां इन तकनीकों का बचाव करते हुए कहती हैं कि उनसे श्रम-साध्य काम और मूल्य निर्धारण की गलतियां घटती हैं, जबकि कीमतें निष्पक्ष और पारदर्शी रहती हैं। वॉलमार्ट और टारगेट ने पिछले महीने कहा था कि वे उपभोक्ताओं से अधिक कीमत वसूलने के लिए निजी जानकारी का इस्तेमाल नहीं करते और ऐसा करने की उनकी योजना भी नहीं है।
हालांकि, दोनों कंपनियां प्रचार अभियानों और लॉयल्टी कार्यक्रमों के जरिए व्यक्तिगत छूट देती हैं। इलेक्ट्रॉनिक शेल्फ लेबल, डेटा-आधारित मूल्य निर्धारण और सदस्यता से मिलने वाले ऑफर अलग-अलग मूल्य तंत्र हैं। UFCW की मांगों, राज्यों के नियमों और FTC द्वारा जुटाई जा रही जानकारी ने खुदरा कंपनियों की कीमत तय करने और उन्हें प्रदर्शित करने के तरीके को नीतिगत बहस के केंद्र में ला दिया है।