वॉलमार्ट को हाल में मिले कीमत निर्धारण से जुड़े दो पेटेंटों ने निगरानी-आधारित मूल्य निर्धारण और ग्राहकों के लिए अलग-अलग कीमत तय करने को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। पेटेंट दस्तावेजों में ऐसे सिस्टम का विवरण है जो मांग के अनुमान, पिछली खरीद और कीमतों पर ग्राहकों की प्रतिक्रिया के आधार पर उत्पादों की कीमत बदल सकते हैं। हालांकि, फिलहाल ऐसा कोई सबूत नहीं है कि वॉलमार्ट ग्राहकों की निजी जानकारी के आधार पर अलग-अलग लोगों से अलग कीमत वसूल रहा है। कंपनी का कहना है कि पेटेंट मिलना इस बात का प्रमाण नहीं है कि तकनीक इस्तेमाल में है या भविष्य में इसे किसी व्यावसायिक उत्पाद या सेवा के रूप में पेश किया जाएगा।
पेटेंट में मांग और कीमतों के अनुमान का विवरण
जनवरी में वॉलमार्ट को पेटेंट US12524776B2 मिला। इसमें ऐसी प्रणाली का वर्णन है जो अनुमानित मांग और कीमतों पर उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया के आधार पर उसकी वेबसाइट पर छूट तथा मार्कडाउन का स्तर अपने आप बदल सकती है।
मार्च में मंजूर हुए दूसरे पेटेंट US12572954B2 में पिछली खरीदारी के व्यवहार का इस्तेमाल कर मांग का अनुमान लगाने और कीमतों की सिफारिश करने की बात कही गई है। दस्तावेज में उल्लिखित डेटा में भुगतान के तरीके और ग्राहक की पहचान से जुड़ी जानकारी शामिल हो सकती है। दोनों में से कोई भी पेटेंट यह नहीं कहता कि वॉलमार्ट ने इन प्रणालियों को अपने कारोबार में लागू कर दिया है।
पेटेंट किसी तकनीकी तरीके के लिए कानूनी सुरक्षा मांगने का दस्तावेज होता है; इससे यह साबित नहीं होता कि वह तरीका किसी मौजूदा व्यावसायिक प्रक्रिया का हिस्सा है। फ्यूचर ऑफ प्राइवेसी फोरम के जेम्सन स्पिवैक ने कहा कि ऐसे दस्तावेज यह संकेत दे सकते हैं कि कंपनी किन क्षेत्रों पर शोध कर रही है, लेकिन वे यह जरूरी नहीं कि तकनीक के अंतिम इस्तेमाल का सही चित्र पेश करें। उनके आकलन में वॉलमार्ट के पेटेंट किसी खास ग्राहक के लिए अलग कीमत तय करने के बजाय उत्पाद-स्तर पर कीमत बदलने से अधिक जुड़े हैं।
उत्पाद-स्तर के मार्कडाउन और व्यक्तिगत कीमत में अंतर
दोनों मॉडलों के बीच अंतर महत्वपूर्ण है। यदि किसी रिटेलर को लगता है कि किसी उत्पाद की मांग कमजोर पड़ सकती है और वह उसकी कीमत घटा देता है, तो उसी स्टोर या वेबसाइट पर खरीदारी करने वाले ग्राहकों को आम तौर पर एक ही कीमत दिखाई देगी। इसके विपरीत, व्यक्तिगत मूल्य निर्धारण में ग्राहक की पहचान, खरीदारी की आदतों या अन्य जानकारी के आधार पर यह तय किया जाता है कि वही व्यक्ति कितना भुगतान करेगा।
अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन के वरिष्ठ नीति विश्लेषक जे स्टैनली को भी पेटेंट दस्तावेजों में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं मिला जिसमें अलग-अलग उपभोक्ताओं से अलग कीमत लेने का प्रस्ताव हो। उन्होंने कहा कि रिटेलर लंबे समय से मांग का अनुमान लगाते और उपयुक्त कीमत तय करते आए हैं, इसलिए यह हिस्सा पारंपरिक खुदरा मूल्य निर्धारण का ही रूप है।
हालांकि, अब रिटेलरों के पास पहले की तुलना में उपभोक्ताओं से जुड़ी कहीं अधिक जानकारी उपलब्ध है। लॉयल्टी प्रोग्राम, ऑनलाइन खरीदारी और डिजिटल विज्ञापन प्रणालियां कंपनियों को यह लगातार देखने में मदद कर सकती हैं कि उपभोक्ता क्या खरीदते हैं, क्या देखते हैं और किन उत्पादों पर दोबारा लौटते हैं। वॉलमार्ट की गोपनीयता सूचना के अनुसार, कंपनी अपनी वेबसाइटों और ऐप पर खरीदारी का इतिहास, ब्राउज़िंग गतिविधि और खोज गतिविधि एकत्र करती है। वह इस जानकारी का इस्तेमाल विज्ञापन, उत्पाद सिफारिशों और प्रचार के लिए कर सकती है।
वॉलमार्ट अपने विज्ञापन कारोबार का भी विस्तार कर रही है और लक्षित अभियानों के लिए उपभोक्ता डेटा का इस्तेमाल करती है। खरीदारी के रिकॉर्ड को ब्राउज़िंग व्यवहार और खोज संबंधी रुचियों के साथ मिलाने से रिटेलर ग्राहकों की खरीदारी की आदतों की अधिक विस्तृत प्रोफाइल बना सकते हैं। व्यक्तिगत कीमतों को लेकर चल रही बहस के वास्तविक कारोबारी संदर्भ में यह डेटा ढांचा महत्वपूर्ण है।
ग्राहक प्रोफाइल के आधार पर कीमत लेने से वॉलमार्ट का इनकार
वॉलमार्ट के एक प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी का तकनीकी नवाचार का लंबा इतिहास है और पेटेंट आवेदन विचारों तथा बौद्धिक संपदा की सुरक्षा का एक तरीका हैं। प्रवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि पेटेंट मिलना इस बात का संकेत नहीं है कि तकनीक अभी इस्तेमाल हो रही है या आगे चलकर वॉलमार्ट का उत्पाद अथवा सेवा बन जाएगी।
प्रवक्ता ने विशेष रूप से कहा कि वॉलमार्ट ग्राहकों की निजी जानकारी, खरीदारी की मंशा या खरीदारी के इतिहास के आधार पर अलग-अलग कीमत नहीं लेगा। यह बयान पेटेंट दस्तावेजों में वर्णित संभावित क्षमताओं और कंपनी के उस रुख के बीच अंतर स्पष्ट करता है कि वह फिलहाल व्यक्तिगत प्रोफाइल पर आधारित मूल्य निर्धारण प्रणाली नहीं चला रही है।
डिजिटल प्राइस टैग से पारदर्शिता पर ध्यान
अलग तौर पर, वॉलमार्ट पूरे अमेरिका में अपने स्टोरों पर कागजी मूल्य टैग की जगह डिजिटल शेल्फ लेबल लगा रही है। इन लेबलों से कर्मचारी एक-एक टैग बदलने के बजाय केंद्रीय प्रणाली के जरिए कीमत अपडेट कर सकते हैं। वॉलमार्ट ने मार्च में कहा था कि अमेरिका के करीब 2,300 स्टोरों में यह तकनीक इस्तेमाल हो रही थी और अगले वर्ष के दौरान इसे अपने स्टोर नेटवर्क में और फैलाने की उम्मीद थी।
कंपनी के अनुसार, कीमतों में बदलाव आम तौर पर स्टोर बंद होने के समय किया जाता है और कर्मचारियों द्वारा उसकी समीक्षा की जाती है। उसका कहना है कि एक ही स्टोर में किसी उत्पाद की कीमत मांग, दिन के समय या खरीदारी करने वाले ग्राहक के आधार पर नहीं बदलती। वॉलमार्ट ने यह भी कहा है कि डिजिटल लेबल ग्राहकों की जानकारी एकत्र नहीं करते।
डिजिटल शेल्फ लेबल का विस्तार अपने आप में यह साबित नहीं करता कि दोनों पेटेंटों में वर्णित प्रणालियों का इस्तेमाल भौतिक स्टोरों में कीमत तय करने के लिए हो रहा है। फेडरल ट्रेड कमीशन इस बात की जांच कर रहा है कि जब कंपनियां कीमत तय करने में व्यक्तिगत डेटा का इस्तेमाल करें, तो क्या उन्हें उपभोक्ताओं को इसकी जानकारी देनी चाहिए।
उपभोक्ताओं के लिए मुख्य सवाल हर तरह के गतिशील मूल्य निर्धारण का नहीं, बल्कि यह है कि क्या किसी रिटेलर को यह पता होने के कारण उसी उत्पाद के लिए अधिक कीमत लेने की अनुमति होनी चाहिए कि खरीदार कौन है या उसकी तत्काल परिस्थिति क्या है। स्टैनली ने एक उदाहरण दिया: यदि किसी रिटेलर को पता हो कि किसी व्यक्ति को सर्दी-जुकाम है, तो क्या वह उसी व्यक्ति के लिए टिश्यू की कीमत बढ़ा सकता है? यह उदाहरण समान उत्पाद-मार्कडाउन और किसी खास ग्राहक के लिए तय की गई कीमत के बीच की सीमा को स्पष्ट करता है।