चुनाव के बाद बिटकॉइन की तेजी टिक नहीं पाई। 80,800 डॉलर से ऊपर जाने के बाद, गुरुवार, 5 नवंबर तक इसकी कीमत करीब 75,500 डॉलर तक गिर गई। अमेरिकी टेक शेयरों की तेज बिकवाली और लेवरेज वाली क्रिप्टो पोज़िशनों की बड़े पैमाने पर लिक्विडेशन ने इस उछाल की नाजुकता उजागर की।
टेक शेयरों की बिकवाली ने चुनावी उछाल मिटाया
बुधवार को बिटकॉइन में तेजी आई थी। इससे पहले बाजार में उतार-चढ़ाव रहा था, जिसमें Binance से जुड़ी हैक की घटना और अनिश्चित निवेश धारणा शामिल थी। अमेरिकी मध्यावधि चुनाव खत्म होने के बाद कुछ अनिश्चितता कम हुई और ट्रेडरों ने मंदी की पोज़िशन बंद कीं, जिससे कीमत को सहारा मिला।
गुरुवार को निवेशक इस संभावना का आकलन करने लगे कि डेमोक्रेट्स कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत हासिल कर सकते हैं। एआई डेटा सेंटरों के निर्माण पर संभावित सीमाओं की चिंता से सेमीकंडक्टर शेयरों पर दबाव पड़ा। निवेशकों ने यह भी सवाल उठाया कि एआई पर मौजूदा खर्च का स्तर टिकाऊ है या नहीं। Nasdaq 5.5% गिरा, Nvidia 9.3% और AMD 17.3% नीचे आया।
अन्य जोखिम वाली परिसंपत्तियों के साथ बिटकॉइन भी दबाव में आया। लेवरेज वाले कारोबार ने गिरावट को और तेज किया। CoinGlass के आंकड़ों के मुताबिक, 24 घंटे में क्रिप्टो पोज़िशनों की 1.08 अरब डॉलर की लिक्विडेशन हुई, जिसमें करीब 954 मिलियन डॉलर की तेजी पर दांव लगाने वाली पोज़िशन शामिल थीं।
स्पॉट बाजार में खरीदारों की जगह बिकवाल
बिकवाली केवल लेवरेज वाले फ्यूचर्स तक सीमित नहीं रही। Whalio के Binance स्पॉट ट्रेडिंग आंकड़ों के अनुसार, 4 नवंबर को खरीदारों ने विक्रेताओं से 141.2 मिलियन डॉलर अधिक की खरीदारी की थी। उस दिन कुल वॉल्यूम में खरीद का हिस्सा 54% था।
लेकिन अगले ही दिन स्थिति पलट गई। 5 नवंबर के बाद के 24 घंटों में स्पॉट बाजार में बिकवाली का वॉल्यूम, खरीदारी से कुल कारोबार मूल्य के 10.8% के बराबर अधिक रहा। पिछले एक महीने के सबसे बड़े असंतुलनों में शामिल यह आंकड़ा स्पॉट बाजार में भी सक्रिय बिकवाली की ओर इशारा करता है।
फ्यूचर्स में भी विक्रेता आगे रहे। वहां बिकवाली का वॉल्यूम बाजार के कुल कारोबार के 1.8% के बराबर अधिक था। हालांकि, फ्यूचर्स का कारोबार स्पॉट बाजार से काफी बड़ा होता है, इसलिए इन दोनों प्रतिशतों को पूंजी के बाहर जाने के बराबर पैमाने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
ETF प्रवाह ने भी जोखिम से दूरी के संकेत दिए
बाजार आंकड़ों में वॉल स्ट्रीट निवेशकों की ओर से बिटकॉइन ETF की लगातार बिकवाली के संकेत भी मिले। टेक शेयरों में गिरावट, ETF से निकासी और तेजी वाली पोज़िशनों की लिक्विडेशन, बिटकॉइन की उलटफेर के साथ हुई। इससे इसकी निकट अवधि की चाल पर व्यापक जोखिम लेने की इच्छा और लेवरेज वाले कारोबार के असर का पता चलता है।
5 नवंबर तक बिटकॉइन 80,800 डॉलर से ऊपर के स्तर से गिरकर करीब 75,500 डॉलर पर आ गया था। इसी 24 घंटे की अवधि में क्रिप्टो पोज़िशनों की लिक्विडेशन 1.08 अरब डॉलर रही और स्पॉट कारोबार शुद्ध खरीदारी से विक्रेताओं के पक्ष में चला गया। उपलब्ध जानकारी में ETF से निकासी की राशि नहीं दी गई, इसलिए उसका पैमाना कीमत और ट्रेडिंग के इन आंकड़ों से अलग है।