एशिया में एआई और क्लाउड सेवाओं का विस्तार डिजिटल ढांचे की एक कम दिखाई देने वाली, लेकिन अहम कड़ी—डेटा केंद्रों को वैश्विक नेटवर्क से जोड़ने वाली समुद्र के नीचे बिछी केबलों—पर दबाव बढ़ा रहा है। टाटा कम्युनिकेशंस में ग्लोबल नेटवर्क सर्विसेज के उपाध्यक्ष कपिल कुमार जैन का कहना है कि अगर केबल और पूरे नेटवर्क में निवेश कंप्यूटिंग क्षमता के साथ नहीं बढ़ा, तो कारोबारियों को एआई पर किए गए खर्च का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाएगा। सेवा में रुकावट, अधिक विलंब और बढ़ती परिचालन लागत इसके जोखिम हैं।
केबल टूटने से बैंकिंग और क्लाउड सेवाएं प्रभावित
समुद्री केबलें सीमा-पार डिजिटल गतिविधियों की भौतिक बुनियाद हैं, कोई दूरस्थ दूरसंचार सुविधा भर नहीं। अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय डेटा का 99% से अधिक हिस्सा उपग्रहों के बजाय समुद्र के नीचे बिछी केबलों से गुजरता है। बैंक, फिनटेक मंच, क्लाउड सेवा प्रदाता और आपूर्ति शृंखलाएं लगातार डेटा भेजने के लिए इन कनेक्शनों पर निर्भर हैं।
हाल के व्यवधानों ने दिखाया है कि केबल क्षति का असर कितनी दूर तक फैल सकता है। 2024 में केबलों को नुकसान पहुंचने से अफ्रीका के कुछ हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं बाधित हुईं और बैंक, फिनटेक मंच तथा क्लाउड संचालन प्रभावित हुए। 2025 में लाल सागर की केबलों को नुकसान से एशिया और मध्य पूर्व के बीच कनेक्टिविटी बुरी तरह प्रभावित हुई। डेटा ट्रैफिक को लंबे वैकल्पिक रास्तों से भेजना पड़ा, जिससे क्लाउड सेवाओं में विलंब बढ़ा और वास्तविक समय में डिजिटल कामकाज पर निर्भर कारोबारों की लागत भी बढ़ी।
एआई का बढ़ता ट्रैफिक नेटवर्क क्षमता बढ़ाने की मांग कर रहा
एआई वर्कलोड और बड़े पैमाने के डेटा केंद्रों के विस्तार से बैंडविड्थ की जरूरत बढ़ रही है। लेख में 400 Gbps को मौजूदा मानक बताया गया है, जबकि 800 Gbps कनेक्शन उभरने लगे हैं। सरकारें और कंपनियां कंप्यूटिंग क्षमता तथा डेटा केंद्रों के विस्तार की दौड़ में हैं; ऐसे में नेटवर्क भी उसी रफ्तार से बढ़ पाएगा या नहीं, यह एशिया में एआई ढांचे के लिए व्यावहारिक बाधा बनता जा रहा है।
जैन ने टाटा कम्युनिकेशंस के एक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि 77% कारोबारी नेता एआई निवेश को बोर्ड स्तर की रणनीतिक प्राथमिकता मानते हैं। इसके बावजूद, 65% कंपनियां अब भी पुराने बुनियादी ढांचे पर निर्भर हैं या ऐसी सुविधाओं का इस्तेमाल कर रही हैं जो अभी विकास के चरण में हैं। एआई ट्रैफिक का अनुमान लगाना कठिन होता जा रहा है, इसलिए कारोबारों को ऐसे डेटा-सेंटर इंटरकनेक्ट की जरूरत है जिन्हें मांग के अनुसार तेजी से बढ़ाया जा सके। इससे सेवाएं स्थिर रखने और लागत संभालने में मदद मिलती है।
समुद्री केबलों, स्थलीय नेटवर्क और डेटा केंद्रों के बीच पर्याप्त क्षमता तथा वैकल्पिक मार्ग न हों, तो कंप्यूटिंग संसाधन मौजूद होने के बावजूद जाम या सेवा बाधित होने से डेटा प्रवाह सीमित हो सकता है। इसीलिए नेटवर्क की विश्वसनीयता केवल आईटी संचालन का विषय नहीं है; यह भी तय कर सकती है कि एआई परियोजनाएं अपनी योजना के मुताबिक काम कर पाएंगी या नहीं।
सिंगापुर और भारत एशिया के प्रमुख डेटा पारगमन केंद्र
सिंगापुर और भारत एशिया में डेटा ट्रैफिक के अहम केंद्र हैं। सिंगापुर दक्षिण-पूर्व एशिया को जोड़ता है और यहां दुनिया के सबसे घने डेटा-सेंटर समूहों में से एक है। भारत एशिया को मध्य पूर्व और यूरोप से जोड़ता है। मुंबई और चेन्नई केबल के प्रमुख लैंडिंग स्थान हैं, जबकि देश की डेटा-सेंटर क्षमता भी बढ़ रही है। इनकी रणनीतिक स्थिति और बुनियादी ढांचा सीमा-पार डेटा प्रवाह को सहारा देते हैं; इसलिए अलग-अलग मार्गों और नेटवर्क की मजबूती का महत्व बढ़ रहा है।
सिंगापुर की एआई महत्वाकांक्षाओं पर चर्चा अक्सर कंप्यूटिंग शक्ति, प्रतिभा और नियमन तक सीमित रहती है। लेकिन डेटा कितनी तेजी और भरोसे के साथ भेजा जा सकता है, और उसकी सुरक्षा कैसी है—इससे भी तय होता है कि ये सुविधाएं कितनी प्रभावी ढंग से काम करेंगी। तटीय केबल लैंडिंग स्टेशनों पर अड़चनें समुद्र पार केबलों से मिलने वाले गति लाभ को कम कर सकती हैं। इसलिए नेटवर्क योजना में समुद्री केबल, स्थलीय फाइबर और डेटा-सेंटर कनेक्शन को एक ही व्यवस्था के हिस्से के रूप में देखना जरूरी है।
आसियान दिशानिर्देशों में मरम्मत की मंजूरी के लिए 10 दिन की सिफारिश
नेटवर्क की मजबूती के लिए केवल नई केबल बिछाना काफी नहीं है। क्षमता की योजना, विविध मार्ग, सुरक्षा और मरम्मत की तैयारी के साथ-साथ ढांचे का लगातार प्रबंधन भी जरूरी है। निगरानी प्रणालियां, अतिरिक्त पुर्जे, समुद्री और स्थलीय नेटवर्क के बीच कनेक्शन तथा दीर्घकालीन प्रबंधन की स्पष्ट व्यवस्था तय करती है कि एक केबल को नुकसान पहुंचने पर सेवा व्यवधान कितना व्यापक होगा।
मरम्मत में लगने वाले समय पर सार्वजनिक नीति का भी ध्यान है। हाल में अपनाए गए ‘आसियान एन्हांस्ड गाइडलाइंस फॉर स्ट्रेंथनिंग अंडरसी केबल रेजिलिएंस एंड रिपेयर’ में मरम्मत की मंजूरी की प्रक्रिया 10 दिनों के भीतर पूरी करने की सिफारिश की गई है। दिशानिर्देश मरम्मत की तैयारी को क्षेत्रीय आर्थिक स्थिरता से जोड़ते हैं। हालांकि, व्यवहार में नेटवर्क ऑपरेटरों के बीच तालमेल, मरम्मत के संसाधन और वैकल्पिक मार्गों की उपलब्धता भी उतनी ही अहम होगी।
कंपनियों के लिए कंप्यूटिंग सुविधाओं और डेटा केंद्रों की क्षमता तथा उनसे मिलने वाले लाभ को मापना अपेक्षाकृत आसान है। इसके उलट, केबल, लैंडिंग स्टेशन और बैकअप मार्ग कम दिखाई देते हैं और उन पर अलग से निवेश को उचित ठहराना कठिन हो सकता है। फिर भी, अपर्याप्त कनेक्टिविटी महंगे एआई ढांचे को सेवा बाधित होने, नेटवर्क जाम और ऊंची परिचालन लागत के जोखिम में डाल सकती है। एशिया में एआई का इस्तेमाल बढ़ने के साथ समुद्री नेटवर्क की क्षमता, वैकल्पिक मार्ग और मरम्मत की तैयारी डिजिटल कारोबारों की निरंतरता के लिए अहम बने रहेंगे।