IRS कुछ क्रिप्टोकरेंसी ETF की कर व्यवस्थाओं की जांच कर रहा है। मामला इस बात से जुड़ा है कि डिजिटल परिसंपत्तियां वॉल स्ट्रीट की ट्रेडिंग फर्मों को हस्तांतरित होने पर फंड अपने लाभ को किस तरह दर्ज करते हैं। 28 सितंबर को जारी नोटिस में एजेंसी ने कहा कि कुछ व्यवस्थाओं से फंड अपनी पुस्तकों में लाभ दर्ज करने से बच सकते हैं। उसी दिन जारी एक अलग कर निर्णय में ऐसी रणनीति को खारिज किया गया, जिसके तहत धनी निवेशक मूल्य बढ़ चुके शेयरों के बदले विविधीकृत फंड की इकाइयां लेकर तत्काल कर योग्य लाभ दर्ज करने से बच सकते थे।
दोनों कदम ETF पर लागू कर नियमों से जुड़े हैं। इन लाभों का वर्गीकरण बदलने से किसी फंड की कर स्थिति, संरचना और निवेशकों के कर बिल पर असर पड़ सकता है। IRS ने किसी खास फंड का नाम नहीं लिया है और न ही कहा है कि उसके दायरे में सभी क्रिप्टो ETF आते हैं।
इन-काइंड रिडेम्प्शन से फंड की आय का वर्गीकरण बदल सकता है
अमेरिका में अधिकांश निवेश फंड कुछ शर्तें पूरी करने पर अनुकूल कर व्यवस्था के पात्र होते हैं। इनमें यह शर्त भी शामिल है कि उनकी कम-से-कम 90% आय लाभांश, ब्याज और शेयरों की ट्रेडिंग से हुए लाभ से आए। क्रिप्टोकरेंसी और कमोडिटी से होने वाली आय इस गणना में शामिल नहीं होती। ऐसी गैर-पात्र आय की मात्रा अधिक होने पर फंड की कर स्थिति जोखिम में पड़ सकती है।
IRS के नोटिस के मुताबिक, कुछ ETF मूल्य बढ़ चुकी डिजिटल परिसंपत्तियों के प्रबंधन के लिए इन-काइंड रिडेम्प्शन का इस्तेमाल कर सकते हैं। परिसंपत्तियां बेचकर पूंजीगत लाभ दर्ज करने के बजाय, फंड उन्हें किसी ट्रेडिंग फर्म को हस्तांतरित करता है, जो फंड की इकाइयों का रिडेम्प्शन करती है या उनका मूल्य नकदी में बदलती है। यदि इस लेनदेन को फंड के स्तर पर दर्ज बिक्री-लाभ न माना जाए, तो उस आय को कम अनुकूल कर श्रेणी में वर्गीकृत होने से बचाया जा सकता है।
एजेंसी ने कहा कि जांच के दायरे वाली व्यवस्थाओं में ऐसे फंड शामिल हो सकते हैं जो डिजिटल परिसंपत्तियां सीधे रखते हैं या ट्रस्ट के माध्यम से रखते हैं। ETF विश्लेषक जेम्स सेयफर्ट ने नोटिस का दायरा व्यापक बताया। इसमें इन-काइंड रिडेम्प्शन, सेक्शन 351 के तहत लेनदेन, बॉक्स स्प्रेड रणनीतियां और स्ट्रैडल लेनदेन शामिल हैं—ऐसी व्यवस्थाएं जिनसे कर परिणाम बनाए या टाले जा सकते हैं।
स्पॉट बिटकॉइन ट्रस्ट की संरचना अलग हो सकती है
नोटिस में प्रभावित फंडों की पहचान नहीं की गई है। ब्लैकरॉक का iShares Bitcoin Trust जैसे स्पॉट बिटकॉइन उत्पाद अलग कानूनी और कर संरचना के तहत काम करते हैं। यह ग्रांटर ट्रस्ट है, यानी इसकी कर देनदारी पारंपरिक फंड की तरह पूरी तरह फंड के स्तर पर तय होने के बजाय शेयरधारकों तक पहुंचती है।
फिलहाल जांच का अधिक सीधा केंद्र वे पारंपरिक फंड प्रतीत होते हैं जो क्रिप्टो परिसंपत्तियां सीधे रखते हैं या उनसे जुड़े ट्रस्टों में हिस्सेदारी रखते हैं। ऑफशोर सहायक कंपनियों के जरिए ये परिसंपत्तियां रखने वाले फंडों का नोटिस में स्पष्ट उल्लेख नहीं है। उत्पादों की संरचना अलग-अलग होने के कारण, किसी फंड को केवल “क्रिप्टो ETF” कहने से यह तय नहीं होता कि वह जांच से प्रभावित होगा या नहीं। निवेशकों को उसकी पंजीकरण संबंधी फाइलिंग और कर व्यवस्था देखनी होगी।
IRS ने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि नए नियम पूर्वव्यापी रूप से लागू हो सकते हैं या नहीं। आगे जारी होने वाला मार्गदर्शन केवल उसके बाद किए गए लेनदेन पर लागू हो सकता है या पहले पूरे हो चुके लेनदेन तक भी पहुंच सकता है। सार्वजनिक टिप्पणियां जमा करने की अंतिम तारीख 28 अक्टूबर है। आगे के मार्गदर्शन से पहले नियमों का अंतिम दायरा और लागू होने की तारीख स्पष्ट नहीं है।
IRS ने सेक्शन 351 के तहत शेयर अदला-बदली की रणनीति खारिज की
उसी दिन जारी टैक्स रूलिंग 2026-20 ने ETF लेनदेन की एक अन्य संरचना पर भी रोक लगाई। इस रणनीति में निवेशक काफी मूल्य बढ़ चुके शेयर नए बनाए गए ETF में डाल सकता था। इसके बाद फंड उन शेयरों को ट्रेडिंग फर्म को हस्तांतरित करता, ताकि निवेशक तत्काल पूंजीगत लाभ दर्ज किए बिना अधिक विविधीकृत पोर्टफोलियो हासिल कर सके।
IRS ने अपने सामने रखी परिस्थितियों में तय किया कि ट्रेडिंग फर्म को शेयर सौंपना कर योग्य बिक्री है, न कि सेक्शन 351 के तहत कर-मुक्त विनिमय। ETF विश्लेषक एरिक बालचुनस ने कहा कि यह निर्णय सभी ETF संरचनाओं को खारिज करने के बजाय उन खास तरीकों पर केंद्रित दिखता है जो कर कानून की मंशा से अलग हैं।
अकाउंटेंट एड ज़ोलर्स ने भी इस निर्णय का विश्लेषण किया। फंड प्रबंधकों और संस्थागत निवेशकों के लिए अहम सवाल यह है कि IRS इन-काइंड रिडेम्प्शन, ट्रस्ट में रखी परिसंपत्तियों और सेक्शन 351 के लेनदेन के बीच सीमा कैसे तय करेगा—और क्या नए नियम पहले ही हो चुके परिसंपत्ति हस्तांतरणों पर भी लागू होंगे।