Palantir के CEO Alex Karp का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कारण काम करने के तरीकों में बदलाव के बीच न्यूरोडाइवर्जेंट गुणों वाले लोगों के लिए योगदान के नए अवसर बन सकते हैं। हालांकि, न्यूरोडाइवर्जेंस पर शोध करने वाले ऑटिस्टिक मनोवैज्ञानिक Daniel Wendler इससे आंशिक रूप से सहमत हैं। उनका कहना है कि इसे जन्मजात प्रतिभा के दावे तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। कंपनियां अपने सिस्टम और कार्यस्थल को किस तरह बदलती हैं, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा।
इस साल की शुरुआत में बिजनेस पॉडकास्ट TBPN को दिए एक इंटरव्यू में Karp ने कहा कि AI के दौर में अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखने के मोटे तौर पर दो रास्ते हो सकते हैं—किसी खास पेशेवर कौशल का विकास करना या न्यूरोडाइवर्जेंट गुणों का होना। इस शब्द में आम तौर पर ऑटिज्म, अटेंशन-डेफिसिट/हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD) और डिस्लेक्सिया जैसी स्थितियां शामिल होती हैं।
Karp खुद डिस्लेक्सिया से प्रभावित हैं। वह पहले अपने अनुभव को ऐसा “निर्माणकारी क्षण” बता चुके हैं, जिसने उन्हें “स्वतंत्र ढंग से सोचने” में मदद की। उन्होंने 2003 में Peter Thiel, Joe Lonsdale, Stephen Cohen और Nathan Gettings के साथ Palantir की सह-स्थापना की थी। दो दशक से अधिक समय बाद भी Karp कंपनी का नेतृत्व कर रहे हैं। Palantir अब लगभग 470 अरब डॉलर के बाजार मूल्य वाली सॉफ्टवेयर कंपनी बन चुकी है।
Karp ने रैखिक सोच से अलग दृष्टिकोण पर जोर दिया
TBPN इंटरव्यू में Karp ने कहा कि AI उन कौशलों और नजरियों को बदल रहा है, जिन्हें कंपनियां महत्व देती हैं। उनके अनुसार, कर्मचारियों को कलाकारों की तरह सोचने की जरूरत होगी—समस्याओं को अलग-अलग दिशाओं से देखना और ऐसे नतीजे तैयार करना, जो सामान्य तरीकों से अलग हों।
न्यूरोडाइवर्जेंस पर काम करने वाले ऑटिस्टिक मनोवैज्ञानिक Wendler ने कहा कि AI के अनुरूप ढल रही कंपनियों में सोचने के अलग-अलग तरीकों का व्यावहारिक मूल्य हो सकता है। उनका तर्क है कि यदि किसी AI टीम में न्यूरोडाइवर्जेंट कर्मचारी नहीं हैं, तो वह उन नजरियों से वंचित रह सकती है जो पारंपरिक तरीकों पर सवाल उठाते हैं।
Wendler के मुताबिक, AI कंपनियों को भूमिकाओं, कार्यों और उत्पादन प्रक्रियाओं का दोबारा आकलन करने के लिए मजबूर कर रहा है। इससे “मूल्यवान कर्मचारी” की परिभाषा भी व्यापक हो सकती है। जटिल जानकारी, पैटर्न पहचानने या असामान्य तरीकों से समस्याएं हल करने वाले कामों में अलग-अलग संज्ञानात्मक दृष्टिकोण मौजूदा टीमों के पूरक बन सकते हैं, केवल उनका विकल्प नहीं।
AI कुछ कार्यस्थलीय बाधाओं को कम कर सकता है
Wendler ने कहा कि आधुनिक कार्यस्थल लंबे समय से न्यूरोटिपिकल कर्मचारियों को ध्यान में रखकर बनाए जाते रहे हैं। इसमें इंटरव्यू की प्रक्रिया, संवाद की शैली, कार्यालय की व्यवस्था और प्रदर्शन प्रबंधन शामिल हैं। ऐसे सिस्टम न्यूरोटिपिकल कर्मचारियों की ताकत को बढ़ा सकते हैं, लेकिन न्यूरोडाइवर्जेंट कर्मचारियों की जरूरतों को पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं करते।
AI के कारण कंपनियां काम को व्यवस्थित करने के तरीकों में बदलाव कर रही हैं। इससे नियोक्ता अलग-अलग तरह से सोचने वाले कर्मचारियों के लिए बेहतर व्यवस्था पर विचार कर सकते हैं, बजाय इसके कि सभी से एक जैसी गति और दिनचर्या का पालन करने की अपेक्षा की जाए। Wendler ने कहा कि कंपनियां अभी यह समझने की प्रक्रिया में हैं कि AI भूमिकाओं और संगठनात्मक ढांचे को कैसे बदलेगा, लेकिन अलग-अलग संज्ञानात्मक शैलियों वाले कर्मचारियों के लिए शुरुआती स्थितियां कुछ हद तक अधिक समान हो सकती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि न्यूरोडाइवर्जेंट कर्मचारी AI टूल्स के साथ प्रयोग करने के लिए अधिक तैयार हो सकते हैं, क्योंकि पारंपरिक कार्यस्थलीय ढांचे उनके लिए महत्वपूर्ण बाधाएं पैदा कर सकते हैं। बड़े भाषा मॉडल जटिल कार्यों को छोटे चरणों में बांटने, काम को व्यवस्थित करने और संवाद में मदद कर सकते हैं। इससे कुछ कर्मचारियों के लिए रोजमर्रा का काम आसान हो सकता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हर न्यूरोडाइवर्जेंट कर्मचारी को स्वतः लाभ मिलेगा।
Palantir की फेलोशिप में 200,000 डॉलर तक वेतन
Palantir फिलहाल न्यूरोडाइवर्जेंट प्रतिभाओं के लिए Neurodivergent Fellowship कार्यक्रम चलाती है। भर्ती सामग्री के अनुसार, संबंधित पदों के लिए वार्षिक वेतन 110,000 से 200,000 डॉलर के बीच है। कार्यक्रम में शामिल लोगों से Palantir के इंजीनियरों के समान प्रदर्शन मानकों को पूरा करने की अपेक्षा की जाती है।
कंपनी की भर्ती सामग्री में कहा गया है कि पैटर्न पहचानने की क्षमता, रैखिक सोच से अलग दृष्टिकोण और गहन एकाग्रता AI-आधारित भविष्य में लाभ दे सकते हैं। Palantir इन विशेषताओं को बड़े भाषा मॉडल वाली तकनीक से बने कार्यपरिवेश से जोड़ती है और इनके आधार पर न्यूरोडाइवर्जेंट कर्मचारियों की संभावित उपयोगिता पर जोर देती है।
SAP एक दशक से अधिक समय से न्यूरोडाइवर्जेंट प्रतिभाओं की भर्ती और कर्मचारी सहायता से जुड़े कार्यक्रम विकसित कर रही है। उसका Autism at Work कार्यक्रम भर्ती के साथ-साथ कर्मचारियों के कंपनी में शामिल होने के बाद उपलब्ध संसाधनों को भी कवर करता है। Microsoft, Dell और JPMorgan Chase ने भी पारंपरिक इंटरव्यू में बदलाव, न्यूरोडाइवर्जेंस-केंद्रित भर्ती और कार्यस्थल सहायता से जुड़ी पहल शुरू की हैं।
मनोवैज्ञानिक ने “सुपरपावर” वाली धारणा पर आपत्ति जताई
Wendler ने कंपनियों और आम लोगों को न्यूरोडाइवर्जेंट कर्मचारियों को AI युग का स्वाभाविक “जीनियस” बताने से सावधान किया। ऐसी धारणा उन लोगों की अनदेखी कर सकती है जिनमें असाधारण क्षमताएं नहीं हैं, लेकिन वे अपनी टीमों में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। साथ ही, इससे ADHD, ऑटिज्म या डिस्लेक्सिया के कारण रोजमर्रा की जिंदगी और काम में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयां भी कम करके आंकी जा सकती हैं।
उनके अनुसार, महत्वपूर्ण फैसलों में भाग लेने या कार्यस्थल पर अपनी जगह बनाने के लिए न्यूरोडाइवर्जेंट कर्मचारियों को “सुपरह्यूमन” बनने की जरूरत नहीं है। वास्तविक बदलाव में अधिक लचीली कार्यव्यवस्था, स्पष्ट और उपयुक्त संवाद प्रणाली तथा कर्मचारियों की वास्तविक क्षमताओं के अनुरूप तैयार की गई भूमिकाएं शामिल हो सकती हैं। Palantir और अन्य कंपनियों के लिए AI केवल नई तरह की प्रतिभाओं की भर्ती का अवसर नहीं है; यह इस बात की भी परीक्षा है कि अलग-अलग सोच रखने वाले लोग वास्तविक कार्यस्थलीय प्रक्रियाओं में कितनी प्रभावी ढंग से काम कर सकते हैं।