अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच डीजल निर्यात पर पाबंदी लगाने पर विचार कर रहा है। अमेरिकी तेल उद्योग ने चेतावनी दी है कि निर्यात रोकने से रिफाइनिंग परिचालन और तैयार ईंधन की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। कुछ क्षेत्रों में कीमतों को थोड़े समय के लिए राहत मिल सकती है, लेकिन आगे चलकर उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल के लिए अधिक भुगतान करना पड़ सकता है। वैश्विक ईंधन बाजार में भी आपूर्ति का दबाव बढ़ सकता है।
इस सप्ताह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका बड़ी मात्रा में डीजल का उत्पादन करता है और उन्होंने अपने प्रशासन से निर्यात रोकने की संभावना की जांच करने को कहा है। अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी माइक सोमर्स ने कहा कि अमेरिकी ऊर्जा निर्यात सीमित करने से रिफाइनरों पर दबाव और बढ़ सकता है तथा इसका भार उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। उनके अनुसार, नए निर्यात नियंत्रण लगाने के बजाय आपूर्ति बढ़ाना और बाजार में लचीलापन सुधारना अधिक प्रभावी उपाय होगा।
प्रतिबंध का दायरा स्पष्ट न होने से रिफाइनिंग कंपनियों के शेयर गिरे
बुधवार को बाजार में अमेरिका से डीजल निर्यात पर संभावित 90-दिन की रोक की चर्चा के बाद वालेरो एनर्जी, मैराथन पेट्रोलियम और फिलिप्स 66 के शेयरों में गिरावट आई।
बाद में ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा कि प्रशासन निर्यात प्रतिबंधों का अध्ययन कर रहा है, लेकिन तत्काल व्यापक प्रतिबंध लगाने की दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा। तेल क्षेत्र की सेवा कंपनी लिबर्टी एनर्जी के पूर्व मुख्य कार्यकारी राइट ने कहा कि सरकार ऐसी नीति से बचना चाहती है जो सभी क्षेत्रों और उत्पादों पर एक जैसी लागू हो। अमेरिकी रिफाइनिंग व्यवस्था अलग-अलग उत्पाद मिश्रण, क्षेत्रीय मांग-आपूर्ति और जटिल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क पर निर्भर करती है।
राइट पहले भी चेतावनी दे चुके हैं कि तैयार पेट्रोलियम उत्पादों की आवाजाही सीमित होने पर अमेरिकी रिफाइनरियां कुल उत्पादन घटा सकती हैं। यदि भंडारण टैंक भरने लगते हैं, तो कंपनियां पेट्रोल और अन्य उत्पादों का उत्पादन भी कम कर सकती हैं, जिससे बाजार में कुल आपूर्ति घटेगी।
कुछ क्षेत्रों को शुरुआती राहत, लेकिन व्यापक कीमत दबाव का खतरा
तेल उद्योग से जुड़े एक कार्यकारी के अनुमान के अनुसार, डीजल निर्यात पर रोक से ईंधन की कीमत लगभग 30 सेंट प्रति गैलन बढ़ सकती है। गैसबडी में पेट्रोलियम विश्लेषण के प्रमुख पैट्रिक डी हान ने कहा कि प्रतिबंध लागू होने पर अमेरिका में पेट्रोल की कीमत ऐतिहासिक ऊंचाई के करीब पहुंच सकती है।
रैपिडन एनर्जी के अध्यक्ष और पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के ऊर्जा सलाहकार बॉब मैकनैली ने कहा कि अमेरिकी गल्फ कोस्ट और मिडवेस्ट के डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में कीमतें शुरुआत में घट सकती हैं। इन क्षेत्रों में रिफाइनिंग क्षमता पर्याप्त है। निर्यात के लिए भेजे जाने वाले कुछ उत्पाद यदि घरेलू बाजार में रह जाते हैं, तो स्थानीय आपूर्ति अस्थायी रूप से बढ़ सकती है।
इसके विपरीत, आयात पर अधिक निर्भर अमेरिकी नॉर्थईस्ट को ऐसी राहत मिलने की संभावना कम है। मैकनैली के अनुसार, रिफाइनरियां उत्पादन घटाती हैं तो शुरुआती कीमत गिरावट जल्दी समाप्त हो सकती है। इसके बाद घरेलू कीमतें उस स्तर से भी ऊपर जा सकती हैं, जहां वे प्रतिबंध न होने की स्थिति में रहतीं। वैश्विक ईंधन कीमतों पर भी ऊपर की ओर दबाव बन सकता है।
अमेरिका और यूरोप के बीच तैयार पेट्रोलियम उत्पादों का परस्पर व्यापार भी महत्वपूर्ण है। अमेरिका यूरोप को डीजल भेजता है, जबकि यूरोप अमेरिका को पेट्रोल की आपूर्ति करता है। यदि वॉशिंगटन डीजल निर्यात सीमित करता है, तो व्यापारिक साझेदार जवाबी कदम उठा सकते हैं, जिनमें अमेरिका को पेट्रोल भेजने पर रोक या सीमा शामिल हो सकती है। इससे आयात पर निर्भर नॉर्थईस्ट में आपूर्ति और तंग हो सकती है।
एक साल में औसत डीजल कीमत करीब 3 डॉलर बढ़ी
डीजल की कीमतें प्रशासन के लिए प्रमुख राजनीतिक दबाव का विषय बन गई हैं। अमेरिकन ऑटोमोबाइल एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार, 23 सितंबर को अमेरिका में डीजल की राष्ट्रीय औसत कीमत 6.52 डॉलर प्रति गैलन थी। यह 2025 की इसी अवधि से करीब 3 डॉलर अधिक है। पेट्रोल की औसत कीमत 4.47 डॉलर प्रति गैलन रही, जो एक साल पहले की तुलना में 1.30 डॉलर अधिक है।
आयोवा से रिपब्लिकन सीनेटर चक ग्रासली ने सप्ताहांत में व्हाइट हाउस से डीजल पर प्रतिबंध लगाने की मांग की। आयोवा एक प्रमुख कृषि राज्य है और खेती के काम में डीजल पर भारी निर्भरता है। राज्य में सीनेट चुनाव भी प्रतिस्पर्धी माना जा रहा है, इसलिए डीजल की ऊंची कीमतें कृषि लागत और स्थानीय राजनीतिक दबाव—दोनों से जुड़ गई हैं।
मैकनैली ने इस प्रस्ताव के पीछे के दबाव को चुनाव से पहले की प्रतिक्रिया बताया। नवंबर में अमेरिकी मध्यावधि चुनाव होने हैं और रिपब्लिकन सांसद प्रशासन से कार्रवाई की मांग बढ़ा रहे हैं, खासकर तब जब ईंधन कीमतों में गिरावट नहीं आती।
रूस की पाबंदियों से वैश्विक डीजल आपूर्ति पर दबाव
वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि व्हाइट हाउस यह आकलन कर रहा है कि पूर्ण या आंशिक निर्यात प्रतिबंध अमेरिका की कुल रिफाइनिंग क्षमता के अनुरूप होगा या नहीं। प्रशासन यह भी जांच रहा है कि ऐसे उपाय व्यवहार में कितने प्रभावी रहेंगे। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के अनुसार, ट्रंप पंप पर कीमतें घटाना चाहते हैं और सभी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।
वैश्विक डीजल आपूर्ति में कमी का एक प्रमुख कारण यूक्रेन युद्ध से जुड़े हमलों के बाद रूस द्वारा डीजल निर्यात निलंबित करना है। रूस पहले दुनिया में डीजल का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत था। उसके निर्यात घटने से अंतरराष्ट्रीय बाजार से बड़ी मात्रा में आपूर्ति हट गई है। यदि अमेरिका भी प्रतिबंध लगाता है, तो कारोबारियों को एक ही समय में डीजल के दो बड़े स्रोतों के कम होने का सामना करना पड़ेगा।
ट्रंप प्रशासन ने अभी अंतिम नीति तय नहीं की है। चर्चा इस बात पर केंद्रित है कि व्यापक प्रतिबंध लगाया जाए, चुनिंदा निर्यात पर सीमा लगाई जाए या स्वैच्छिक निर्यात कटौती के जरिए आपूर्ति को समायोजित किया जाए। बाजार के लिए मुख्य सवाल प्रस्तावित कार्रवाई का दायरा और अवधि, अमेरिकी रिफाइनरों की प्रतिक्रिया तथा व्यापारिक साझेदारों के संभावित जवाबी कदम हैं।