कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली होने पर अमेरिकी डॉलर शेयर बाजार के साथ गिर सकता है, बजाय इसके कि वह सुरक्षित निवेश के रूप में मजबूत हो। Deutsche Bank की यह चेतावनी विदेशी निवेशकों के लिए अहम है: उन्हें अमेरिकी शेयरों के साथ डॉलर में अपनी हिस्सेदारी पर भी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसका असर डॉलर में कीमत तय होने वाली बिटकॉइन और सोने जैसी परिसंपत्तियों पर भी पड़ सकता है। शुक्रवार, 30 अक्टूबर को अमेरिकी शेयर, सोना और बिटकॉइन सभी गिरे, जबकि डॉलर स्थिर रहा—बाजार में किसी एक स्पष्ट सुरक्षित-आश्रय रुझान का संकेत नहीं मिला।
अमेरिकी शेयरों में विदेशी निवेश 20 ट्रिलियन डॉलर से अधिक
Deutsche Bank में वैश्विक विदेशी मुद्रा अनुसंधान प्रमुख जॉर्ज सरावेलोस ने ग्राहक रिपोर्ट में कहा कि विदेशी निवेशकों के पास 20 ट्रिलियन डॉलर से अधिक के अमेरिकी शेयर हैं। बैंक का अनुमान है कि इन होल्डिंग्स के मूल्य का करीब 90% हिस्सा शेयर कीमतों में बढ़त से आया है, न कि विदेशी निवेशकों की लगातार शुद्ध खरीद से बनी मूल हिस्सेदारी से।
सरावेलोस के मुताबिक, अमेरिकी शेयरों में विदेशी निवेश देश के चालू खाते के घाटे के वित्तपोषण का अहम स्रोत बन गया है। चालू खाते का घाटा तब होता है जब किसी देश का विदेशों में खर्च, विदेश से उसकी आय से अधिक हो। इसलिए अमेरिकी शेयरों में तेज गिरावट का असर केवल शेयरों के मूल्य तक सीमित नहीं रह सकता; इससे विदेशी निवेशकों की डॉलर में रखी संपत्ति पर भी दबाव पड़ सकता है।
शेयर गिरने पर डॉलर मजबूत होना तय नहीं
पिछले दशक में अमेरिकी शेयरों और डॉलर में अक्सर विपरीत दिशा में चाल देखने को मिली है। जोखिम वाली परिसंपत्तियों में गिरावट के समय निवेशक डॉलर खरीदते रहे हैं, जिससे उसे सुरक्षित-आश्रय मुद्रा की भूमिका मिली। इसी उम्मीद में कुछ विदेशी निवेशकों ने अपनी डॉलर हिस्सेदारी का मुद्रा-जोखिम हेज नहीं किया—उन्हें लगा कि डॉलर की मजबूती अमेरिकी शेयरों में संभावित नुकसान की कुछ भरपाई कर देगी।
Deutsche Bank का कहना है कि अगर झटका अमेरिका से ही शुरू होता है, तो यह सुरक्षा काम नहीं भी कर सकती। शेयर गिरने पर विदेशी निवेशक मुद्रा-जोखिम से बचाव बढ़ा सकते हैं; ऐसा करने के लिए उन्हें डॉलर बेचना होगा। बड़े पैमाने पर हेजिंग से डॉलर पर और दबाव पड़ सकता है। ऐसे में निवेशकों को शेयरों की घटती कीमत और कमजोर डॉलर, दोनों का नुकसान झेलना पड़ सकता है।
2025 के टैरिफ झटके में दिखा था ऐसा रुझान
अप्रैल 2025 में भी कुछ ऐसा ही पैटर्न दिखा था। डोनाल्ड ट्रंप की ओर से टैरिफ उपायों की घोषणा के बाद डॉलर गिरा। Bank for International Settlements के शोध में पाया गया कि विदेशी निवेशकों की मुद्रा-हेजिंग गतिविधि ने इस गिरावट को और तेज किया। Deutsche Bank ने इस घटना का हवाला देते हुए कहा कि जब बाजार का झटका अमेरिका से आता है और विदेशी निवेशक डॉलर में अपना जोखिम घटाते हैं, तो ‘शेयर नीचे, डॉलर ऊपर’ वाला पारंपरिक संबंध कायम रहने की गारंटी नहीं होती।
डॉलर की चाल दूसरी परिसंपत्तियों की कीमतों को भी प्रभावित करती है। बिटकॉइन और सोने की कीमत डॉलर में तय होती है। अगस्त में डॉलर गिरने और Federal Reserve की ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ने के दौरान दोनों की कीमतें चढ़ी थीं। लेकिन शुक्रवार, 30 अक्टूबर को डॉलर स्थिर रहा और बिटकॉइन, सोना तथा शेयर—तीनों नीचे आए। अल्पकालीन कीमतों पर कई कारक असर डालते हैं; Deutsche Bank की चेतावनी एक संभावित स्थिति के बारे में है, यह तय संकेत नहीं कि AI शेयरों की बिकवाली में ये सभी परिसंपत्तियां एक साथ चलेंगी।