चीन के नियामकों ने कथित तौर पर निवेश बैंकों से नए IPO आवेदन रोकने और बड़ी शेयर बिक्री टालने को कहा है। इसका मकसद बाजार से नकदी का बहिर्वाह सीमित करना और सूचीबद्ध शेयरों पर बिकवाली का दबाव कम करना बताया जा रहा है। इन निर्देशों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। निवेशक इस पर नजर रखे हुए हैं कि क्या ये कदम चीनी शेयर बाजार को संभाल पाएंगे और क्या वहां की गिरावट अमेरिकी बाजारों में जोखिम लेने की धारणा को प्रभावित कर सकती है।
नए शेयरों की आपूर्ति पर कथित रोक
बताए गए उपायों में नई लिस्टिंग के आवेदन और बड़ी शेयर बिक्री, दोनों शामिल हैं। नए शेयरों की आपूर्ति घटने से निवेशकों की पूंजी मौजूदा शेयरों में बनी रह सकती है। हालांकि, जारीकरण पर रोक से बिकवाली का दबाव अपने आप खत्म नहीं होगा। बाजार की दिशा निवेशकों के भरोसे और मांग-आपूर्ति के दूसरे कारकों पर भी निर्भर करेगी।
इन खबरों की अब तक पुष्टि नहीं हुई है। उपायों का दायरा, लागू होने की तारीख और अवधि भी स्पष्ट नहीं की गई है।
2015 की पाबंदियों से संकट नहीं थमा था
जुलाई 2015 में चीन ने IPO निलंबित कर दिए थे और बड़े शेयरधारकों को छह महीने तक शेयर बेचने से रोक दिया था। इन कदमों से कुछ समय के लिए राहत मिली, लेकिन बाजार का संकट खत्म नहीं हुआ। 24 अगस्त को शंघाई कंपोजिट 8.5% गिरा। उसी दिन डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज बाजार खुलने के बाद 1,000 अंक से अधिक नीचे गया और कारोबार के अंत में 588 अंक की गिरावट पर बंद हुआ।
उस दौर से पता चला कि नई लिस्टिंग और शेयरधारकों की बिक्री पर रोक निकट अवधि में शेयरों की आपूर्ति बदल सकती है, लेकिन इससे बाजार की गिरावट पलटना तय नहीं होता। चीन और अमेरिका के शेयर बाजारों में एक साथ उतार-चढ़ाव अपने आप में सीधा कारण-संबंध साबित नहीं करता। फिर भी, जब वैश्विक निवेशक जोखिम के प्रति अपना रुख बदलते हैं, तो दोनों बाजारों के बीच संबंधों पर ध्यान बढ़ जाता है।
अमेरिकी टेक शेयरों पर दबाव से बढ़ी चिंता
अमेरिकी टेक्नोलॉजी शेयर पहले से दबाव में हैं। लेख में आशंका जताई गई है कि चीन में कमजोरी बढ़ने पर वैश्विक बिकवाली की एक और लहर आ सकती है, लेकिन फिलहाल यह केवल जोखिम की संभावना है, घटित घटना नहीं। अमेरिकी परिसंपत्तियों पर असर बाजार की धारणा, पूंजी प्रवाह और निवेशकों की जोखिम के प्रति प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।
बाजार भागीदारों की नजर इस बात पर रहेगी कि कथित IPO व्यवस्था की पुष्टि होती है या नहीं, पाबंदियां किस तरह लागू की जाती हैं और चीनी शेयर बाजार स्थिर हो पाता है या नहीं। अभी 2015 का घटनाक्रम ऐतिहासिक तुलना के लिए प्रासंगिक है, जबकि नए उपायों के असर और अमेरिकी बाजारों पर संभावित प्रभाव को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।