नेशनल एसोसिएशन ऑफ इंश्योरेंस कमिश्नर्स (NAIC) ने कहा है कि राज्य नियामक निजी इक्विटी कंपनियों के स्वामित्व वाली जीवन बीमा कंपनियों के निवेश और पूंजी संरचनाओं की समीक्षा जारी रखे हुए हैं। संगठन का कहना है कि इसके लिए अलग संघीय नियामकीय ढांचे की आवश्यकता नहीं है। यह जवाब सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन की उन चिंताओं के बाद आया, जिनमें जीवन बीमा में निजी इक्विटी निवेश से जुड़े जोखिमों और लॉस एंजिल्स डॉजर्स के मालिक मार्क वाल्टर से संबंधित संघीय जांच का उल्लेख था। वाल्टर के कारोबार से जुड़ी दो जीवन बीमा कंपनियां भी इन सवालों के दायरे में हैं।
NAIC ने दोनों बीमा कंपनियों पर विशिष्ट जानकारी नहीं दी
24 सितंबर के पत्र में NAIC ने वॉरेन के पहले भेजे गए सूचना अनुरोध का जवाब दिया। सीनेट बैंकिंग कमेटी की वरिष्ठ डेमोक्रेट सदस्य वॉरेन ने पूछा था कि निजी इक्विटी स्वामित्व से बीमा कंपनियों के लिए कौन से जोखिम पैदा हो सकते हैं। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि क्या पॉलिसीधारकों से मिले प्रीमियम को अधिक जोखिम वाली परिसंपत्तियों में लगाया गया और क्या कुछ निवेशों को नियामकीय रिपोर्टों में छिपाया या गलत वर्गीकृत किया गया।
वॉरेन ने खास तौर पर डेलावेयर लाइफ और क्लियर स्प्रिंग लाइफ एंड एन्युइटी पर सवाल उठाए। दोनों कंपनियां वाल्टर की कंपनी गुगेनहाइम पार्टनर्स के स्वामित्व में हैं और संघीय स्तर की जांच का सामना कर रही हैं। हालांकि, राज्य बीमा आयुक्तों ने अपने पत्र में इनमें से किसी भी कंपनी से जुड़ी विशिष्ट नियामकीय जानकारी साझा नहीं की।
जीवन बीमा क्षेत्र में निजी इक्विटी की भागीदारी को लेकर उठने वाली चिंताओं में संबंधित पक्षों के बीच लेनदेन, बढ़ी हुई प्रबंधन फीस और बीमा कंपनी तथा उससे जुड़े निवेश प्लेटफॉर्म के बीच संभावित हितों का टकराव शामिल है। वॉरेन ने NAIC से इस विषय पर एक दर्जन से अधिक जुड़े सवालों के जवाब मांगे थे। उन्होंने यह भी पूछा था कि बीमा कंपनियां कैसे सुनिश्चित करती हैं कि प्रीमियम आय ऐसे निवेशों में न जाए जो जोखिम प्रबंधन की आवश्यकताओं को पूरा नहीं करते।
अब तक बड़े उल्लंघन का मामला नहीं मिला
पत्र पर वर्जीनिया के बीमा आयुक्त और NAIC के अध्यक्ष स्कॉट व्हाइट तथा रोड आइलैंड के डिपार्टमेंट ऑफ बिजनेस रेगुलेशन की निदेशक और NAIC की अध्यक्ष-निर्वाचित एलिजाबेथ केलेहर ड्वायर ने हस्ताक्षर किए। यूटा के बीमा आयुक्त जॉन पाइक और साउथ कैरोलिना डिपार्टमेंट ऑफ इंश्योरेंस के निदेशक माइकल वाइज भी हस्ताक्षरकर्ताओं में शामिल थे।
NAIC ने कहा कि अब तक उसे ऐसा कोई महत्वपूर्ण मामला नहीं मिला है जिसमें निजी कंपनियों ने पॉलिसीधारकों के प्रीमियम को उच्च जोखिम वाले निवेशों में लगाया हो और साथ ही उन निवेशों का खुलासा न किया हो या उनका सही वर्गीकरण न किया हो। व्हाइट और अन्य नियामकों ने यह भी कहा कि राज्य के बीमा कानून पहले से ही जीवन बीमा कंपनियों को अपेक्षित बकाया नुकसान और दावों की देनदारी को पूरा करने के लिए पर्याप्त रिजर्व रखने को कहते हैं। उदाहरण के लिए, न्यूयॉर्क में बीमा कंपनियों को उन सभी संभावित नुकसान और दावों का भुगतान करने के लिए पर्याप्त रिजर्व रखना होता है, जिनकी जिम्मेदारी उन पर आ सकती है।
वॉरेन ने वाल्टर की कंपनी की परिसंपत्तियों में इन दोनों जीवन बीमा कंपनियों से जुड़े हिस्से की रिपोर्टिंग में हुए बदलाव पर भी सवाल उठाया। यह हिस्सा पहले कंपनी की परिसंपत्तियों का करीब 3% बताया गया था, जिसे बाद में संशोधित कर 42% कर दिया गया। वॉरेन के अनुसार, इस बदलाव ने संघीय जांच को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई।
निजी बाजारों में बढ़े निवेश के साथ बदली निगरानी
NAIC ने कहा कि बीमा कंपनियों के स्वामित्व ढांचे और निवेश रणनीतियों में बदलाव के साथ बीमा नियमन भी लगातार विकसित हुआ है। हाल के वर्षों में राज्य नियामकों ने उभरते जोखिमों की पहचान करने के लिए पूंजी आवश्यकताओं, रिपोर्टिंग मानकों, निगरानी उपकरणों और विश्लेषणात्मक क्षमताओं को अपडेट किया है। साथ ही, बीमा कंपनियों की सॉल्वेंसी और पॉलिसीधारकों की सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियों को बनाए रखा गया है।
संगठन के अनुसार, इन उपकरणों का आधुनिकीकरण यह नहीं दिखाता कि राज्य व्यवस्था में ऐसी कमी है जिसे दूर करने के लिए संघीय सुरक्षा उपाय जरूरी हों। इसके बजाय, ये बदलाव बताते हैं कि राज्य नियामक बाजार में हो रहे परिवर्तनों के अनुरूप विवेकपूर्ण नियामकीय मानकों को अपडेट कर रहे हैं।
2022 से पहले बेहद कम ब्याज दरों के दौर में कई बीमा कंपनियों ने निवेश रिटर्न बढ़ाने के लिए जटिल निजी बाजार परिसंपत्तियों में अपना जोखिम बढ़ाया था। NAIC ने कहा कि इनमें ऐसे साधन शामिल हो सकते हैं जो अधिक प्रतिफल देते हैं, लेकिन उनकी तरलता सीमित होती है। बाजार पर दबाव बढ़ने की स्थिति में इनके नकदी प्रवाह के प्रदर्शन की अधिक बारीकी से जांच करनी पड़ती है।
इसी संदर्भ में NAIC ने 2025 में बॉन्ड की सिद्धांत-आधारित परिभाषा अपनाई। इसके तहत प्रतिभूतियों का वर्गीकरण केवल उनके नाम या कानूनी स्वरूप के आधार पर नहीं, बल्कि अंतर्निहित नकदी प्रवाह और क्रेडिट एन्हांसमेंट के आधार पर किया जाएगा। संगठन ने रेजिडुअल ट्रांच और निजी ऋण की रेटिंग पर निगरानी भी कड़ी की है, ताकि ऐसी संरचनाओं के जरिये सीधे NAIC नियामकीय परीक्षण से बचने की गुंजाइश कम हो।
ऑफशोर पुनर्बीमा और रिजर्व पर बढ़ी जांच
NAIC ने यह आकलन करने के लिए एक्चुरियल मार्गदर्शन में भी बदलाव किया है कि जटिल और अधिक प्रतिफल देने वाली परिसंपत्तियां बाजार में तनाव के दौरान बीमा दायित्वों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नकदी प्रवाह पैदा कर सकती हैं या नहीं। इसके साथ ही, राज्य नियामक परिसंपत्ति-गहन पुनर्बीमा बाजार की निगरानी बढ़ा रहे हैं।
हाल के वर्षों में अमेरिकी बीमा कंपनियों ने एन्युइटी और जीवन बीमा से जुड़ी अरबों डॉलर की देनदारियां ऑफशोर सहयोगी कंपनियों या कैप्टिव पुनर्बीमाकर्ताओं को हस्तांतरित की हैं। ये संस्थाएं अक्सर ऐसे न्यायक्षेत्रों में स्थित होती हैं जहां पूंजी आवश्यकताएं कम होती हैं। इसलिए राज्य नियामक यह जांच रहे हैं कि देनदारियां हस्तांतरित होने के बाद भी रिजर्व और उन्हें समर्थन देने वाली पूंजी पर्याप्त बनी रहती है या नहीं।
राज्य नियामक वर्ष 2026 के अंत की फाइलिंग के लिए अतिरिक्त मार्गदर्शन पर भी विचार कर रहे हैं। इसके तहत बीमा कंपनियों को यह अधिक विस्तार से बताना पड़ सकता है कि रिजर्व की गणना कैसे की गई, कौन सी परिसंपत्तियां उन्हें समर्थन देती हैं और रिजर्व का स्तर घटने के क्या कारण हैं। 2026 के अंत की फाइलिंग से बीमा कंपनियों को निजी निवेशों की रिपोर्टिंग एक मानकीकृत डेटा सेट के माध्यम से करनी होगी।
इस तरह निजी इक्विटी स्वामित्व वाली जीवन बीमा कंपनियों से जुड़ा विवाद परिसंपत्ति मूल्यांकन, संबंधित पक्षों के लेनदेन, रिजर्व कवरेज और ऑफशोर पुनर्बीमा से जुड़े खुलासों पर केंद्रित रहने की संभावना है। NAIC के जवाब से संकेत मिलता है कि राज्य नियामक इन मुद्दों पर रिपोर्टिंग और पूंजी नियमों को अपडेट करके कार्रवाई करना चाहते हैं। वहीं, वाल्टर से जुड़ी दोनों बीमा कंपनियां और उनकी घोषित परिसंपत्ति हिस्सेदारी में हुआ बदलाव संघीय जांच तथा बाजार प्रतिभागियों के लिए विशिष्ट ध्यान का विषय बने हुए हैं।