अमेरिकी अपील अदालत ने उस फैसले को बरकरार रखा है जिसमें फेडरल रिजर्व की डेबिट कार्ड इंटरचेंज शुल्क सीमा को संघीय कानून के अनुरूप न होने की आशंका जताई गई थी। इससे फेड को Regulation II में बदलाव करना पड़ सकता है। शुल्क सीमा घटने पर बैंकों की मर्चेंट से होने वाली वसूली और खुदरा कारोबारियों की भुगतान लागत, दोनों प्रभावित हो सकते हैं। फेड ने अभी यह नहीं बताया है कि वह सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगा या नया नियामकीय ढांचा तैयार करेगा।
अदालत ने 21 सेंट की समान सीमा पर उठाए सवाल
यह मामला फेड के डेबिट कार्ड शुल्क नियमों से जुड़ा है, जिन्हें 2010 के Dodd-Frank Act में शामिल Durbin Amendment के तहत बनाया गया था। 2011 से लागू ये नियम कम-से-कम 10 अरब डॉलर की परिसंपत्तियों वाले बैंकों पर लागू होते हैं। इनके तहत प्रति लेनदेन इंटरचेंज शुल्क 21 सेंट तक सीमित है। धोखाधड़ी रोकथाम के लिए 1 सेंट अतिरिक्त शुल्क और धोखाधड़ी से हुए नुकसान की भरपाई के लिए लेनदेन मूल्य का 0.05% भी स्वीकार्य है।
अपील अदालत के न्यायाधीश डेविड स्ट्रास ने अपने फैसले में कहा कि कानून के मुताबिक शुल्क सीमा हर लेनदेन की “अतिरिक्त लागत” को दर्शानी चाहिए। लेकिन फेड की गणना में कुछ ऐसी लागतें भी शामिल थीं जो हर लेनदेन के साथ नहीं बढ़तीं। इनमें प्राधिकरण, क्लियरिंग और सेटलमेंट की स्थिर लागत, नेटवर्क प्रोसेसिंग शुल्क, लेनदेन की निगरानी और धोखाधड़ी से हुए नुकसान शामिल थे।
स्ट्रास ने कहा कि हर लेनदेन पर एक ही 21 सेंट की सीमा लागू होना इस बात को दिखाता है कि नियम कानून की मंशा से अलग है, क्योंकि वास्तविक लागत लेनदेन के अनुसार बदलती है। सोमवार के फैसले ने पिछले साल निचली अदालत के उस निर्णय को कायम रखा, जिसने Regulation II के संबंधित प्रावधान रद्द कर दिए थे। अपील अदालत ने यह नहीं बताया कि फेड को अब किस प्रक्रिया से आगे बढ़ना चाहिए।
खुदरा कारोबारियों का कहना है कि बैंक जरूरत से ज्यादा शुल्क लेते हैं
यह मुकदमा 2021 में नॉर्थ डकोटा के ट्रक-स्टॉप संचालक Corner Post ने दायर किया था। खुदरा कारोबारियों, उद्योग संगठनों और संशोधन पेश करने वाले इलिनॉय के डेमोक्रेटिक सीनेटर डिक डर्बिन ने भी इस चुनौती के समर्थन में अदालत में पक्ष रखा।
खुदरा दुकानों, सुपरमार्केट, सुविधा स्टोर, गैस स्टेशन और ऑनलाइन कारोबारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले Merchant Payments Coalition ने फैसले का स्वागत किया। संगठन की कार्यकारी समिति के सदस्य और National Association of Convenience Stores के जनरल काउंसल डग कांटोर ने कहा कि अदालतें अब दो बार यह मान चुकी हैं कि मौजूदा दरों के तहत बैंक हर साल कारोबारियों और उनके ग्राहकों से कांग्रेस की मंशा से अधिक शुल्क वसूल सकते हैं। उन्होंने फेड से जल्द कानून के अनुरूप नियम जारी करने को कहा और कहा कि कारोबारी रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर दबाव कम करना चाहते हैं।
फैसले में न तो नई शुल्क दर तय की गई है, न ही यह बताया गया है कि शुल्क कितना घट सकता है। बैंकिंग संगठन सुप्रीम कोर्ट से मामले की समीक्षा करने की मांग कर सकते हैं। Stifel के मुख्य वॉशिंगटन नीति रणनीतिकार ब्रायन गार्डनर को उम्मीद है कि उद्योग संगठन आने वाले हफ्तों में ऐसी याचिका दायर कर सकते हैं।
फेड का 2023 का प्रस्ताव नए नियमों का आधार बन सकता है
Keefe, Bruyette & Woods के मुताबिक, फेड मौजूदा व्यवस्था की जगह कम-से-कम एक अंतरिम नियम बनाने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। इसके लिए केंद्रीय बैंक का 2023 का सुधार प्रस्ताव संदर्भ बन सकता है। उस समय पर्यवेक्षण के उपाध्यक्ष रहे माइकल बार के नेतृत्व में पेश योजना में मूल शुल्क सीमा 14.4 सेंट, धोखाधड़ी से हुए नुकसान के लिए 0.04% का समायोजन और धोखाधड़ी रोकथाम के लिए 1.3 सेंट का अतिरिक्त समायोजन प्रस्तावित था।
उस समय फेड के अनुमान के मुताबिक, 50 डॉलर के लेनदेन पर शुल्क मौजूदा नियमों के तहत 24.5 सेंट से घटकर 17.7 सेंट हो सकता था—करीब 28% की कमी। यह प्रस्ताव अंतिम नियम नहीं बना था और अपील अदालत ने फेड को इसे अपनाने का निर्देश भी नहीं दिया।
TD Cowen के प्रबंध निदेशक जेरेट सीबर्ग ने कहा कि अगर नया नियम स्थिर लागतों को पूरी तरह बाहर रखता है, तो बड़े बैंकों के लिए डेबिट इंटरचेंज शुल्क प्रति लेनदेन 5 सेंट से नीचे जा सकता है। फिलहाल दर 21 सेंट के साथ लेनदेन राशि का 5 बेसिस पॉइंट है। यह अनुमान संभावित बदलाव का आकार दिखाता है, लेकिन अंतिम शुल्क इस बात पर निर्भर करेगा कि फेड कानून के तहत शामिल की जा सकने वाली लागतों की गणना कैसे करता है।
सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसलों ने चुनौती का रास्ता खोला
पुराने नियम को चुनौती देने में Corner Post की क्षमता 2024 के सुप्रीम कोर्ट के दो फैसलों से प्रभावित हुई। Loper Bright Enterprises v. Raimondo मामले में अदालत ने उस प्रथा को पलट दिया जिसके तहत अस्पष्ट कानूनों की व्याख्या में आम तौर पर संघीय एजेंसियों को अधिक छूट दी जाती थी। Corner Post से जुड़े एक अलग मामले में अदालत ने कहा कि संघीय एजेंसी के नियम को चुनौती देने की छह साल की समय-सीमा जरूरी नहीं कि नियम जारी होने के दिन से शुरू हो; इसकी शुरुआत उस समय हो सकती है जब वादी को नुकसान पहुंचे।
इस फैसले से Corner Post को वर्षों से लागू नियम के खिलाफ मुकदमा करने का रास्ता मिला। अब अपील अदालत ने संबंधित प्रावधानों को रद्द करने के फैसले को बरकरार रखा है। आगे की दिशा इस पर निर्भर करेगी कि सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर होती है या नहीं और फेड नया नियम कैसे तैयार करता है। बैंकों, कारोबारियों और उपभोक्ताओं के लिए शुल्क की नई गणना-पद्धति और उसे लागू करने की समय-सारणी अभी तय नहीं है।