लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा ने राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर में 51.77% वोट हासिल कर दक्षिणपंथी उम्मीदवार फ्लावियो बोल्सोनारो को हराया। नतीजे के बाद ब्राज़ील के शेयरों में तेज गिरावट आई और रियल पर दबाव बढ़ा। निवेशक अब देश की राजकोषीय स्थिति, महंगाई की उम्मीदों और ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश का फिर से आकलन कर रहे हैं।
बाज़ार की प्रतिक्रिया मतदान से पहले बनी निवेशक पोज़िशनों में बदलाव को भी दर्शाती है। पहले दौर के बाद कुछ निवेशकों ने कड़े राजकोषीय नियमों और सार्वजनिक वित्त में सुधार की उम्मीद पर दांव लगाया था। इस आकलन में कम ब्याज दरों और खर्च पर अधिक संयम की संभावना भी शामिल थी। लूला की जीत से ये उम्मीदें सवालों के घेरे में आ गई हैं।
चुनावी दांव पर बदला बाज़ार का रुख
AW Capital के एसेट एलोकेशन प्रमुख और पार्टनर गेब्रियल मैग्नो ने कहा था कि लूला की जीत पहले दौर के बाद बनी बाज़ार कीमतों को पलट सकती है और इसका असर शेयरों, ब्याज दरों तथा डॉलर पर पड़ सकता है। निवेशक बेहतर सार्वजनिक वित्त, कम दरों और अधिक सतर्क राजकोषीय प्रबंधन को ध्यान में रख रहे थे। लूला की जीत के बाद इस परिदृश्य में भरोसा कमजोर हुआ, जिससे पहले हुई बढ़त का कुछ हिस्सा वापस जाने की गुंजाइश बनी।
चुनाव के बाद शेयरों में आई तेज गिरावट दिखाती है कि निवेशक ब्राज़ील की परिसंपत्तियों का आकलन कितनी जल्दी बदल रहे हैं। गिरावट के पीछे राजकोषीय अनुशासन, ब्याज दरों की दिशा और नीतियों की निरंतरता को लेकर चिंताएं थीं। हालांकि, केवल चुनावी नतीजे से यह तय नहीं होता कि नई सरकार कौन-से कदम उठाएगी।
महंगाई और ब्याज दरों पर निवेशकों की नज़र
अब निवेशक देखेंगे कि सरकार सार्वजनिक खर्च और राजकोषीय ढांचे को किस तरह संभालती है। यदि बाज़ार को लगे कि राजकोषीय पाबंदियां पर्याप्त नहीं हैं, तो महंगाई की उम्मीदें बढ़ सकती हैं और ब्राज़ील के केंद्रीय बैंक के लिए ब्याज दरें घटाना मुश्किल हो सकता है। उधारी की ऊंची लागत कंपनियों के वित्तपोषण खर्च, शेयरों के मूल्यांकन और स्थानीय मुद्रा वाली परिसंपत्तियों के आकर्षण पर भी असर डाल सकती है।
रियल और शेयर—दोनों ही नीतिगत उम्मीदों में बदलाव के प्रति संवेदनशील हैं। कमजोर मुद्रा से आयात की लागत बढ़ सकती है और महंगाई का परिदृश्य प्रभावित हो सकता है। विनिमय दर और ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव विदेशी निवेशकों के ब्राज़ील की परिसंपत्तियों में निवेश के फैसलों को भी आकार दे सकता है। फिलहाल, बाज़ार की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि निवेशक सरकार की राजकोषीय प्रतिबद्धताओं और आगे के नीतिगत फैसलों को कैसे देखते हैं।
निवेशक नई सरकार के संकेतों का इंतज़ार कर रहे हैं
मतदान से पहले कुछ विश्लेषकों का मानना था कि बाज़ार ने मुक्त-बाज़ार नीतियों के जारी रहने की संभावना को आंशिक रूप से कीमतों में शामिल कर लिया है। पहले दौर के बाद निवेशकों ने अपनी पोज़िशन बदली और कड़े राजकोषीय ढांचे की उम्मीद पर दांव लगाया। लूला की जीत से इस पोज़िशनिंग का कुछ हिस्सा पलट सकता है, जिससे उससे जुड़ी परिसंपत्तियों पर दबाव पड़ सकता है।
हालांकि, इस बिकवाली का असर हर क्षेत्र पर समान होना तय नहीं है। शुरुआती प्रतिक्रिया कितनी देर बनी रहती है, यह समझने के लिए निवेशकों को नई सरकार की राजकोषीय नीति, महंगाई और ब्याज दरों की दिशा पर नज़र रखनी होगी। अभी तक तत्काल प्रतिक्रिया स्पष्ट है: 51.77% वोट के साथ लूला की जीत के बाद ब्राज़ील के शेयर और रियल दबाव में आए हैं, और बाज़ार में राजकोषीय नीति तथा ब्याज दरें प्रमुख चिंता बनी हुई हैं।