क्वांटम कंप्यूटिंग अभी क्रिप्टो संपत्तियों के लिए तत्काल खतरा नहीं है, लेकिन संभावित हमले से बचाव की तैयारी में वर्षों लग सकते हैं। अनुमान है कि करीब 2 ट्रिलियन डॉलर की डिजिटल संपत्तियां एलिप्टिक-कर्व क्रिप्टोग्राफी पर निर्भर हैं, जबकि पूरे क्रिप्टो बाजार का मूल्य लगभग 2.8 ट्रिलियन डॉलर है। इस जोखिम को घटाने के लिए ब्लॉकचेन नेटवर्क, कस्टोडियन और संपत्ति धारकों को मिलकर बदलाव करने होंगे। बदलाव के लिए कोई साझा नियम तय नहीं है; इसलिए अपग्रेड का खर्च कौन उठाएगा और उन संपत्तियों का क्या होगा जिनके मालिकों से संपर्क नहीं हो सकता, यह अभी खुला सवाल है।
पोस्ट-क्वांटम मानक तैयार, नेटवर्क अपग्रेड का इंतजार
पर्याप्त शक्तिशाली क्वांटम कंप्यूटर के सामने एलिप्टिक-कर्व क्रिप्टोग्राफी को असुरक्षित माना जाता है। 2024 में अमेरिकी राष्ट्रीय मानक एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (NIST) ने पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी मानकों को मंजूरी दी, जिससे प्रणालियों को अपनाने के लिए नए विकल्प मिले। हालांकि, इन मानकों से मौजूदा क्रिप्टो संपत्तियां अपने आप क्वांटम-प्रतिरोधी नहीं बनतीं। वॉलेट और कस्टडी सेवा प्रदाता बदलाव कर सकें, उससे पहले ब्लॉकचेन नेटवर्क को नए तरह के डिजिटल हस्ताक्षरों का समर्थन करना होगा।
बिटकॉइन के मामले में चिंता लेनदेन पर हस्ताक्षर करने में इस्तेमाल होने वाली क्रिप्टोग्राफी को लेकर है। इसका अर्थ यह नहीं है कि नेटवर्क की हैशिंग, माइनिंग या पूरा ऐतिहासिक लेजर एक साथ विफल हो जाएगा। जोखिम भले ही मुख्य रूप से वॉलेट स्तर पर केंद्रित हो, लेकिन बड़े बैलेंस या कमजोर कुंजियों से सुरक्षित स्टेबलकॉइन नियंत्रणों से जुड़े नुकसान का असर धारकों से आगे काउंटरपार्टी, बाजार और दूसरे प्रोटोकॉल तक पहुंच सकता है।
बड़े हस्ताक्षरों से बैंडविड्थ और स्टोरेज पर दबाव
इस बदलाव में व्यावहारिक इंजीनियरिंग चुनौतियां भी हैं। पारंपरिक ECDSA हस्ताक्षर का आकार करीब 64 बाइट होता है, जबकि ML-DSA-65 हस्ताक्षर लगभग 3,309 बाइट का है—करीब 52 गुना बड़ा। ML-DSA-87 हस्ताक्षर लगभग 4,627 बाइट का होता है। इसमें इस योजना के साथ आने वाली बड़ी सार्वजनिक कुंजियों का आकार शामिल नहीं है।
बड़े हस्ताक्षरों से नेटवर्क ट्रैफिक और डेटा स्टोरेज की जरूरत बढ़ेगी। फीस और थ्रूपुट के अनुमानों पर भी असर पड़ सकता है। पुराने डेटा आकारों के हिसाब से बने हार्डवेयर वॉलेट और कस्टडी सिस्टम को भी बदलना पड़ सकता है। मल्टीसिग्नेचर व्यवस्था कुछ परिचालन जोखिम घटा सकती है, लेकिन अगर सभी हस्ताक्षर उसी कमजोर क्रिप्टोग्राफिक तरीके पर निर्भर हों तो अतिरिक्त सुरक्षा-स्तर उस कमजोरी को दूर नहीं करेंगे। कोल्ड स्टोरेज चोरी हुई कुंजियों या प्रभावित डिवाइस से जोखिम सीमित कर सकता है; लेकिन मूल क्रिप्टोग्राफी टूटने पर सार्वजनिक कुंजी से निजी कुंजी निकाले जाने की आशंका को नहीं रोकता।
बदलाव की जिम्मेदारी पूरे इकोसिस्टम में बंटी हुई है। प्रोटोकॉल डेवलपर को समर्थन जोड़ना होगा, कस्टोडियन इसके लिए संबंधित नेटवर्क पर निर्भर हैं और स्व-कस्टडी में संपत्ति रखने वालों को खुद कदम उठाने होंगे। नोड संचार, कंसेंसस, जीरो-नॉलेज प्रूफ, क्रॉस-चेन ब्रिज और कस्टडी ढांचे—सभी की अपनी क्रिप्टोग्राफिक मान्यताएं हैं। केवल लेनदेन के हस्ताक्षर बदलने से सिस्टम के हर हिस्से का जोखिम दूर नहीं होगा।
शुरुआती अपग्रेड की लागत और खोए वॉलेट की चुनौती
खतरा अभी दूर होने के कारण बाजार के प्रतिभागियों के पास इंतजार करने का प्रोत्साहन हो सकता है। जल्दी अपग्रेड करने वाली संस्थाओं को विकास का खर्च उठाना होगा, कस्टडी सिस्टम में बदलाव करना होगा और हार्डवेयर व प्रक्रियाएं अपडेट करनी होंगी। देर से कदम उठाने वाले तकनीक और मानकों के परिपक्व होने तक इंतजार कर सकते हैं। अलग-अलग स्तर पर सावधानी से लिए गए फैसले पूरे उद्योग के बदलाव को लंबा खींच सकते हैं।
बड़ी मात्रा में संपत्ति संभालने वाले एक्सचेंज और कस्टोडियन पहले कदम उठा सकते हैं। छोटे सेवा प्रदाताओं और व्यक्तिगत धारकों को अधिक समय लग सकता है। Coinbase ने छोड़े गए या पहुंच से बाहर वॉलेट की समस्या भी उठाई है: स्वैच्छिक बदलाव से निष्क्रिय खातों का अपडेट होना सुनिश्चित नहीं किया जा सकता, और जिन धारकों की कुंजियां खो गई हैं वे प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकते।
अगर पुराने पते अनिश्चितकाल तक इस्तेमाल किए जा सकते हैं, तो बदलाव न की गई संपत्तियां जोखिम में बनी रह सकती हैं। इसके उलट, बदलाव की समय-सीमा तय करने से उन संपत्तियों पर फैसला लेना पड़ेगा जो तब तक स्थानांतरित नहीं हुईं—जैसे उन्हें फ्रीज या नष्ट करना, अथवा उन पर दूसरी पाबंदियां लगाना। हर विकल्प से गवर्नेंस विवाद पैदा हो सकते हैं और फिलहाल इसका कोई सीधा समाधान नहीं है।
समय-सीमा तय होने पर निष्क्रिय संपत्तियों का भविष्य भी तय होगा
संभावित उपायों में पुराने हस्ताक्षर तरीकों को चरणबद्ध तरीके से बंद करना, एक्सचेंज और कस्टोडियन द्वारा कमजोर पते के प्रकारों पर रोक लगाना, या बीमा शर्तों, संस्थागत काउंटरपार्टी और नियामकीय आवश्यकताओं के जरिए बदलाव को बढ़ावा देना शामिल है। अभी कोई साझा नियम या समय-सारिणी तय नहीं हुई है। खुली अवधि वाला बदलाव संपत्तियों को तुरंत हटाने का दबाव टाल सकता है, लेकिन पुरानी कुंजियां सालों तक सिस्टम में बनी रह सकती हैं। सख्त समय-सीमा तय होने पर बदलाव न की गई संपत्तियों के बारे में फैसला पहले करना होगा।
Google का 2029 का प्रस्तावित बदलाव लक्ष्य उसके अपने सिस्टम के लिए है। इसका मतलब यह नहीं कि क्वांटम कंप्यूटिंग की क्षमता उसी साल उपलब्ध हो जाएगी या यह क्रिप्टो उद्योग के लिए सुरक्षा की समय-सीमा है। फिर भी, प्रोटोकॉल, वॉलेट, कस्टोडियन, एक्सचेंज और व्यक्तिगत धारकों तक फैले अपग्रेड में समय लगेगा। बाजार के सामने चुनौती सिर्फ यह अनुमान लगाने की नहीं है कि क्वांटम कंप्यूटर मौजूदा क्रिप्टोग्राफी के लिए कब खतरा बन सकते हैं; बदलाव की शर्तों और तय समय तक स्थानांतरित न हो सकने वाली संपत्तियों के नियमों पर सहमति बनाना भी उतना ही जरूरी है।