अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के सेवानिवृत्त होने की तैयारी के बीच NASA ने अक्टूबर में वाणिज्यिक अंतरिक्ष स्टेशनों के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए। इसी दौरान SpaceX ने 2028 के अंत के बाद की तारीखों के लिए राइडशेयर लॉन्च बुकिंग रोक दी। ये घटनाक्रम वाणिज्यिक अंतरिक्ष क्षेत्र की एक बड़ी चुनौती दिखाते हैं: परियोजनाओं को शुरुआत में भारी पूंजी चाहिए, लेकिन वैश्विक मांग को पक्के ऑर्डर और निर्माण-वित्तपोषण में बदलने के रास्ते सीमित हैं।
कम लागत वाले राइडशेयर लॉन्च पर निर्भर स्टार्टअप के लिए क्षमता तक सीमित पहुंच कारोबार की योजनाओं को प्रभावित कर सकती है। Nebex के CEO तेजपाल भाटिया का तर्क है कि NASA सिर्फ अपना बजट बढ़ाने से आगे भी कदम उठा सकता है। संभावित ग्राहकों, आपूर्तिकर्ताओं और वित्तपोषण को खरीद प्रक्रिया में पहले जोड़ने से वाणिज्यिक स्टेशनों और अगली पीढ़ी के रॉकेटों की किसी एक सरकारी खरीदार या लॉन्च प्रदाता पर निर्भरता कम हो सकती है।
नए लॉन्च विकल्प मौजूद, पर नियमित क्षमता साबित होना बाकी
2028 के बाद के लिए राइडशेयर बुकिंग रोकने के SpaceX के फैसले से उन कंपनियों के सामने अनिश्चितता बढ़ी है, जिनका कारोबार बार-बार होने वाले कम लागत वाले लॉन्च पर निर्भर है। विकल्प उपलब्ध हैं, लेकिन उनकी क्षमता और तैयारी का स्तर अलग-अलग है। Rocket Lab का Electron छोटे उपग्रहों के लिए समर्पित लॉन्च उपलब्ध कराता है। ULA का Vulcan और Blue Origin का New Glenn बड़े पेलोड के लिए बनाए गए हैं, लेकिन उस समय दोनों रॉकेट उड़ान से बाहर थे: Vulcan फरवरी से और New Glenn अप्रैल से ग्राउंडेड था।
नए प्रतिस्पर्धी भी आगे बढ़ रहे हैं। Isar Aerospace ने Planet के साथ लॉन्च अनुबंध हासिल किया है, जबकि Stoke Space ने 1 अरब डॉलर जुटाए हैं और 2027 में अपना पहला लॉन्च करने का लक्ष्य रखा है। Rocket Lab को भी उम्मीद है कि उसका बड़ा Neutron रॉकेट उसी साल पहली उड़ान भरेगा। भारत की Skyroot ने अपने Vikram 1 रॉकेट के लिए पहला निजी कक्षीय मिशन पूरा किया है। हालांकि, इनमें से अधिकांश विकल्पों ने स्थापित कंपनियों जैसी लगातार लॉन्च क्षमता और भरोसेमंद सेवा अभी साबित नहीं की है।
SpaceX के Starship ने सितंबर में अपनी पहली कक्षीय उड़ान पूरी की और आगे चलकर कुल लॉन्च क्षमता बढ़ा सकता है। लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि तीसरे पक्ष की लॉन्च सेवाओं पर निर्भर कंपनियों को भी उस क्षमता तक पहुंच मिलेगी या नहीं। स्टार्टअप के लिए सवाल सिर्फ यह नहीं कि नए रॉकेट उड़ान भरेंगे या नहीं, बल्कि यह भी है कि वे कब नियमित सेवा और तुलनीय लागत उपलब्ध करा पाएंगे।
सरकारी खर्च बड़ा, वाणिज्यिक वित्तपोषण सीमित
भाटिया के मुताबिक, अंतरिक्ष क्षेत्र में सरकारी मांग की कमी नहीं है। Space Foundation ने पिछले वर्ष अंतरिक्ष पर सरकारी खर्च करीब 141 अरब डॉलर आंका था और बजट अब भी बढ़ रहे हैं। उनका कहना है कि अंतर यह है कि वाणिज्यिक अंतरिक्ष कंपनियों के रूप में पेश किए जाने वाले कई कारोबार अब भी अमेरिकी सरकार को अपना मुख्य ग्राहक मानते हैं। इससे बाजार खड़ा करने की लागत का बड़ा हिस्सा करदाताओं पर पड़ता है।
सितंबर में NASA के प्रशासक Jared Isaacman ने एक पूर्व NASA अधिकारी की मानवयुक्त अंतरिक्ष यान के लिए एजेंसी का वित्तपोषण बढ़ाने की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि हर समस्या या अवसर को केवल “वाणिज्यिक” नहीं कहा जा सकता। भाटिया भी मानते हैं कि NASA बाजार की हर कमी पूरी नहीं कर सकता। उनके अनुसार, मांग आपूर्ति से अधिक होने पर भी वाणिज्यिक बाजार अपने आप नहीं बनता; खरीदारों और प्रदाताओं को जोड़ने के लिए खरीद नियम और बाजार ढांचा जरूरी हैं।
भाटिया 2021 में अंतरिक्ष क्षेत्र में आए। अगले चार वर्षों में उन्होंने इटली, स्वीडन, तुर्की, भारत, पोलैंड, हंगरी, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के सरकारी अंतरिक्ष यात्रियों के लिए ISS की यात्राओं की व्यवस्था में मदद की। उन्होंने Fortune 100 कंपनियों के साथ कक्षीय कंप्यूटिंग, दवा अनुसंधान और अंतरिक्ष में विनिर्माण से जुड़े पेलोड कक्षा में भेजने के सौदे भी किए। भाटिया का कहना है कि इन परियोजनाओं से अमेरिकी सरकारी अनुबंधों पर निर्भर हुए बिना 1 अरब डॉलर का नया सरकारी और वाणिज्यिक कारोबार पैदा हुआ। उनका अनुभव इस दलील का आधार है कि सार्वजनिक और निजी पक्षों के बीच सौदों और वित्तपोषण की संरचना बेहतर करके वाणिज्यिक अंतरिक्ष क्षेत्र की आय बढ़ाई जा सकती है।
NASA आपूर्तिकर्ताओं, ग्राहक प्रतिबद्धताओं और कर्ज को जोड़ सकता है
ISS के विकल्प के लिए NASA की हालिया प्रस्ताव प्रक्रिया में उन बोलियों पर सीमाएं हैं जो करदाताओं के पैसे पर बहुत अधिक निर्भर हों या लंबे समय तक घाटा दिखाएं। साथ ही, वाणिज्यिक और सरकारी ग्राहकों से होने वाली आय को महत्व दिया गया है। लेकिन भाटिया के मुताबिक, प्रस्ताव जमा करने की छोटी समयसीमा और मानवयुक्त उड़ान का कड़ा अनुभव जरूरी होने से मुख्य ठेकेदार पारंपरिक एयरोस्पेस आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर रह सकते हैं। उन्हें हार्डवेयर पहले ऊंची कीमत पर खरीदना पड़ सकता है, जबकि अंतरराष्ट्रीय और वाणिज्यिक ग्राहकों के मिलने में कई साल लग सकते हैं।
भाटिया NASA का बजट सीधे बढ़ाने के बजाय खरीद प्रक्रिया और परियोजना-वित्तपोषण में बदलाव का सुझाव देते हैं। पहला, NASA आपूर्तिकर्ताओं की समीक्षा सरल कर सकता है और सहयोगी तथा साझेदार देशों की कंपनियों को परियोजनाओं में पहले शामिल कर सकता है। इससे हार्डवेयर और सेवाओं की लागत घट सकती है। ये कंपनियां और उनकी सरकारें भविष्य के स्टेशनों में सिर्फ विक्रेता नहीं, बल्कि साझेदार और ग्राहक भी बन सकती हैं।
दूसरा, परियोजनाओं में साझेदारों से सुविधाओं का इस्तेमाल करने की बाध्यकारी और पारस्परिक प्रतिबद्धताएं पहले हासिल की जा सकती हैं। इससे स्टेशन के कक्षा में पहुंचने से पहले ही मांग का स्पष्ट आधार बनेगा। तीसरा, NASA के माइलस्टोन भुगतान अक्सर बड़ी तकनीकी उपलब्धियां हासिल होने के बाद केंद्रित होते हैं। भाटिया का सुझाव है कि एजेंसी बाजार ढांचे से जुड़े वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर प्रतिबद्ध ग्राहकों से होने वाली आय के आधार पर शुरुआती आपूर्तिकर्ता लागत का वित्तपोषण करने पर विचार करे। इससे विकासकर्ताओं को नकदी भंडार जल्दी खर्च करने या इक्विटी हिस्सेदारी घटाने का दबाव कम हो सकता है।
इसी तरीके से उभरते रॉकेटों के लिए लॉन्च मांग को भी एक साथ जोड़ा जा सकता है। वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं की खोज, ग्राहक प्रतिबद्धताओं और ऋण के रास्तों को एक ढांचे में लाने से मुख्य ठेकेदार कम लागत वाली बोलियां दे सकते हैं, अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को कक्षीय अर्थव्यवस्था में पहले भूमिका मिल सकती है और अमेरिकी करदाताओं पर बोझ घट सकता है। इसलिए NASA की प्रस्ताव शर्तें और खरीद की समयसीमा सिर्फ यह तय नहीं करेंगी कि अगला अंतरिक्ष स्टेशन कौन बनाएगा, बल्कि यह भी कि वाणिज्यिक ग्राहक उसकी आय का हिस्सा बनेंगे या नहीं।