लैटिन अमेरिका के शेयर बाजार में लंबे समय से जारी सुस्ती के बीच क्षेत्र पर केंद्रित 400 से अधिक इक्विटी फंड बंद हो चुके हैं और आईपीओ गतिविधि लगभग ठहर गई है। लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा के फिर से चुने जाने के बाद ब्राज़ील के शेयरों पर बिकवाली का दबाव बढ़ा है, जिससे क्षेत्रीय निवेश बाजार की चुनौतियां और गहरी हुई हैं। 1990 के दशक के मध्य से लैटिन अमेरिकी शेयरों में कारोबार कर रहे स्कॉट पाइपर का कहना है कि अब इस क्षेत्र में निवेश करना पहले से कहीं अधिक अकेला अनुभव बन गया है। उन्होंने कमोडिटी उछाल के दौरान बाजार का विस्तार और उसके बाद वर्षों में उसका सिकुड़ना देखा है।
लैटिन अमेरिका-केंद्रित फंड 2015 के शिखर से घटे
1990 के दशक के आखिर में कमोडिटी उछाल ने लैटिन अमेरिकी अर्थव्यवस्थाओं और वित्तीय बाजारों को सहारा दिया। इस तेजी के दौरान वॉल स्ट्रीट की कंपनियों ने क्षेत्र के लिए समर्पित कई फंड शुरू किए। निवेशकों की दिलचस्पी बोस्टन से हांगकांग तक फैली थी। क्षेत्रीय शेयरों की तेजी खत्म होने के बाद भी फंडों की संख्या बढ़ती रही और 2015 में यह 660 से ऊपर पहुंच गई।
इसके बाद बाजार में लंबे समय तक कमजोरी रहने से लैटिन अमेरिका-केंद्रित इक्विटी फंडों की संख्या लगातार घटती गई। 400 से अधिक फंड बंद हो चुके हैं। इससे निवेशकों के लिए क्षेत्र में विशेषज्ञता रखने वाले निवेश विकल्प कम हुए हैं और यह भी दिखता है कि परिसंपत्ति प्रबंधक लैटिन अमेरिकी शेयर बाजारों में पूंजी लगाने में पहले से कम रुचि ले रहे हैं। फंडों में यह गिरावट ऐसे समय आई है जब आईपीओ गतिविधि भी ठप है, जिससे क्षेत्र में इक्विटी के जरिए कंपनियों की पूंजी जुटाने और निवेशकों के विकल्प—दोनों पर असर पड़ा है।
लूला की वापसी के बाद ब्राज़ील में बिकवाली तेज
फंड उद्योग का संकुचन ब्राज़ील में हालिया बिकवाली से पहले ही शुरू हो गया था। लूला के फिर से चुने जाने के बाद शेयरों पर दबाव और बढ़ा, जबकि बाजार कमजोर प्रदर्शन के कई वर्षों से जूझ रहा था। लैटिन अमेरिका के पूंजी बाजारों में ब्राज़ील की बड़ी हिस्सेदारी के कारण वहां की कमजोरी ने पूरे क्षेत्र में निवेश का माहौल अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
उपलब्ध जानकारी में हालिया बिकवाली का पैमाना, फंडों के शुद्ध परिसंपत्ति मूल्य में बदलाव, आईपीओ की संख्या या फंड बंद होने का साल-दर-साल ब्योरा नहीं दिया गया है। इसलिए फंडों की दीर्घकालीन गिरावट और ब्राज़ील के शेयरों पर हाल का दबाव अलग-अलग घटनाक्रम हैं। दोनों मिलकर क्षेत्रीय इक्विटी बाजार में लगातार संकुचन और नई बिकवाली के दबाव को दर्शाते हैं।