यूरोप में बिजली की मांग वर्षों की स्थिरता के बाद फिर बढ़ने लगी है। औद्योगिक गतिविधियां कमजोर रहने और ऊर्जा लागत ऊंची बनी रहने के बावजूद इलेक्ट्रिक वाहन, इलेक्ट्रिक हीटिंग और तेजी से बढ़ते डेटा सेंटर खपत बढ़ा रहे हैं। इससे क्षेत्र के दीर्घकालिक बिजली परिदृश्य में बदलाव आ रहा है और नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के विस्तार के बीच ग्रिड को उन्नत करने का दबाव बढ़ रहा है।
2025 में यूरोपीय संघ की बिजली मांग 0.5% बढ़ी
Ember के आंकड़ों के अनुसार, यूरोपीय संघ में बिजली की मांग 2025 में 0.5% बढ़ी, जबकि 2024 में वृद्धि 1.9% रही थी। पिछले साल जर्मनी, इटली और स्पेन में अधिकांश महीनों के दौरान बिजली खपत अधिक रही। मौसम के प्रभाव को समायोजित करने के बाद पुर्तगाल और नॉर्डिक देशों में भी वृद्धि अधिक स्पष्ट रही।
इस गर्मी यूरोप में आई हीटवेव के बाद अधिक परिवारों ने एयर कंडीशनर लगाने पर विचार किया। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार, 2025 में यूरोप में घरेलू एयर कंडीशनर की पहुंच 23% थी। प्राकृतिक गैस की ऊंची कीमतें भी इलेक्ट्रिक हीटिंग की ओर बदलाव को प्रोत्साहित कर रही हैं, जिससे घरेलू ऊर्जा उपयोग में बिजली की हिस्सेदारी बढ़ रही है।
परिवहन भी बिजली मांग का एक प्रमुख स्रोत बन रहा है। ऊंची ईंधन कीमतों और अधिक किफायती इलेक्ट्रिक मॉडलों की उपलब्धता ने इलेक्ट्रिक वाहन बिक्री को समर्थन दिया है। स्वच्छ परिवहन समूह Transport & Environment के अनुसार, 2026 की दूसरी तिमाही में बैटरी-इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री किसी पूरे तिमाही में पहली बार पेट्रोल कारों से अधिक रही। उसके विश्लेषण में यह भी पाया गया कि सितंबर 2026 के मध्य तक घर पर चार्ज किए जाने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों को चलाने की लागत पेट्रोल या डीजल कारों की तुलना में 50% कम थी।
यूरोपीय ऑटोमोबाइल निर्माताओं के संगठन ACEA के आंकड़ों के अनुसार, ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड और नॉर्वे समेत यूरोप में बैटरी-इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री अगस्त में सालाना आधार पर 52.2% बढ़ी। ये आंकड़े दिखाते हैं कि ईंधन लागत उपभोक्ताओं के फैसलों को प्रभावित कर रही है और परिवहन क्षेत्र से बिजली मांग में लगातार वृद्धि की संभावना बनी हुई है।
2032 तक डेटा सेंटर क्षमता 30 गीगावाट से ऊपर जा सकती है
बिजली मांग की वृद्धि केवल घरों और परिवहन तक सीमित नहीं है। BloombergNEF (BNEF) का अनुमान है कि यूरोप में डेटा सेंटरों की बिजली क्षमता 2032 तक दोगुनी होकर 30 गीगावाट से अधिक हो जाएगी और 2035 तक 39 गीगावाट तक पहुंच सकती है। 2035 में ब्रिटेन और जर्मनी क्षेत्र के दो सबसे बड़े बाजार बने रह सकते हैं, जहां क्षमता क्रमशः 7.7 गीगावाट और 5.1 गीगावाट रहने का अनुमान है।
दशक के अंत तक शुरुआती चरण में चल रही परियोजनाओं के शुरू होने के साथ स्पेन और फिनलैंड डेटा सेंटर बाजार की रैंकिंग में ऊपर आ सकते हैं। मौजूदा क्षमता संबंधी बाधाओं के बीच आयरलैंड और नीदरलैंड शीर्ष पांच बाजारों से बाहर हो सकते हैं। डेटा सेंटरों का विस्तार, इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग और इमारतों में इलेक्ट्रिक हीटिंग से जुड़ी नई मांग के साथ, पीक घंटों में बिजली आपूर्ति और क्षेत्रीय ट्रांसमिशन नेटवर्क पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।
लंदन स्थित हेज फंड Clean Energy Transition के मुख्य कार्यकारी Per Lekander ने कहा कि ऊर्जा उपयोग का बढ़ता हिस्सा बिजली से पूरा किया जा रहा है। इसलिए कुल ऊर्जा मांग घटने की स्थिति में भी बिजली की मांग बढ़ सकती है। उन्होंने इस बदलाव को विद्युतीकरण और डेटा सेंटर निर्माण से जोड़ा।
नवीकरणीय ऊर्जा बढ़ने से ग्रिड निवेश की लागत बढ़ी
यूरोप का बिजली मिश्रण भी बदल रहा है। 2024 में यूरोपीय संघ में सौर ऊर्जा उत्पादन कोयला आधारित बिजली उत्पादन से अधिक हो गया। Ember के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में पवन और सौर ऊर्जा से संयुक्त उत्पादन पहली बार जीवाश्म ईंधन से बने बिजली उत्पादन से अधिक रहा। यूरोपीय संघ और ब्रिटेन ने 2050 तक कार्बन-न्यूट्रल बनने का लक्ष्य बरकरार रखा है, लेकिन नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने के लिए बिजली को जोड़ने और प्रसारित करने वाली ग्रिड क्षमता में विस्तार जरूरी होगा।
यूरोपीय आयोग ने European Grid Package पेश किया है। इसमें ग्रिड उन्नयन और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए अनुमति प्रक्रिया तेज करने तथा सीमा-पार सहयोग मजबूत करने का प्रस्ताव है। European Court of Auditors की समीक्षा के अनुसार, आयोग का अनुमान है कि ग्रिड संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए यूरोपीय संघ को 2050 तक €2 ट्रिलियन से €2.3 ट्रिलियन की आवश्यकता होगी। यह राशि लगभग $2.25 ट्रिलियन से $2.6 ट्रिलियन के बराबर है।
निवेश की समयसीमा भी सीमित है। आयोग का अनुमान है कि 2030 तक यूरोपीय संघ को ग्रिड में €584 बिलियन, यानी लगभग $656 बिलियन, का निवेश करना होगा। वितरण नेटवर्क का करीब 40% हिस्सा पहले ही 40 वर्ष से अधिक पुराना है, जबकि 2030 तक सीमा-पार ट्रांसमिशन क्षमता दोगुनी होने का अनुमान है। नई बिजली मांग को भरोसेमंद तरीके से पूरा करना इस बात पर निर्भर करेगा कि बिजली उत्पादन और खपत में हो रहे बदलावों के साथ ग्रिड का विस्तार और उन्नयन कितनी तेजी से होता है।