न्यू जर्सी की खाद्य आयातक कंपनी Gellert Global Group ने 20 अक्टूबर को अमेरिकी सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर कर कनाडा से आने वाली कई वस्तुओं पर लगाए गए 50% शुल्क को चुनौती दी। कंपनी ने अमेरिकी कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड से इन शुल्कों को गैरकानूनी घोषित करने, इनके प्रवर्तन पर रोक लगाने और जिन आयातकों ने भुगतान किया है उन्हें ब्याज समेत राशि लौटाने का आदेश देने की मांग की है।
यह मामला कारोबारों और बाजारों के लिए इन शुल्कों के कानूनी आधार को फिर से केंद्र में लाता है। यदि Gellert के पक्ष में फैसला आता है, तो प्रभावित आयातकों के लिए रिफंड का रास्ता खुल सकता है। साथ ही, प्रशासन द्वारा लंबे समय से इस्तेमाल न किए गए एक कानून के आधार पर व्यापक शुल्क लगाने की क्षमता भी सीमित हो सकती है।
पहली बार Section 338 का इस्तेमाल
ट्रंप प्रशासन ने जुलाई में Tariff Act of 1930 की Section 338 का हवाला देते हुए हॉकी स्टिक, वाइन, शहद, विग और कनाडा से आने वाली अन्य वस्तुओं पर 50% शुल्क लगाया था। प्रशासन का आरोप था कि कनाडा ने अमेरिकी व्यापार के साथ भेदभाव किया है। कानून बनने के बाद 96 वर्षों में यह पहली बार था जब Section 338 के तहत शुल्क वसूला गया।
Gellert का कहना है कि उसके आयात किए जाने वाले चीज उत्पाद भी इस शुल्क के दायरे में आते हैं। कंपनी ने अपनी शिकायत में तर्क दिया कि Section 338 मूल रूप से जवाबी शुल्क लगाने के लिए बनाया गया पुराना प्रावधान है और बाद में बनाए गए कानूनों ने इसे प्रभावी रूप से अप्रासंगिक कर दिया है। कंपनी के अनुसार, कार्यपालिका मौजूदा शुल्क लगाने के लिए अब इस प्रावधान पर निर्भर नहीं कर सकती।
आयातक ने रिफंड और ब्याज मांगा
शिकायत में अदालत से शुल्कों को गैरकानूनी घोषित करने, सरकार को इन्हें लागू करने से रोकने और पहले भुगतान कर चुके आयातकों को ब्याज समेत रिफंड दिलाने का अनुरोध किया गया है। Gellert ने यह नहीं बताया कि उसने खुद कितनी राशि का भुगतान किया है। फिर भी, रिफंड का दावा कंपनी की आयात लागत और नकदी प्रवाह को सीधे प्रभावित करता है।
खाद्य आयातकों के लिए अतिरिक्त 50% शुल्क का अर्थ है कि कनाडाई वस्तुओं को अमेरिका में लाने की लागत बढ़ जाती है। कंपनियों को आपूर्तिकर्ताओं, कीमतों और भंडार की फिर से समीक्षा करनी पड़ सकती है। हालांकि, वास्तविक असर मुकदमे के नतीजे और सरकार की शुल्क नीति में संभावित बदलावों पर निर्भर करेगा।
Liberty Justice Center ने फिर उठाया शुल्क अधिकार का सवाल
Gellert की ओर से Liberty Justice Center पैरवी कर रहा है। इस संगठन ने इससे पहले ट्रंप प्रशासन के पारस्परिक शुल्कों को चुनौती देने वाला मुकदमा जीता था। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इस वर्ष फरवरी में उन उपायों को रद्द कर दिया था। सरकार अब उन शुल्कों का रिफंड संभाल रही है और पारस्परिक शुल्कों के जरिए वसूली गई लगभग 166 अरब डॉलर की राशि लौटाने की उम्मीद है।
Liberty Justice Center की CEO Sara Albrecht ने एक बयान में कहा कि यह मामला किसी व्यक्ति विशेष के बजाय राष्ट्रपति पद की संवैधानिक और कानूनी शक्तियों से जुड़ा है। उनका तर्क है कि राष्ट्रपति को दशकों से इस्तेमाल न किए गए कानून को फिर सक्रिय कर व्यापक स्तर पर वस्तुओं पर शुल्क या आयात प्रतिबंध लगाने की अनुमति नहीं होनी चाहिए, खासकर तब जब कांग्रेस ने इसके लिए स्पष्ट सीमाएं तय न की हों।
संगठन ने प्रशासन द्वारा व्यापक शुल्क लगाने के लिए अलग-अलग कानूनों के इस्तेमाल को चुनौती देते हुए दो अन्य मुकदमे भी दायर किए हैं। प्रकाशन के समय व्हाइट हाउस ने Gellert के मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की थी। इस कार्यवाही का असर प्रभावित कनाडाई वस्तुओं पर शुल्क लागू करने, आयातकों के रिफंड दावों और व्यापार नीति बदलने के लिए पुराने कानूनों पर कार्यपालिका की निर्भरता पर पड़ सकता है।