हाजिर सोना शुक्रवार को 3,992.30 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। इस सप्ताह इसकी कीमत 4% से अधिक गिर चुकी है और 4,000 डॉलर का स्तर टूटने के बाद यह जून की शुरुआत के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट की ओर है। बिकवाली का जोर गुरुवार को रहा। तकनीकी दबाव और बाजार में नकदी की उपलब्धता को लेकर चिंता ने अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड के 5% से नीचे आने और शेयर बाजार की चिंता के बीच लंबी अवधि के बॉन्ड में तेजी से मिले सहारे को पीछे छोड़ दिया।
4,065 डॉलर टूटने के बाद बढ़ी बिकवाली
सैक्सो बैंक में कमोडिटी रणनीति प्रमुख ओले हैनसन ने कहा कि बाजार में अल्पकालिक सट्टेबाज कमजोर कीमतों पर बिकवाली कर रहे हैं, जबकि दीर्घकालिक निवेशकों की अंतर्निहित मांग अब भी स्थिर है।
हैनसन के मुताबिक, बाजार में नकदी संकट जैसी स्थिति बनने की आशंका ने भी दबाव बढ़ाया। गुरुवार को सोना 4,065 डॉलर से नीचे आया तो तेजी-मंदी की चाल पर कारोबार करने वाले निवेशकों ने बिकवाली बढ़ाई। बाजार की नजर उन कीमतों पर भी रही जहां स्टॉप-लॉस ऑर्डर सक्रिय हो सकते हैं। हैनसन ने 3,970 डॉलर प्रति औंस को अगला प्रमुख समर्थन स्तर बताया।
उन्होंने कहा कि सट्टेबाजों की पोजिशनिंग चरम स्तरों के करीब हो सकती है। तकनीकी स्थिति सुधरने पर इससे अपेक्षाकृत तेज उछाल की गुंजाइश बन सकती है। हालांकि, सुधार का दौर पूरा हुआ है, इसकी पुष्टि के लिए कीमत का 4,230 डॉलर से ऊपर लौटना जरूरी हो सकता है। दिसंबर वायदा नवंबर के आखिर में समाप्त होने वाला है। हैनसन के अनुसार, पोजिशनिंग और नकदी से जुड़ा दबाव उस तारीख के करीब आने पर ही कम हो सकता है।
विश्लेषकों को अभी स्थायी रुझान पलटने के संकेत नहीं
बीसीए रिसर्च की मुख्य कमोडिटी रणनीतिकार रौकाया इब्राहिम ने कहा कि इस सप्ताह की गिरावट निराशाजनक है, लेकिन फिलहाल इससे गहरे और टिकाऊ गिरावट के रुझान का संकेत नहीं मिलता। उनके मुताबिक, गुरुवार की चाल असामान्य थी। विभिन्न परिसंपत्ति वर्गों में नकदी के दबाव और अहम समर्थन स्तरों को लेकर चिंता ने उतार-चढ़ाव बढ़ाया हो सकता है; यह जरूरी नहीं कि सोने के बुनियादी कारकों में स्पष्ट बदलाव हुआ हो।
इब्राहिम ने कहा कि व्यापक आर्थिक दबावों के बावजूद सोने ने अब तक मजबूती दिखाई है और हालिया गिरावट के बाद तकनीकी संकेतक ओवरसोल्ड क्षेत्र में पहुंच गए हैं। सोने की कीमत का अपने 200-दिवसीय मूविंग एवरेज से अंतर जुलाई के आखिर के स्तर पर पहुंचा है। उस समय कीमत ने अल्पकालिक तल बनाया था और फिर तेज उछाल आया था।
हालांकि, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और लगातार महंगाई का दबाव किसी भी सुधार को सीमित कर सकता है। इब्राहिम को उम्मीद है कि तकनीकी कारक कुछ सहारा देंगे, लेकिन व्यापक आर्थिक हालात दबाव बनाए रखेंगे। ऐसे में तेज तेजी या बड़ी गिरावट के बजाय सीमित दायरे में कारोबार की संभावना अधिक है।
ब्रिटानिया ग्लोबल मार्केट्स में धातु कारोबार प्रमुख नील वेल्श ने भी कहा कि कमजोरी बाजार की परिस्थितियों में बदलाव दर्शाती है, जरूरी नहीं कि दीर्घकालिक निवेश तर्क में कोई बुनियादी बदलाव हुआ हो। यदि शेयरों में और गिरावट आती है, तो मार्जिन की जरूरत पूरी करने के लिए नकदी जुटा रहे निवेशकों को सोना बेचना पड़ सकता है। कुछ फंड अब भी तेजी की स्थिति में हैं और केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीद से कीमतों को सहारा मिल सकता है।
फेड की नीति और डॉलर से सोने पर दबाव
यूएस बैंक वेल्थ मैनेजमेंट के वरिष्ठ निवेश रणनीतिकार रॉब हॉवर्थ के अनुसार, यदि फेडरल रिजर्व सख्त नीति जारी रखता है तो डॉलर मजबूत बना रह सकता है और सोने की बढ़त सीमित हो सकती है। उन्होंने कहा कि ब्याज दरों में बड़ी वृद्धि न होने पर भी महंगाई पर काबू पाने के लिए धीरे-धीरे सख्ती जारी रखने से सोने पर दबाव पड़ सकता है। फर्म के अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि फेड दिसंबर में और फिर अगले साल मार्च में एक-एक बार दरें बढ़ाएगा।
अगले सप्ताह फेड की नीति बैठक में ब्याज दर बढ़ने की उम्मीद नहीं है। फिर भी निवेशक इस बात के संकेत तलाशेंगे कि क्या नीति निर्माता दिसंबर में संभावित बढ़ोतरी पर विचार कर रहे हैं। बैंक ऑफ कनाडा, यूरोपीय केंद्रीय बैंक और बैंक ऑफ जापान की बैठकें भी अगले सप्ताह होनी हैं।
अमेरिका में टिकाऊ वस्तुओं के ऑर्डर, उपभोक्ता विश्वास, नए घरों की बिक्री, तीसरी तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का शुरुआती अनुमान, व्यक्तिगत उपभोग व्यय (PCE) और साप्ताहिक शुरुआती बेरोजगारी दावों के आंकड़े भी जारी होंगे।
XS.com में कारोबार विकास प्रमुख साइमन-पीटर मसाबनी ने सोने पर दबाव को महंगाई, ऊर्जा बाजारों और मध्य पूर्व के घटनाक्रम से जोड़ा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में लंबे समय तक स्थिरता रहने से ऊर्जा कीमतों में नए झटके और आपूर्ति में बाधा का जोखिम घटेगा, जिससे सोने पर गिरावट का दबाव कम हो सकता है।
संघर्ष बढ़ने पर अमेरिका में महंगाई तेज हो सकती है और बॉन्ड यील्ड बढ़ सकती है, जिससे बॉन्ड सोने के मुकाबले अधिक आकर्षक बनेंगे। इससे मध्य पूर्व और एशिया में नकदी की उपलब्धता भी घट सकती है। मसाबनी के मुताबिक, महंगाई बढ़ने और स्थानीय मुद्राओं के कमजोर होने पर कुछ निवेशक नकदी रखना पसंद कर सकते हैं।
हैनसन को साल के अंत से पहले सोने में सुधार की गुंजाइश दिखती है। पोर्टफोलियो में विविधता लाने की जरूरत और राजकोषीय तथा भू-राजनीतिक जोखिमों से बचाव की मांग कीमतों को सहारा दे सकती है। लेकिन सोना 4,230 डॉलर से ऊपर लौटने तक गिरावट के दौर के खत्म होने की पुष्टि नहीं होगी। फिलहाल कारोबारियों की नजर 3,970 डॉलर के समर्थन, अगले सप्ताह की फेड बैठक और अमेरिका के नए आर्थिक आंकड़ों पर है।