डॉक्यूमेंट्री You Can See Everything में थेरानोस की संस्थापक एलिज़ाबेथ होम्स और उनके साथी बिली इवांस की कहानी दिखाई गई है। होम्स के जेल में रहने के दौरान इवांस ने कुछ मामलों को संभाला। उनका कहना है कि उनके पास होम्स की ओर से काम करने का पावर ऑफ अटॉर्नी था। फिल्म में उन्हें होम्स के X अकाउंट से पोस्ट करते, उनकी AI छवि बनाते और उनके साथ नए कारोबार की योजनाओं पर काम करते दिखाया गया है। इन दृश्यों से एक व्यावहारिक सवाल उठता है: वित्तीय या चिकित्सा मामलों के लिए नियुक्त एजेंट वास्तव में क्या कर सकता है, और उसके अधिकार कहां खत्म होते हैं?
कार्सन वेल्थ की मैनेजिंग पार्टनर और वेल्थ एडवाइज़र डेबरा टेलर कहती हैं कि लोग अक्सर मान लेते हैं कि ऐसे दस्तावेज़ एजेंट को उससे कहीं अधिक अधिकार देते हैं, जितने वास्तव में दिए गए होते हैं। एजेंट की शक्ति दस्तावेज़ में लिखी शर्तों और लागू राज्य के कानून पर निर्भर करती है। किसी को एजेंट नियुक्त करने भर से उसे व्यक्ति के हर मामले में प्रतिनिधित्व करने या उसकी निजी ज़िंदगी के सभी पहलुओं को संभालने का अधिकार नहीं मिल जाता।
वित्तीय और चिकित्सा अधिकार अलग-अलग होते हैं
पावर ऑफ अटॉर्नी (POA) एक कानूनी दस्तावेज़ है, जिसके जरिए कोई व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को तय फैसले लेने या विशेष काम संभालने का अधिकार देता है। आम तौर पर इसकी व्यवस्था स्वास्थ्य देखभाल या वित्तीय मामलों के लिए की जाती है। व्यापक भाषा वाला वित्तीय POA एजेंट को कारोबारी हित संभालने की अनुमति दे सकता है। लेकिन उपहार देने, लाभार्थी बदलने या ट्रस्ट बनाने जैसे संवेदनशील कदमों के लिए आम तौर पर दस्तावेज़ में स्पष्ट अनुमति जरूरी होती है। कुछ राज्यों में खास तरह के उपहार या बैंकिंग लेनदेन के लिए विशिष्ट शब्दावली भी आवश्यक है।
एजेंट दिए गए अधिकारों के भीतर दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर कर सकता है और लेनदेन कर सकता है। इसका यह अर्थ नहीं कि एजेंट की निजी राय को मूल व्यक्ति की इच्छा माना जाए। टेलर के मुताबिक, ज्यादातर राज्यों में एजेंट को मूल व्यक्ति के ईमेल या निजी संदेश देखने का अधिकार नहीं होता, जब तक दस्तावेज़ में इसकी खास अनुमति न हो। एजेंट किन मामलों को संभाल सकता है और कौन-सी जानकारी देख सकता है, यह POA की शर्तों और संबंधित राज्य के कानून से तय होता है।
जेल जाने से POA अपने आप लागू नहीं होता
डॉक्यूमेंट्री में इवांस कहते हैं कि होम्स ने ऐसा POA हस्ताक्षरित किया था, जिससे वे उनके कारोबारी फैसले संभाल सकते थे। लेकिन जेल जाने पर POA लागू हो जाता है या नहीं, इसका कोई एक सार्वभौमिक नियम नहीं है। ये दस्तावेज़ राज्य कानूनों के अधीन होते हैं और अलग-अलग राज्यों में इनके प्रभावी होने की शर्तें तथा दिए जा सकने वाले अधिकार अलग हैं।
तुरंत प्रभावी टिकाऊ POA आम तौर पर हस्ताक्षर होते ही लागू हो जाता है और तब तक बना रहता है, जब तक उसे देने वाला व्यक्ति इसे रद्द न करे या उसकी मृत्यु न हो जाए। सीमित POA केवल तय मामलों पर लागू होता है और उसमें समाप्ति की तारीख भी हो सकती है। शर्त-आधारित, यानी स्प्रिंगिंग POA, किसी निर्धारित घटना के बाद ही प्रभावी होता है। इसकी आम शर्त यह है कि व्यक्ति निर्णय लेने में अक्षम हो जाए। टेलर कहती हैं कि कई राज्यों में जेल जाने को भी ऐसी शर्त बनाया जा सकता है और किसी व्यक्ति को लिखित रूप में इसकी पुष्टि करने के लिए नामित किया जा सकता है।
स्प्रिंगिंग व्यवस्था में एजेंट को यह साबित करना पड़ सकता है कि तय शर्त पूरी हो गई है। बैंक को दस्तावेज़ों की जांच में समय लग सकता है। टेलर के अनुसार, कुछ परिस्थितियों में तुरंत प्रभावी टिकाऊ POA होने से एजेंट के लिए बिना देरी काम करना आसान हो सकता है। कौन-सी व्यवस्था उपयुक्त होगी, यह व्यक्ति की स्थिति और संबंधित राज्य के कानून पर निर्भर करता है।
एजेंट पर भरोसे और हिसाब-किताब की जिम्मेदारी
एजेंट का कानूनी दायित्व है कि वह मूल व्यक्ति के हित में काम करे, हितों के टकराव से बचे और लेनदेन का रिकॉर्ड रखे। यदि मूल व्यक्ति फैसले लेने में सक्षम है और उसे लगता है कि एजेंट उसके हितों के खिलाफ काम कर रहा है, तो वह लिखित रूप में POA रद्द कर सकता है और वित्तीय संस्थानों तथा दस्तावेज़ की प्रति रखने वाले अन्य लोगों को इसकी सूचना दे सकता है। वह भरोसे के दायित्व के उल्लंघन पर मुकदमा भी कर सकता है। अधिकारों का गंभीर दुरुपयोग, लागू कानून के आधार पर, चोरी या वित्तीय शोषण माना जा सकता है।
दुरुपयोग का संदेह होने पर तीसरे पक्ष क्या कदम उठा सकते हैं, यह उनकी भूमिका और मूल व्यक्ति की परिस्थिति पर निर्भर करता है। परिवार के सदस्य, उत्तराधिकारी, देखभाल करने वाले या सरकारी एजेंसियां अदालत से एजेंट के कामकाज की समीक्षा करने को कह सकते हैं। किसी बुज़ुर्ग या अन्य असुरक्षित वयस्क के संभावित शोषण की सूचना वयस्क संरक्षण सेवाओं को भी दी जा सकती है। दुरुपयोग का संदेह होने पर बैंक POA स्वीकार करने से इनकार कर सकता है और अपनी चिंता की रिपोर्ट कर सकता है। ब्रोकरेज कंपनियां किसी बुज़ुर्ग ग्राहक या निर्णय क्षमता में कमी वाले व्यक्ति से जुड़े संदिग्ध निकासी या लेनदेन पर अस्थायी रोक लगा सकती हैं। यदि मूल व्यक्ति फैसले लेने में सक्षम है, तो अदालतें आम तौर पर उसकी अपनी पसंद को प्राथमिकता देती हैं।
जीवनसाथी के साथ एक वैकल्पिक एजेंट भी चुनें
जीवनसाथी पहली पसंद हो सकता है, क्योंकि वह अक्सर व्यक्ति की वित्तीय स्थिति और इच्छाओं से परिचित होता है। लेकिन जीवनसाथी भी उम्रदराज़ हो सकता है या उसे उसी समय सहायता की जरूरत पड़ सकती है, जिससे दोनों के लिए काम करना मुश्किल हो जाए। टेलर के मुताबिक, इसलिए एक वैकल्पिक एजेंट का नाम भी तय करना चाहिए।
वैवाहिक स्थिति बदलने से नियुक्ति पर असर पड़ सकता है। कई राज्यों में तलाक की याचिका दाखिल होने या तलाक अंतिम होने पर जीवनसाथी का अधिकार अपने आप समाप्त हो जाता है, हालांकि नियम अलग-अलग हैं। टेलर अलग होने की स्थिति में दस्तावेज़ों की समीक्षा और उन्हें अपडेट करने की सलाह देती हैं। होम्स और इवांस कानूनी रूप से विवाहित नहीं थे, इसलिए उनका अलग होना कुछ राज्यों में तलाक के बाद होने वाले बदलाव जैसा असर अपने आप नहीं डालता। होम्स को यह अधिकार स्वयं रद्द करना पड़ता।
मिश्रित परिवारों में वयस्क बच्चों को सह-एजेंट बनाना एक विकल्प है। दूसरा तरीका यह है कि जीवनसाथी से नियमित रूप से किसी अन्य व्यक्ति को जानकारी देने की शर्त रखी जाए, जिससे आगे विवाद की आशंका कम हो सकती है। टेलर हर कुछ वर्षों में और घर बदलने के बाद POA दस्तावेज़ों की समीक्षा करने की सलाह देती हैं। दस्तावेज़ पुराने पड़ सकते हैं या दूसरे राज्य के कानूनों के तहत अपेक्षित तरीके से काम नहीं कर सकते। पहले से उत्तराधिकारी एजेंट तय करना और किसी दूसरे व्यक्ति को नियमित रिपोर्ट देने की शर्त रखना निगरानी के उपाय हो सकते हैं।
डॉक्यूमेंट्री रिश्ते को लेकर उठी चिंताओं को अपनी कहानी का हिस्सा बनाती है, लेकिन POA वित्तीय या चिकित्सा मामलों की व्यवस्था करने का साधन है। इसमें अधिकारों का दायरा, लागू होने की शर्तें, रद्द करने की प्रक्रिया और निगरानी की व्यवस्था अहम हैं। फिल्म के दृश्य वास्तविक POA दस्तावेज़ और उस पर लागू कानून की समीक्षा का विकल्प नहीं हैं।