संयुक्त राष्ट्र की एक जांच में कहा गया है कि ईरान में अमेरिकी बलों की कार्रवाई को युद्ध अपराध मानने के लिए “उचित आधार” मौजूद हैं। जांच में दो हवाई हमलों का उल्लेख किया गया है, जिनमें 170 से अधिक नागरिकों की मौत हुई। अमेरिका ने इन निष्कर्षों को खारिज कर दिया है।
संयुक्त राष्ट्र के ईरान संबंधी स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय तथ्य-जांच मिशन ने मिनाब स्थित एक प्राथमिक विद्यालय पर टॉमहॉक मिसाइल हमले और एक अलग मिसाइल हमले की जांच की। मिनाब स्कूल पर हुए हमले में 150 से अधिक लोग मारे गए। दूसरे हमले में स्पष्ट रूप से पहचाने जा सकने वाले एक खेल परिसर और आसपास के रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया गया, जिसमें 22 नागरिकों की मौत हुई।
इन निष्कर्षों से अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार व्यवस्था के बीच तनाव बढ़ सकता है। इससे ईरान में अमेरिकी सैन्य अभियानों को लेकर लगाए गए आरोपों पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान भी बढ़ेगा। हालांकि, मिशन की भाषा किसी अंतरराष्ट्रीय अदालत का अंतिम फैसला नहीं है। उसका कहना है कि इन हमलों में नागरिकों की मौत और नागरिक ढांचे को नुकसान पहुंचने की संभावना पर आगे जांच के लिए पर्याप्त आधार हैं।
जांच में मिनाब स्कूल को बताया गया मुख्य निशाना
जांचकर्ताओं के अनुसार, मिनाब स्कूल ही हमले का इच्छित लक्ष्य था। उन्हें ऐसा कोई संकेत नहीं मिला कि नुकसान पास स्थित ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड की सुविधा पर किए गए हमले से गलती या आकस्मिक रूप से हुआ हो।
मिशन ने कहा कि स्कूल पर हमले के समय उसके सैन्य इस्तेमाल की पुष्टि करने वाली कोई जानकारी नहीं मिली। यदि ये तथ्य आगे की जांच में सही पाए जाते हैं, तो बिना सैन्य भूमिका वाले स्कूल पर ऐसा हमला, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई हो, अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत गंभीर सवाल खड़े कर सकता है। इनमें सैन्य लक्ष्यों और नागरिक ठिकानों के बीच अंतर करने तथा अंधाधुंध हमलों से बचने की बाध्यताएं शामिल हैं।
दूसरे हमले में एक खेल परिसर और रिहायशी इलाकों को नुकसान पहुंचा। जांचकर्ताओं ने इस घटना को भी आगे की पड़ताल के लिए सूचीबद्ध किया है। इसमें लक्ष्यों की प्रकृति और नागरिकों की मौत से जुड़ी परिस्थितियों की जांच शामिल है।
मिशन ने ईरान पर मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोप भी लगाए हैं और कहा है कि देश के भीतर मानवता के खिलाफ अपराध हुए हैं। इसलिए रिपोर्ट केवल अमेरिकी बलों पर केंद्रित नहीं है; इसमें संघर्ष में शामिल कई पक्षों से जुड़े नागरिक सुरक्षा और मानवाधिकार संबंधी आरोप दर्ज किए गए हैं।
अमेरिकी विदेश विभाग और व्हाइट हाउस ने रिपोर्ट ठुकराई
अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि वॉशिंगटन मिशन के निष्कर्षों को स्वीकार नहीं करता। अधिकारी ने संयुक्त राष्ट्र संस्थाओं पर बार-बार अमेरिका-विरोधी और यहूदी-विरोधी बयान देने का आरोप लगाया और कहा कि वे दमनकारी शासन के प्रति नरम रुख अपनाती हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग ने इन निष्कर्षों पर तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी थी।
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता अन्ना केली ने कहा कि संघर्ष में युद्ध अपराध करने वाला एकमात्र पक्ष ईरानी शासन है। प्रशासन की प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि वॉशिंगटन अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के संबंध में मिशन के कानूनी आकलन को अस्वीकार करता है और ध्यान ईरान के सैन्य आचरण तथा मानवाधिकार रिकॉर्ड की ओर खींच रहा है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर वाले कार्यकारी आदेश के तहत अमेरिका फरवरी 2025 में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से बाहर हो गया था। इसके बाद उसने संयुक्त राष्ट्र की कुछ संस्थाओं को मिलने वाली वित्तीय सहायता भी रोक दी। उस समय व्हाइट हाउस ने कहा था कि मानवाधिकार परिषद समेत कुछ संयुक्त राष्ट्र संस्थाओं और निकायों की गतिविधियां अमेरिकी हितों के अनुरूप नहीं थीं।
ईरानी प्रतिनिधिमंडल को संयुक्त राष्ट्र महासभा में आने की अनुमति
ये निष्कर्ष ऐसे समय आए हैं जब मध्य पूर्व संघर्ष को लेकर बातचीत फिर शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, खाड़ी के अरब देश, अमेरिका और ईरान अगले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान बैठक कर सकते हैं। हालांकि समय और प्रतिनिधित्व की व्यवस्था अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुई है।
अमेरिका ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल को महासभा में शामिल होने के लिए न्यूयॉर्क आने की मंजूरी दे दी है। अमेरिकी विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों पर यात्रा संबंधी प्रतिबंध लागू होंगे और वे लग्जरी सामान या अन्य प्रतिबंधित उत्पाद नहीं खरीद सकेंगे।
प्रतिनिधिमंडल में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और विदेश मंत्री अब्बास अराघची के शामिल होने की उम्मीद है। बाजारों के लिए संयुक्त राष्ट्र के ये निष्कर्ष और संभावित कूटनीतिक संपर्क एक साथ सामने आना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे अमेरिका-ईरान सैन्य गतिविधियों, प्रतिबंधों की व्यवस्था और क्षेत्रीय शिपिंग तथा ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े जोखिमों पर ध्यान बना रहेगा।
फिलहाल यह स्पष्ट है कि हवाई हमलों की जिम्मेदारी को लेकर वॉशिंगटन और तेहरान के रुख में गहरा मतभेद है। मृतकों की संख्या और हमलों में निशाना बनाए गए स्थलों की स्थिति से जुड़े तथ्य आगे की जांच के अधीन रह सकते हैं।